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चीनी मिल की खबर
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रसड़ा। सहकारी क्षेत्र की बंद पड़ी रसड़ा चीनी मिल को फिर से चालू किया जाएगा। शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में फैसला दिया गया है कि निजी क्षेत्र के हाथों में इसका संचालन दिया जाएगा। इसे फैसले से वर्ष 2006-07 से बंद मिल को संजीवनी मिलेगी। चीनी मिल को इंटीग्रेटेड शुगर कांप्लेक्स के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया है। एक ही परिसर में चीनी मिल, आसवनी व कोजनरेशन प्लांट की स्थापना की जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 400 करोड़ रुपये का निवेश होगा। रसड़ा में इंटीग्रेटेड शुगर काम्प्लेक्स से आठ हजार किसानों को लाभ होगा। 8500 लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी होने पर चीनी मिल के पूर्व कर्मचारियों के साथ व्यापारी वर्ग में भी प्रसन्नता है, किसान भी खुश हैं कि नगद फसल के रूप में गन्ना की अच्छी पैदावर वे करेंगे। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार प्रबंधन की लूट खसोट से घाटे में चलने वाली चीनी मिल को सरकार ने सत्र 12-13 में बंद कर दिया था। इस चीनी मिल को कांग्रेस शासनकाल में 1972 में खोला गया था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका शिलान्यास किया। 1975 -76 में जिलाधिकारी ने मिल का पेराई सत्र भी चालू कराया था। इसमें छह सौ से सात सौ के बीच डेलीवेज, सीजनल एवं स्थाई कर्मचारी कार्य करते थे। प्रबंधतंत्र की लूट-खसोट के चलते चीनी मिल प्रतिवर्ष करोड़ों की घाटे में चलने लगी। इसके कारण मिल लगभग डेढ़ अरब से ऊपर के घाटे में हो गयी। यही कारण रहा कि अंतत: शासन ने सत्र 12 - 13 में पेराई सत्र को बंद कर दिया गया।
सपा शासनकाल में मिल के कर्मचारियो के वेतन एवम फण्ड ग्रेजुएटी के लिए नौ करोड़ का बजट दिया गया था। जिससे कर्मचारियों के बकाया वेतन एवं फंड ग्रेजुएटी का निस्तारण किया गया था। जो अभी भी कर्मचारियों का वेतन 30 माह का बकाया है। प्रबंध तंत्र की लापरवाही का आलम यह था कि दो दर्जन कर्मचारियों का ऑफिस रिकॉर्ड गायब हो गया। इससे फंड एवं ग्रेजुएटी का धन अब तक प्राप्त नहीं हो सका है। इस समय मिल में आठ होमगार्ड चार मिल सुरक्षा कर्मी एक कर्मी एवम एक संविदा कर्मी कार्यरत है। वर्तमान में मिल की देखरेख घोषी मिल के प्रबंधक केएन सिंह के जिम्मे है।
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कैबिनेट के फैसले की जानकारी होने पर चीनी मिल के पूर्व कर्मचारियों के साथ व्यापारी वर्ग में भी प्रसन्नता है, किसान भी खुश हैं कि नगद फसल के रूप में गन्ना की अच्छी पैदावर वे करेंगे। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार प्रबंधन की लूट खसोट से घाटे में चलने वाली चीनी मिल को सरकार ने सत्र 12-13 में बंद कर दिया था। इस चीनी मिल को कांग्रेस शासनकाल में 1972 में खोला गया था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका शिलान्यास किया। 1975 -76 में जिलाधिकारी ने मिल का पेराई सत्र भी चालू कराया था। इसमें छह सौ से सात सौ के बीच डेलीवेज, सीजनल एवं स्थाई कर्मचारी कार्य करते थे। प्रबंधतंत्र की लूट-खसोट के चलते चीनी मिल प्रतिवर्ष करोड़ों की घाटे में चलने लगी। इसके कारण मिल लगभग डेढ़ अरब से ऊपर के घाटे में हो गयी। यही कारण रहा कि अंतत: शासन ने सत्र 12 - 13 में पेराई सत्र को बंद कर दिया गया।
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सपा शासनकाल में मिल के कर्मचारियो के वेतन एवम फण्ड ग्रेजुएटी के लिए नौ करोड़ का बजट दिया गया था। जिससे कर्मचारियों के बकाया वेतन एवं फंड ग्रेजुएटी का निस्तारण किया गया था। जो अभी भी कर्मचारियों का वेतन 30 माह का बकाया है। प्रबंध तंत्र की लापरवाही का आलम यह था कि दो दर्जन कर्मचारियों का ऑफिस रिकॉर्ड गायब हो गया। इससे फंड एवं ग्रेजुएटी का धन अब तक प्राप्त नहीं हो सका है। इस समय मिल में आठ होमगार्ड चार मिल सुरक्षा कर्मी एक कर्मी एवम एक संविदा कर्मी कार्यरत है। वर्तमान में मिल की देखरेख घोषी मिल के प्रबंधक केएन सिंह के जिम्मे है।
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