{"_id":"5b478c6f4f1c1b97468b6138","slug":"21531415663-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी की सीमा में आते ही लाल बालू की कीमत हो जाता है दोगुना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी की सीमा में आते ही लाल बालू की कीमत हो जाता है दोगुना
Updated Thu, 12 Jul 2018 10:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया/जयप्रकाशनगर। जिले में चल रहे लाल बालू की तस्करी से माफिया से लेकर विभिन्न विभागों के अफसर जहां लाल हो रहे हैं वहीं आम जनता अपनी जेब कटने के कारण कंगाल होती जा रही है। पुलिस व वन विभाग की मिलीभगत से यह धंधा सीमावर्ती इलाका नरहीं थाना के भरौली गंगा पुल व बैरिया थाना के जयप्रकाशनगर में जोरों पर चल रहा है। लाल बालू का काला खेल सीमावर्ती इलाकों में सड़क से लेकर नदियों के रास्ते तक हो रहा है और सब कुछ जानते हुए पुलिस मौन धारण किए रहती है। बिहार-यूपी की करीब एक किमी की दूरी पार करते ही इस लाल बालू की कीमत दोगुना हो जाती है।
नरहीं थाना क्षेत्र का भरौली गंगा पुल का रास्ता तस्करी के लिए काफी मुफ ीद है। इस रास्ते से दो तरफा तस्करी होती है। लाल बालू की तस्करी तो पिछले कई सालों से चल रही है और सरकार के लाख प्रयास के बावजूद इस पर लगाम नहीं लग पा रही है। बताया जाता है कि तस्कर गंगा पुल के बिहार के छोर पर तस्कर लाल बालू को कोईलवर से मंगाकर डंप करते हैं। पुल पर भारी वाहनों के आवागमन प्रतिबंधित होने के कारण छोटे वाहनों से एक किमी लंबे पुल से लाल बालू को पार कराते हैं और इसके एवज में तस्कर पुलिस व वन विभाग के कर्मियों को चढ़ावा देते हैं। बिहार सीमा में प्रति 100 घनफुट लाल बालू की कीमत जहां तीन हजार होती है वहीं एक किमी की दूूरी तय करने के बाद यूपी की सीमा में इसे प्रति 100 घनफुट आठ से नौ हजार रुपये में बेचा जाता है। घर बनाने वाले लोग मजबूरी में इसे खरीदते हैं क्योंकि आम लोगों के बालू लाने पर पुलिस रोक देती है।
इसी तरह बैरिया थाना क्षेत्र के जेपी नगर में मात्र एक किलोमीटर के दूरी तय कर बिहार से आने वाला लाल बालू की कीमत दुगुना हो जाती है। सोनबरसा गांव निवासी मनोज कुमार ओझा ने कहा कि यह गोरखधंधा सालों से चल रहा है और इसको लेकर विभागों की ओर से कोई मानक तय नहीं किया गया। कहा कि बिहार के कोईलवर से आने वाला लाल बालू जहां मांझी घाट प्रति ट्रक जहां करीब 40 से 47 हजार रुपये होती है वहीं ट्रक के जयप्रभा सेतु से पार कर करीब एक किमी की दूरी तय कर यूपी में आते ही उसकी कीमत 80 हजार से एक लाख रुपये तक हो जाती है। क्षेत्र के पांडेयपुर गांव निवासी छात्र नेता मैनेजर सिंह का कहना है कि यह लाल बालू आज से नही वर्षों से आता रहा है लेकिन आखिर इस सरकार में ही इस लाल बालू के प्रति ऐसा क्यों है। धतुरी टोला निवासी अशोक कुमार सिंह का कहना है कि लाल बालू की काला बाजारी के चलते निर्माण कराने वाले लोगों के साथ बिल्डिंग मैटेरियल के दुकानदारों आदि को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैरिया निवासी प्रवीण सिंह ने कहा कि लाल बालू का मानक तय नहीं होने के कारण इसकी कीमत आसमान छू रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नरहीं थाना क्षेत्र का भरौली गंगा पुल का रास्ता तस्करी के लिए काफी मुफ ीद है। इस रास्ते से दो तरफा तस्करी होती है। लाल बालू की तस्करी तो पिछले कई सालों से चल रही है और सरकार के लाख प्रयास के बावजूद इस पर लगाम नहीं लग पा रही है। बताया जाता है कि तस्कर गंगा पुल के बिहार के छोर पर तस्कर लाल बालू को कोईलवर से मंगाकर डंप करते हैं। पुल पर भारी वाहनों के आवागमन प्रतिबंधित होने के कारण छोटे वाहनों से एक किमी लंबे पुल से लाल बालू को पार कराते हैं और इसके एवज में तस्कर पुलिस व वन विभाग के कर्मियों को चढ़ावा देते हैं। बिहार सीमा में प्रति 100 घनफुट लाल बालू की कीमत जहां तीन हजार होती है वहीं एक किमी की दूूरी तय करने के बाद यूपी की सीमा में इसे प्रति 100 घनफुट आठ से नौ हजार रुपये में बेचा जाता है। घर बनाने वाले लोग मजबूरी में इसे खरीदते हैं क्योंकि आम लोगों के बालू लाने पर पुलिस रोक देती है।
विज्ञापन
इसी तरह बैरिया थाना क्षेत्र के जेपी नगर में मात्र एक किलोमीटर के दूरी तय कर बिहार से आने वाला लाल बालू की कीमत दुगुना हो जाती है। सोनबरसा गांव निवासी मनोज कुमार ओझा ने कहा कि यह गोरखधंधा सालों से चल रहा है और इसको लेकर विभागों की ओर से कोई मानक तय नहीं किया गया। कहा कि बिहार के कोईलवर से आने वाला लाल बालू जहां मांझी घाट प्रति ट्रक जहां करीब 40 से 47 हजार रुपये होती है वहीं ट्रक के जयप्रभा सेतु से पार कर करीब एक किमी की दूरी तय कर यूपी में आते ही उसकी कीमत 80 हजार से एक लाख रुपये तक हो जाती है। क्षेत्र के पांडेयपुर गांव निवासी छात्र नेता मैनेजर सिंह का कहना है कि यह लाल बालू आज से नही वर्षों से आता रहा है लेकिन आखिर इस सरकार में ही इस लाल बालू के प्रति ऐसा क्यों है। धतुरी टोला निवासी अशोक कुमार सिंह का कहना है कि लाल बालू की काला बाजारी के चलते निर्माण कराने वाले लोगों के साथ बिल्डिंग मैटेरियल के दुकानदारों आदि को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैरिया निवासी प्रवीण सिंह ने कहा कि लाल बालू का मानक तय नहीं होने के कारण इसकी कीमत आसमान छू रही है।
विज्ञापन