{"_id":"59ecd7304f1c1b6e548b8656","slug":"21508693808-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिकित्सक के अभाव में दम तोड़ रहा पीएचसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिकित्सक के अभाव में दम तोड़ रहा पीएचसी
Updated Sun, 22 Oct 2017 11:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रसड़ा। योगी सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का दावा को क्षेत्र के कोटवारी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हवा निकालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। चिकित्सक के अभाव में ये स्वास्थ्य केंद्र शो पीस बनकर रह गया है। जिससे मरीज भी इस अस्पताल से मुंह मोड़ निजी चिकित्सकों के यहां इलाज कराने को विवश है।
दुर्दशा का आलम यह है की केवल चतुर्थ श्रेणियों के कर्मचारियों स्वीपर के भरोसे अस्पताल खुलता एवं बंद होता है। कहने को तो इस अस्पताल में बेहतर सेवा देने के लिए आठ कर्मचारी नियुक्त है। जिसमें एक चिकित्सक के रूप में डॉ. रासिक मुराद, फार्मासिस्ट संजीव कुमार यादव, एलए खून जांच करने के लिए विनोद सिंह, वार्ड ब्याय शशिकान्त हेल्फर, रवींद्र स्वीपर, श्याम सुन्दर, गीता देवी तथा एनम के पद पर पुष्पा देवी कार्यरत है। स्वास्थ्य सेवा में बेहतर सेवा देने की सरकार की मंशाओं पर ये कर्मचारी पूरी तरह पानी फेरते नजर आ रहे हैं। डॉ. समेत कर्मचारी इस अस्पताल में कब आयेंगे कब जायेंगे उन्हें स्वयं ही पता नहीं है। मरीज भी इनके अनुपस्थिति रहने से अब इस अस्पताल से मुंह मोड़ लिया है। ये कर्मचारी उपस्थिति पंजिका पर केवल हाजिरी लगाने केे उद्देश्य से ही उपस्थित होते हैं। बिना काम के ही ये कर्मचारी वेतन आहरण कर लेना अपनी शान शौकत समझते हैं। भाजपा सरकार बनते क्षेत्रवासियों की उम्मीद बढ़ी थी की शायद अस्पताल के दिन बहुरेंगे, वहीं ढाक की पात वाली कहानी चरितार्थ नजर आ रही है। नव निर्मित अस्पताल भी लूट खसोट की भेंट चढ़ कर आधा अधूरा निर्माण होकर ही शोभा बढ़ा रहा है। ग्राम प्रधान बृजेश कन्नौजिया, गुलाब चन्द वर्मा, रामजी सिंह, समाज सेवी सुरेन्द्र साहू, संजय पासवान, राजेश गुप्ता, दिनेश तिवारी, संजय चैरसिया, धर्मेन्द्र सिंह आदि ने चेताया कि तत्काल अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिये बाध्य होंगे।
विज्ञापन
दुर्दशा का आलम यह है की केवल चतुर्थ श्रेणियों के कर्मचारियों स्वीपर के भरोसे अस्पताल खुलता एवं बंद होता है। कहने को तो इस अस्पताल में बेहतर सेवा देने के लिए आठ कर्मचारी नियुक्त है। जिसमें एक चिकित्सक के रूप में डॉ. रासिक मुराद, फार्मासिस्ट संजीव कुमार यादव, एलए खून जांच करने के लिए विनोद सिंह, वार्ड ब्याय शशिकान्त हेल्फर, रवींद्र स्वीपर, श्याम सुन्दर, गीता देवी तथा एनम के पद पर पुष्पा देवी कार्यरत है। स्वास्थ्य सेवा में बेहतर सेवा देने की सरकार की मंशाओं पर ये कर्मचारी पूरी तरह पानी फेरते नजर आ रहे हैं। डॉ. समेत कर्मचारी इस अस्पताल में कब आयेंगे कब जायेंगे उन्हें स्वयं ही पता नहीं है। मरीज भी इनके अनुपस्थिति रहने से अब इस अस्पताल से मुंह मोड़ लिया है। ये कर्मचारी उपस्थिति पंजिका पर केवल हाजिरी लगाने केे उद्देश्य से ही उपस्थित होते हैं। बिना काम के ही ये कर्मचारी वेतन आहरण कर लेना अपनी शान शौकत समझते हैं। भाजपा सरकार बनते क्षेत्रवासियों की उम्मीद बढ़ी थी की शायद अस्पताल के दिन बहुरेंगे, वहीं ढाक की पात वाली कहानी चरितार्थ नजर आ रही है। नव निर्मित अस्पताल भी लूट खसोट की भेंट चढ़ कर आधा अधूरा निर्माण होकर ही शोभा बढ़ा रहा है। ग्राम प्रधान बृजेश कन्नौजिया, गुलाब चन्द वर्मा, रामजी सिंह, समाज सेवी सुरेन्द्र साहू, संजय पासवान, राजेश गुप्ता, दिनेश तिवारी, संजय चैरसिया, धर्मेन्द्र सिंह आदि ने चेताया कि तत्काल अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिये बाध्य होंगे।
विज्ञापन