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अब से अगले 75 वर्षों तक 15 को ही मनाएंगे मकर संक्रांति
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बलिया। मकर संक्रांति त्यौहार के लिए बाजार में दुकानें सज गई हैं। तिल, चावल, मक्का, मूंगफली आदि की खरीदारी लोग कर रहे हैं। रविवार को नगर शहीद पार्क चौक तथा गुदरी बाजार में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की। मान्यता है कि मकर संक्रांति के बाद से मौसम में बदलाव होने लगता है।
नगर सहित विभिन्न कस्बों में मकर संक्रांति पर्व के मद्देनजर चूड़ा, गुड़, लाई आदि की दुकानें सज गई हैं। बाजारों में खरीदारों की भीड़ से लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके पर मोदी और राहुल ब्रांड के पतंगों की खरीदारी की होड़ मची हुई है। नगर के शहीद पार्क में दर्जनों पर रविवार को पूरे दिन खरीदारों की भीड़ उमड़ी रही। मकर संक्रांति के मद्देनजर शहर में तिल, चिवड़ा और तिलकुट की दुकानें सज गई हैं। नगर के गुदरी बाजार निवासी दुकानदार ओमप्रकाश ने बताया कि चूड़ा 30 से 45 रुपये प्रति किलो, लाई 50 प्रति किलो, लाई का ढुुंढा 80 रुपये किलो, गुड़ का तिलवा 80 रुपये किलो, तिल की पट्टी 120 रुपये किलो, लाई पट्टी 80 रुपये किलो, तिल की बर्फी 240 रुपये किलो और बादाम की पट्टी 120 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है।
खगोलीय घटनाक्रम के कारण अब से 75 वर्षों तक 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना और शास्त्र के अनुसार मकर राशि पर सूर्य गमन का बहुत बड़ा महत्व है। थम्हनपुरा निवासी व ज्योतिष अभय प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि प्रत्येक 75 वर्षों पर सूर्य की संक्रांति में एक दिन की बढ़ोत्तरी हो जाती है। इस अनुसार सन 1944 के पहले 13 जनवरी को और 1869 के पहले 12 जनवरी को मकर संक्रांति पड़ती थी। इसके बाद 1869 से 2018 तक 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाया गया था। लेकिन इस बार सूर्य अपने गति के अनुसार 14/15 जनवरी की रात दो बजकर 19 मिनट में मकर राशि पर आ रहा है। लिहाजा 15 को ही खिचड़ी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन दान का बड़ा महत्व है साथ ही देवताओं का दिन और असुरों की रात आज से ही शुरू होती है।
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नगर सहित विभिन्न कस्बों में मकर संक्रांति पर्व के मद्देनजर चूड़ा, गुड़, लाई आदि की दुकानें सज गई हैं। बाजारों में खरीदारों की भीड़ से लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके पर मोदी और राहुल ब्रांड के पतंगों की खरीदारी की होड़ मची हुई है। नगर के शहीद पार्क में दर्जनों पर रविवार को पूरे दिन खरीदारों की भीड़ उमड़ी रही। मकर संक्रांति के मद्देनजर शहर में तिल, चिवड़ा और तिलकुट की दुकानें सज गई हैं। नगर के गुदरी बाजार निवासी दुकानदार ओमप्रकाश ने बताया कि चूड़ा 30 से 45 रुपये प्रति किलो, लाई 50 प्रति किलो, लाई का ढुुंढा 80 रुपये किलो, गुड़ का तिलवा 80 रुपये किलो, तिल की पट्टी 120 रुपये किलो, लाई पट्टी 80 रुपये किलो, तिल की बर्फी 240 रुपये किलो और बादाम की पट्टी 120 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है।
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खगोलीय घटनाक्रम के कारण अब से 75 वर्षों तक 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना और शास्त्र के अनुसार मकर राशि पर सूर्य गमन का बहुत बड़ा महत्व है। थम्हनपुरा निवासी व ज्योतिष अभय प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि प्रत्येक 75 वर्षों पर सूर्य की संक्रांति में एक दिन की बढ़ोत्तरी हो जाती है। इस अनुसार सन 1944 के पहले 13 जनवरी को और 1869 के पहले 12 जनवरी को मकर संक्रांति पड़ती थी। इसके बाद 1869 से 2018 तक 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाया गया था। लेकिन इस बार सूर्य अपने गति के अनुसार 14/15 जनवरी की रात दो बजकर 19 मिनट में मकर राशि पर आ रहा है। लिहाजा 15 को ही खिचड़ी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन दान का बड़ा महत्व है साथ ही देवताओं का दिन और असुरों की रात आज से ही शुरू होती है।
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