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उत्पाद को बर्बाद होते नहीं देख सकता किसान : मस्त
Updated Wed, 13 Jun 2018 11:44 PM IST
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बैरिया। भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भदोही सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि किसी भी हालत में भारत का किसान ना तो दूध सड़क पर बहा सकता है और ना ही फल और सब्जियां सड़कों पर वाहनों से रौंदवा सकता है। ऐसा वह किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं कर सकता। किसी किसान से पूछ कर तो देखें। वह यह नहीं समझते की कृषि भारतीय समाज की जीवन धारा है। सड़क पर दूध बहाने व सब्जियों फलों को रौंदवाने वाले लोगों के पाखंड को भारत के किसान भली भांति समझते हैं। उक्त बातें मस्त ने मंगलवार को देर शाम अपने पैतृक गांव दोकटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।
सांसद मस्त ने कहा कि किसान आंदोलन कभी भी सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश समाज व किसान के हित के लिए होता है। आंदोलन की आग में हाथ सेंक रहे लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि ग्राम पंचायत सदस्य पद से लेकर सांसद तक हर चुना हुआ जनप्रतिनिधि सत्ता का हिस्सा होता है। उसकी जिम्मेदारी होती है कि सरकार की योजनाओं का लाभ वह जनता तक पहुंचाने में मदद करें । अब राहुल गांधी और सिंधिया किसान समस्या के बारे में क्या समझेंगे? किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार देश की सरकार ने कृषि बजट में 52 प्रतिशत हिस्सा रखा है। तमाम योजनाएं लागू की गई हैं। उन योजनाओं को जाने, समझे, किसानों को जागरूक करें, उन्हें लाभ दिलवाएं। यह नैतिक जिम्मेदारी सत्ता या विपक्ष का कोई भी चुना हुआ जनप्रतिनिधि, समाज का जागरूक वर्ग व पत्रकारों की भी है। बताया कि सरकार ने मेड़बंदी, मेड़ पर पेड़ लगाने, बांस की खेती, दुग्ध उत्पादन, जल संरक्षण, गोबर की खाद पर सब्सिडी, गौशाला योजना, ऑर्गेनिक खेती जैसी तमाम योजनाएं चलाई हैं। अगर किसान नहीं समझ पा रहा है तो उसे समझाएं। उसे जागरूक करें। उसे लाभ दिलवाएं। तब वह उत्साहित होकर काम करेगा। श्रम से समृद्ध होने की योजनाओं को नहीं जानना भी पिछड़ने की प्रमुख वजह होती है। जब लागत कम होगी तभी किसानों का लाभ बढ़ेगा। यह बात तो एक किसान ही समझ सकता है। राहुल गांधी व सिंधिया यह कैसे समझ पाएंगे कि किसान कभी किसी भी कीमत पर अपना उत्पाद सड़क पर न तो बहा सकता है, और ना ही रौंदवा सकता है। वह तो इसे बर्दाश्त ही नहीं कर सकता। जिस देश का किसान मक्के की एक बाल तोड़ने वाले को पकड़ने के लिए दौड़ा लेता है और मांगने पर झोला भर के दे देता है। उस देश के किसानों के उत्पाद को सड़क पर बहाने वाले लोग उसके मनोभावना, उसके दु:ख, पीड़ा, परेशानी को कभी नहीं समझ पाएंगे। इस मौके पर सुशील पांडेय, रामप्रकाश सिंह, आलोक सिंह, कन्हैया सिंह आदि रहे।
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सांसद मस्त ने कहा कि किसान आंदोलन कभी भी सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश समाज व किसान के हित के लिए होता है। आंदोलन की आग में हाथ सेंक रहे लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि ग्राम पंचायत सदस्य पद से लेकर सांसद तक हर चुना हुआ जनप्रतिनिधि सत्ता का हिस्सा होता है। उसकी जिम्मेदारी होती है कि सरकार की योजनाओं का लाभ वह जनता तक पहुंचाने में मदद करें । अब राहुल गांधी और सिंधिया किसान समस्या के बारे में क्या समझेंगे? किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार देश की सरकार ने कृषि बजट में 52 प्रतिशत हिस्सा रखा है। तमाम योजनाएं लागू की गई हैं। उन योजनाओं को जाने, समझे, किसानों को जागरूक करें, उन्हें लाभ दिलवाएं। यह नैतिक जिम्मेदारी सत्ता या विपक्ष का कोई भी चुना हुआ जनप्रतिनिधि, समाज का जागरूक वर्ग व पत्रकारों की भी है। बताया कि सरकार ने मेड़बंदी, मेड़ पर पेड़ लगाने, बांस की खेती, दुग्ध उत्पादन, जल संरक्षण, गोबर की खाद पर सब्सिडी, गौशाला योजना, ऑर्गेनिक खेती जैसी तमाम योजनाएं चलाई हैं। अगर किसान नहीं समझ पा रहा है तो उसे समझाएं। उसे जागरूक करें। उसे लाभ दिलवाएं। तब वह उत्साहित होकर काम करेगा। श्रम से समृद्ध होने की योजनाओं को नहीं जानना भी पिछड़ने की प्रमुख वजह होती है। जब लागत कम होगी तभी किसानों का लाभ बढ़ेगा। यह बात तो एक किसान ही समझ सकता है। राहुल गांधी व सिंधिया यह कैसे समझ पाएंगे कि किसान कभी किसी भी कीमत पर अपना उत्पाद सड़क पर न तो बहा सकता है, और ना ही रौंदवा सकता है। वह तो इसे बर्दाश्त ही नहीं कर सकता। जिस देश का किसान मक्के की एक बाल तोड़ने वाले को पकड़ने के लिए दौड़ा लेता है और मांगने पर झोला भर के दे देता है। उस देश के किसानों के उत्पाद को सड़क पर बहाने वाले लोग उसके मनोभावना, उसके दु:ख, पीड़ा, परेशानी को कभी नहीं समझ पाएंगे। इस मौके पर सुशील पांडेय, रामप्रकाश सिंह, आलोक सिंह, कन्हैया सिंह आदि रहे।
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