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क्यों बांट रहे हो हमें मजहब के नाम पर...
Updated Sat, 03 Mar 2018 11:24 PM IST
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सिकंदरपुर(बलिया)। क्षेत्र के घुरी बाबा के टोला गांव में कवि सम्मेलन, मुशायरा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन गुरुवार की शाम किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी रचना के माध्यम से आर्थिक व सामाजिक बुराइयों पर प्रहार किया। वहीं अपने कविता के माध्यम से श्रोताओं के दिल में राष्ट्रभक्ति का जज्बा भरा ।
राष्ट्रीय एकता व अखंडता की रक्षा पर भी कविता के माध्यम से अपनी रचना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ज्ञानकुंज एकेडमी बंशीबाजार के प्रबंधक देवेंद्र नाथ सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर द्वीप जलाकर किया। इस दौरान मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को आईना दिखाने का काम करते हैं । वहीं देश में भी हो रहे हर तरह के कार्यों को अपने कविता के माध्यम से मजबूती के साथ रखने का काम करते हैं। कार्यक्रम का आगाज कवि रूपम पांडेय द्वारा मां सरस्वती वंदना के साथ शुरू किया। कवि गया शंकर प्रेमी ने अपनी रचना क्यों बांट रहे हो हमें मजहब के नाम पर प्रस्तुत कर फिरकापरस्त ताकतों पर करारा प्रहार किया। जबकि राम नगीना ने अपनी रचना प्रयास है विनाश का, विकास क्या होगा प्रस्तुत कर भ्रष्टाचार पर कुठाराघात किया। डॉ. आदित्य कुमार अंशु ने अपनी रचना आइल बसंत मन प्रस्तुत कर दर्शकों को बसंत ऋतु का एहसास कराया। इसी क्रम में रहबर सिकंदरपुरी ने अपनी कविता मरने के बाद मेरे सीने पर भारत का नाम लिख देना प्रस्तुत कर राष्ट्र प्रेम का जज्बा भरा। जबकि उस्मान काविस ने अपने कलाम क्यों फसादों में बहा देते हो अपना लहू पेश कर फसाद करने वालों को नसीहत दी। इस मौके पर जयराम पांडेय, मोहन गुप्ता, जहीर आलम अंसारी, अंजनी यादव, रंजीत राय आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता चंद्रभान स्वाध्याई व संचालन डा. ज्ञानेंद्र द्विवेदी ने किया।
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राष्ट्रीय एकता व अखंडता की रक्षा पर भी कविता के माध्यम से अपनी रचना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ज्ञानकुंज एकेडमी बंशीबाजार के प्रबंधक देवेंद्र नाथ सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर द्वीप जलाकर किया। इस दौरान मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को आईना दिखाने का काम करते हैं । वहीं देश में भी हो रहे हर तरह के कार्यों को अपने कविता के माध्यम से मजबूती के साथ रखने का काम करते हैं। कार्यक्रम का आगाज कवि रूपम पांडेय द्वारा मां सरस्वती वंदना के साथ शुरू किया। कवि गया शंकर प्रेमी ने अपनी रचना क्यों बांट रहे हो हमें मजहब के नाम पर प्रस्तुत कर फिरकापरस्त ताकतों पर करारा प्रहार किया। जबकि राम नगीना ने अपनी रचना प्रयास है विनाश का, विकास क्या होगा प्रस्तुत कर भ्रष्टाचार पर कुठाराघात किया। डॉ. आदित्य कुमार अंशु ने अपनी रचना आइल बसंत मन प्रस्तुत कर दर्शकों को बसंत ऋतु का एहसास कराया। इसी क्रम में रहबर सिकंदरपुरी ने अपनी कविता मरने के बाद मेरे सीने पर भारत का नाम लिख देना प्रस्तुत कर राष्ट्र प्रेम का जज्बा भरा। जबकि उस्मान काविस ने अपने कलाम क्यों फसादों में बहा देते हो अपना लहू पेश कर फसाद करने वालों को नसीहत दी। इस मौके पर जयराम पांडेय, मोहन गुप्ता, जहीर आलम अंसारी, अंजनी यादव, रंजीत राय आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता चंद्रभान स्वाध्याई व संचालन डा. ज्ञानेंद्र द्विवेदी ने किया।
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