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गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोग भयजदा
Updated Thu, 06 Jul 2017 10:43 PM IST
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रामगढ़। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गुरुवार को गंगा का जलस्तर 49.97 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रति घंटा एक सेंटीमीटर का बढ़ाव बना हुआ है। जिसके चलते गंगा के किनारे बसे लोगों की धुकधुकी बढ़नी शुरू हो गई है। प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि द्वाबा क्षेत्र के मात्र दुबेछपरा को छोड़कर कहीं पर भी बाढ़ निरोधक कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है, लिहाजा दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
मालूम हो कि गंगा के मुहाने पर बसे गांव केहरपुर, लाल बगीचा, सोनार टोला, सुघरछपरा सहित अन्य गांवों को बचाने के लिये बाढ़ विभाग ने पहले से कोई योजना बनाकर नहीं रखा था। अगर रखा था तो समय रहते आज तक काम क्यों नहीं शुरू हुआ? इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि जिलाधिकारी के रहमोकरम पर जहां-तहां बाढ़ से बचाव ने नाम पर काम शुरू हो सकता है । ऐसे बाढ़ विभाग भी इसी समय के इंतजार में रहता है। बाढ़ के दौरान ऐसी स्थिति बनती है कि उसका लेखा-जोखा करना आसान नहीं होता है। लेकिन इस बार बाढ़ आया तो बैरिया विधानसभा के आधा दर्जन गांवों का अस्तित्व मिट सकता है। इन गांवों के लोगों का कहना है कि आज तक हर किसी गांव को बचाने के लि कोई कवायद नहीं की गई है।
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मालूम हो कि गंगा के मुहाने पर बसे गांव केहरपुर, लाल बगीचा, सोनार टोला, सुघरछपरा सहित अन्य गांवों को बचाने के लिये बाढ़ विभाग ने पहले से कोई योजना बनाकर नहीं रखा था। अगर रखा था तो समय रहते आज तक काम क्यों नहीं शुरू हुआ? इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि जिलाधिकारी के रहमोकरम पर जहां-तहां बाढ़ से बचाव ने नाम पर काम शुरू हो सकता है । ऐसे बाढ़ विभाग भी इसी समय के इंतजार में रहता है। बाढ़ के दौरान ऐसी स्थिति बनती है कि उसका लेखा-जोखा करना आसान नहीं होता है। लेकिन इस बार बाढ़ आया तो बैरिया विधानसभा के आधा दर्जन गांवों का अस्तित्व मिट सकता है। इन गांवों के लोगों का कहना है कि आज तक हर किसी गांव को बचाने के लि कोई कवायद नहीं की गई है।
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