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45 हजार किसानों को बांटे गए मृदा स्वास्थ्य कार्ड
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बलिया। किसानों की आय दोगुनी करने की योजना के तहत कृषि विभाग खेती-किसानी करने वालों का सहयोग कर रहा है। इसी के तहत मृदा परीक्षण कर किसानों को मृदा कार्ड दिया गया। जांच रिपोर्ट में जगह-जगह मिट्टी में किसी तत्व की कमी तो किसी तत्व की अधिकता की बात सामने आई है। जिले के अधिकांश इलाकों में पोटाश, नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी आई लेकिन ब्लाकवार अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद ही स्थिति साफ होगी। 2018-19 के लक्ष्य 42860 के सापेक्ष 34386 नमूने लिए गए, जिसकी जांच हुई और यह क्रम जारी है। 2017-18 के कुल 25440 नमूने के सापेक्ष 45 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं।
प्रत्येक खेत की मिट्टी जांच का अभियान 2017-18 से चल रहा है। इस योजना को पूरा करने के लिए दो साल का लक्ष्य तय किया गया है, जो वर्ष 2018-19 में पूरा होगा। अधिकारी ने बताया कि मृदा परीक्षण का मुख्य मकसद खेतों में अनियंत्रित रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग पर लगाम लगाना है और संतुलित उर्वरक के प्रयोग की जानकारी देकर किसानों के खेती की लागत कम करना और उत्पादन बढ़ाना है। इसके माध्यम से किसानों की आय में भी इजाफा होगा। बताया कि वर्ष 2017-18 में कुल 25440 नमूने लिए गए और जांच की गई और वर्ष 18-19 में अब तक 34386 नमूने लिए गए हैं। यह भी बताया कि वर्ष 2017-18 के अब तक कुल 45 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि मृृदा परीक्षण के बाद अलग-अलग इलाकों में विभिन्न कमियां सामने आई हैं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर इसका अंकन भी किया गया है। बताया कि अब तक आए नमूने में हर जगह से पोटाश, नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी सामने आई है।
मृदा परीक्षण का काम लगातार किया जा रहा है और 2017-18 से यह अभियान चलाया जा रहा है। विभाग के कर्मचारी नमूने लेकर किसानों का ब्योरा अंकित कर रहे हैं और जांच के बाद संबंधित किसानों की डाटा फीडिंग कराई जा रही है और किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जाते हैं। - इंद्रराज, उपनिदेशक, कृषि, बलिया
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प्रत्येक खेत की मिट्टी जांच का अभियान 2017-18 से चल रहा है। इस योजना को पूरा करने के लिए दो साल का लक्ष्य तय किया गया है, जो वर्ष 2018-19 में पूरा होगा। अधिकारी ने बताया कि मृदा परीक्षण का मुख्य मकसद खेतों में अनियंत्रित रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग पर लगाम लगाना है और संतुलित उर्वरक के प्रयोग की जानकारी देकर किसानों के खेती की लागत कम करना और उत्पादन बढ़ाना है। इसके माध्यम से किसानों की आय में भी इजाफा होगा। बताया कि वर्ष 2017-18 में कुल 25440 नमूने लिए गए और जांच की गई और वर्ष 18-19 में अब तक 34386 नमूने लिए गए हैं। यह भी बताया कि वर्ष 2017-18 के अब तक कुल 45 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि मृृदा परीक्षण के बाद अलग-अलग इलाकों में विभिन्न कमियां सामने आई हैं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर इसका अंकन भी किया गया है। बताया कि अब तक आए नमूने में हर जगह से पोटाश, नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी सामने आई है।
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मृदा परीक्षण का काम लगातार किया जा रहा है और 2017-18 से यह अभियान चलाया जा रहा है। विभाग के कर्मचारी नमूने लेकर किसानों का ब्योरा अंकित कर रहे हैं और जांच के बाद संबंधित किसानों की डाटा फीडिंग कराई जा रही है और किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जाते हैं। - इंद्रराज, उपनिदेशक, कृषि, बलिया
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