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फर्जीवाड़ा रोकने के लिए लेखपालों की आईडी हुई रीसेट!
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:12 PM IST
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बलिया। सदर तहसील में पिछले सप्ताहभर से प्रमाण पत्रों के जारी करने के संकट के पीछे बड़ा खुलासा हुआ है। फर्जी लेखपालों की आईडी से चहेते लोगों के प्रमाण पत्रों का निस्तारण किया जाता था। जानकारी होने पर तहसीलदार ने सभी 170 लेखपालों की आईडी को अचानक रीसेट करा दिया। प्रमाण पत्रों के जारी करने के संकट का खुलासा अमर उजाला ने 30 अगस्त के अंक में किया था।
बताया जाता है कि सदर तहसील से खासकर आय, जाति तथा निवास प्रमाण जारी किया जाता है। 2012 में सरकार की ओर से इस सुविधा को ऑनलाइन करते हुए ग्रामीण इलाकों में जनसेवा केन्द स्थापित किए गए थे। इन केन्द्रों से भेजे गए आय तथा जाति प्रमाण पत्र के आवेदनों को तहसीलदार तथा निवास प्रमाण पत्र के आवेदनों को एसडीएम की ओर से ऑनलाइन ही संबंधित गांव के लेखपालों को जांच के लिए भेजा जाता था। बताया जाता है कि कुछ आईडी फर्जी तरीके से लेखपाल के नाम पर बनवाई गई थी और चहेते केन्द्रों के आवेदनों को इसी आईडी में भेजकर तत्काल जांच कराने का काम होता था लिहाजा उनके प्रमाण पत्र तुरंत जारी हो जाते थे। लेकिन अन्य केन्द्रों के आवेदन 15-20 दिनों बाद निस्तारित नहीं होते थे। इसकी भनक लगने पर तहसीलदार ने पड़ताल की तो पता चला कि बाबुओं की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। उन्होंने इस पर लगाम लगाने के लिए तहसील क्षेत्र के सभी 170 लेखपालों की आईडी पर रोक लगाते हुए रीसेट के लिए भेजा। इसके चलते एक सप्ताह तक सदर तहसील से कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका।
कोट
सदर तहसील में आठ-दस फर्जी आईडी का संचालन किया जा रहा था। इस पर लगाम लगाने के लिए सभी 170 लेखपालों की आईडी रीसेट कराई गई। इसके चलते ही कुछ दिनों तक प्रमाण पत्रों के जारी करने में परेशानी हुई।
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जितेन्द्र सिंह, तहसीलदार सदर
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बताया जाता है कि सदर तहसील से खासकर आय, जाति तथा निवास प्रमाण जारी किया जाता है। 2012 में सरकार की ओर से इस सुविधा को ऑनलाइन करते हुए ग्रामीण इलाकों में जनसेवा केन्द स्थापित किए गए थे। इन केन्द्रों से भेजे गए आय तथा जाति प्रमाण पत्र के आवेदनों को तहसीलदार तथा निवास प्रमाण पत्र के आवेदनों को एसडीएम की ओर से ऑनलाइन ही संबंधित गांव के लेखपालों को जांच के लिए भेजा जाता था। बताया जाता है कि कुछ आईडी फर्जी तरीके से लेखपाल के नाम पर बनवाई गई थी और चहेते केन्द्रों के आवेदनों को इसी आईडी में भेजकर तत्काल जांच कराने का काम होता था लिहाजा उनके प्रमाण पत्र तुरंत जारी हो जाते थे। लेकिन अन्य केन्द्रों के आवेदन 15-20 दिनों बाद निस्तारित नहीं होते थे। इसकी भनक लगने पर तहसीलदार ने पड़ताल की तो पता चला कि बाबुओं की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। उन्होंने इस पर लगाम लगाने के लिए तहसील क्षेत्र के सभी 170 लेखपालों की आईडी पर रोक लगाते हुए रीसेट के लिए भेजा। इसके चलते एक सप्ताह तक सदर तहसील से कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका।
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कोट
सदर तहसील में आठ-दस फर्जी आईडी का संचालन किया जा रहा था। इस पर लगाम लगाने के लिए सभी 170 लेखपालों की आईडी रीसेट कराई गई। इसके चलते ही कुछ दिनों तक प्रमाण पत्रों के जारी करने में परेशानी हुई।
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जितेन्द्र सिंह, तहसीलदार सदर