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सप्तशती पाठ से शतचंडी महायज्ञ शुरू
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बैरिया। नारायणगढ़ में नवनिर्मित दुर्गा मंदिर पर प्राण प्रतिष्ठा के क्रम में चल रहे श्री शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को मंडप पूजन व सप्तशती पाठ हुआ। यज्ञ के आचार्य मातलेश्वर पांडेय उर्फ मंटू के संचालन में पंडित विवेकानंद पांडेय, इन्द्रमणि तिवारी, संदीप मिश्र, विवेक शुक्ल, कमलेश दुबे के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ मंडप में पूजन हुआ। यज्ञ के यजमान पूर्व प्रधान राजकुमार मुन्ना गुप्ता, भगवती सिंह, श्यामजी गुप्ता, धर्मनाथ सिंह, शुभनाथ प्रसाद, ओमप्रकाश गुप्ता, परमात्मा तिवारी, गुडली तिवारी के द्वारा मंडप पूजन के साथ ही सप्तशती पथ संपन्न हुआ।
उधर, महायज्ञ के पहले दिन मिथिला निवासी रामेश्वर दास जी व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय एवं रहस्यात्मक पुराण है। यह भगवत स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। संसार में फंसे हुए जो लोग इस घोर अज्ञान अंधकार से पार जाना चाहते हैं उनके लिए अध्यात्मिक तत्वों को प्रकाशित कराने वाला यह एक अद्वितीय दीपक है। कहा कि मनुष्य में सर्वश्रेष्ठ भगवान की अवतार नर नारायण ऋषियों, सरस्वती देवी और श्री वेदव्यास को नमस्कार करके संसार और अंत:करण के समस्त विकारों पर विजय प्राप्त करने वाला श्रीमद्भागवत महापुराण का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए। विश्व के कल्याण के लिए प्रभु श्री कृष्ण ने इस महापुराण का भली-भांति परिचय कराया है।
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उधर, महायज्ञ के पहले दिन मिथिला निवासी रामेश्वर दास जी व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय एवं रहस्यात्मक पुराण है। यह भगवत स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। संसार में फंसे हुए जो लोग इस घोर अज्ञान अंधकार से पार जाना चाहते हैं उनके लिए अध्यात्मिक तत्वों को प्रकाशित कराने वाला यह एक अद्वितीय दीपक है। कहा कि मनुष्य में सर्वश्रेष्ठ भगवान की अवतार नर नारायण ऋषियों, सरस्वती देवी और श्री वेदव्यास को नमस्कार करके संसार और अंत:करण के समस्त विकारों पर विजय प्राप्त करने वाला श्रीमद्भागवत महापुराण का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए। विश्व के कल्याण के लिए प्रभु श्री कृष्ण ने इस महापुराण का भली-भांति परिचय कराया है।
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