{"_id":"5b71d5c442c79239b05d49be","slug":"181534186948-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत छोड़ो आंदोलन के नायक चितू को अर्पित की गई श्रद्घांजलि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत छोड़ो आंदोलन के नायक चितू को अर्पित की गई श्रद्घांजलि
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। अगस्त क्रांति उत्सव के तहत भारत छोड़ो आंदोलन के नायक पं. चित्तू पांडेय के स्मारक पर सोमवार को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया, जिन्हें शेर-ए-बलिया के नाम से जाना जाता है।
करो या मरो आंदोलन के दौरान 16 और 18 अगस्त 1942 को ब्रिटिश सरकार के पुलिस की गोलियों से 27 बांकुरे शहीद हो गए थे। इस कुर्बानी ने पूरे जिले में आंदोलन को धधका दिया था। बांसडीह तहसील, रेवती में स्वराज सरकार की चल रही थी। अब बारी बलिया जिला मुख्यालय पर कब्जा करने की थी। जिसके लिये लाखों की सशस्त्र भीड़ ने जिला मुख्यालय को घेर लिया था। कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष पंडित चित्तू पांडेय जी जेल में बंद थे। डीएम एसपी उन्हें जेल से बाहर आने के लिए मनाने खुद जिला जेल पहुंचे। सभी कैदियों की रिहाई के शर्त पर ससम्मान रिहा हुए। डीएम ने उनसे कहा कि अब आप ही इस जिले के कलक्टर हैं। प्रशासन का कोई भी व्यक्ति सिविल लाइंस एरिया के बाहर नहीं जाएगा। अपने नेताओं की रिहाई और टाउन हाल में हुई सभा में चित्तू पांडेय ने लोगों से कहा कि अब बलिया में सुराज का शासन हो गया। आप सभी लोग अपने गांव जाइये और शांति व्यवस्था बनाए रखिए। 19 अगस्त की शाम लाखों लोग जुटे थे। ऐसे अपने जनप्रिय नेता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और विधायक के स्मारक पर कैंडल जलाकर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में संघ के पूर्व नगर संघ चालक डा. बद्रीनारायण गुप्त, शिक्षक नेता डा. शिवकुमार मिश्र, नगरपालिका अध्यक्ष अजय कुमार, सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के प्रांतीय संगठन मंत्री शिवकुमार सिंह कौशिकेय, विजय बहादुर सिंह, आशीष, हफीज मस्तान, फतेहचंद बेचैन आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
करो या मरो आंदोलन के दौरान 16 और 18 अगस्त 1942 को ब्रिटिश सरकार के पुलिस की गोलियों से 27 बांकुरे शहीद हो गए थे। इस कुर्बानी ने पूरे जिले में आंदोलन को धधका दिया था। बांसडीह तहसील, रेवती में स्वराज सरकार की चल रही थी। अब बारी बलिया जिला मुख्यालय पर कब्जा करने की थी। जिसके लिये लाखों की सशस्त्र भीड़ ने जिला मुख्यालय को घेर लिया था। कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष पंडित चित्तू पांडेय जी जेल में बंद थे। डीएम एसपी उन्हें जेल से बाहर आने के लिए मनाने खुद जिला जेल पहुंचे। सभी कैदियों की रिहाई के शर्त पर ससम्मान रिहा हुए। डीएम ने उनसे कहा कि अब आप ही इस जिले के कलक्टर हैं। प्रशासन का कोई भी व्यक्ति सिविल लाइंस एरिया के बाहर नहीं जाएगा। अपने नेताओं की रिहाई और टाउन हाल में हुई सभा में चित्तू पांडेय ने लोगों से कहा कि अब बलिया में सुराज का शासन हो गया। आप सभी लोग अपने गांव जाइये और शांति व्यवस्था बनाए रखिए। 19 अगस्त की शाम लाखों लोग जुटे थे। ऐसे अपने जनप्रिय नेता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और विधायक के स्मारक पर कैंडल जलाकर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में संघ के पूर्व नगर संघ चालक डा. बद्रीनारायण गुप्त, शिक्षक नेता डा. शिवकुमार मिश्र, नगरपालिका अध्यक्ष अजय कुमार, सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के प्रांतीय संगठन मंत्री शिवकुमार सिंह कौशिकेय, विजय बहादुर सिंह, आशीष, हफीज मस्तान, फतेहचंद बेचैन आदि शामिल रहे।
विज्ञापन