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बच्चों को मिला शिक्षा का अधिकार
Updated Fri, 17 Nov 2017 10:58 PM IST
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बलिया। शिक्षा अधिकार की दुहाई देकर न्याय मांगने के मामले में जिस प्रकरण में जिलाधिकारी सहित जिले के आला अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। उसी प्रकरण में अमर उजाला में सोमवार को खबर छपने के बाद पीड़िता शिक्षिका और उसके बच्चों के समर्थन में कई संगठन आगे आए। नतीजतन, स्कूल को जहां शिक्षिका के तीन माह का बकाया वेतन जारी किया वहीं बच्चों का दुबारा स्कूल में दाखिला लिया।
सप्ताहभर पहले नगरा-रसड़ा मार्ग स्थित सिसवार गांव के पास एक निजी कांवेंट स्कूल में कार्यरत शिक्षिका नीलम सिंह ने अपने को नौकरी से हटाने के साथ ही दो बच्चों को स्कूल द्वारा पढ़ाने से इंकार करने की बाबत न्याय के लिए डीएम से गुहार लगाई थी। जिस पर उनके द्वारा मदद में असमर्थता जताई गई। अमर उजाला में प्रमुखता के साथ खबर छपी तो सूचना अधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता मनोज राय हंस के नेतृत्व में सीआरओ और जिला प्रोबेशन अधिकारी और न्यायपीठ बाल कल्याण समिति को पत्र लिखवाने के साथ प्रदेश के आला अधिकारियों को पत्र भेजा गया। वहीं शासन की आशा ज्योति पावर वुमेन वाहन 181 को जानकारी मिली तो अधिकारी विद्यालय पहुंचे। उनके हनक के बाद स्कूल प्रबंधक ने तीन माह का वेतन तो जारी किया ही। बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का जिम्मा भी ले लिया। इसके अलावे काटे गए फंड को पूरा कराकर वापस दिलाने का आश्वासन दिया गया।
शिक्षिका नीलम सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में जिलाधिकारी से शिकायत करने के बाद उनके सहयोग से मना करने पर अब मान चुकी थी कि कहीं से न्याय नहीं मिल पाएगा। लेकिन अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद कई संगठनों ने खुद आगे आकर मदद की। जिसके फलस्वरुप उसे न्याय मिला।
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सप्ताहभर पहले नगरा-रसड़ा मार्ग स्थित सिसवार गांव के पास एक निजी कांवेंट स्कूल में कार्यरत शिक्षिका नीलम सिंह ने अपने को नौकरी से हटाने के साथ ही दो बच्चों को स्कूल द्वारा पढ़ाने से इंकार करने की बाबत न्याय के लिए डीएम से गुहार लगाई थी। जिस पर उनके द्वारा मदद में असमर्थता जताई गई। अमर उजाला में प्रमुखता के साथ खबर छपी तो सूचना अधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता मनोज राय हंस के नेतृत्व में सीआरओ और जिला प्रोबेशन अधिकारी और न्यायपीठ बाल कल्याण समिति को पत्र लिखवाने के साथ प्रदेश के आला अधिकारियों को पत्र भेजा गया। वहीं शासन की आशा ज्योति पावर वुमेन वाहन 181 को जानकारी मिली तो अधिकारी विद्यालय पहुंचे। उनके हनक के बाद स्कूल प्रबंधक ने तीन माह का वेतन तो जारी किया ही। बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का जिम्मा भी ले लिया। इसके अलावे काटे गए फंड को पूरा कराकर वापस दिलाने का आश्वासन दिया गया।
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शिक्षिका नीलम सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में जिलाधिकारी से शिकायत करने के बाद उनके सहयोग से मना करने पर अब मान चुकी थी कि कहीं से न्याय नहीं मिल पाएगा। लेकिन अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद कई संगठनों ने खुद आगे आकर मदद की। जिसके फलस्वरुप उसे न्याय मिला।
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