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मानक के अनुसार नहीं हो रहा बाढ़ रोधी कार्य
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:11 PM IST
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रामगढ़। आखिर बाढ़ विभाग व ठेकेदार जिस समय का इंतजार कर रहे थे वह समय आ ही गया जिससे उनकी मनोकामना पूरी हो सके। मानसून सक्रिय होते ही गंगा के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई और दूबेछपरा में चल रहे गंगा की तलहटी में जीओ बैग भरने का कार्य छह लेयर होना था। इसीबीच गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के चलते तलहटी का सारी बोरिया पानी में डूब गई। जिससे बाढ़ विभाग अब केवल तलहटी में जीओ बैग का कार्य छोड़कर स्लोपिंग कर पत्थर बिछाने का कार्य शुरू कर दिया।
बता दे कि दूबेछपरा में 29 करोड़ रूपए की लागत बाढ़ निरोध कार्य चल रहा है। जिसमें ठेकेदारों को गंगा की तलहटी में 30 मीटर अंदर से जीओ बैग में छह लेयर डालना था। जिसमें चार लेयर तक जीओ बैग डाल दिया गया था। अचानक गंगा के जलस्तर में वृद्धि के चलते ये सब बोरिया पानी में डूब गए है, और ठेकेदार जमकर अपनी मनमानी करने पर उतारू हो गए है। एक तरफ जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने बाढ़ विभाग के ठेकेदारों और अधिकारियों को मजदूरों की संख्या तथा संसाधन बढ़ाने की चेतावनी दे रहे थे। वो ये भी जान रहे थे कि यदि गंगा का जलस्तर बढ़ गया तो तलहटी का कार्य मानक के अनुरूप नहीं हो पाएगा। सबसे बड़ी बिड़बना की बात यह है कि इस 29 करोड़ रुपये के खेल में ठेकेदारों ने स्टीमेट का कहीं पर भी ख्याल नहीं रखा। जिसका जीता जागता उदाहरण यह है कि कहीं पर भी मडपंप लगाकर बालू निकालने का निर्देश नहीं है। बावजूद ठेकेदार 16 मडपंप नदी में लगाकर बालू निकालने का काम धड़ल्ले से जारी रखा। मरता क्या नहीं करता गांव वालों को तो यह था कि किसी तरह कटानरोधी कार्य हो जाए, जिससे गांव गंगा नदी में न समाहित हो सके। सूत्रों की माने तो ठेकेदारों ने अपनी अधिक बचत के लिए मडपंप का सहारा लिया। जबकि स्टीमेट में कहीं भी मडपंप से कार्य कराने का निर्देश नहीं है। इस बाबत बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता मुन्ना यादव से पूछने पर कि मडपंप द्वारा बालू का स्टीमेट पर कहीं पर जिक्र है। तो उन्होंने कहा कि यह बात हमसे नहीं उच्चाधिकारियों से पता कर लिजिए।
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बता दे कि दूबेछपरा में 29 करोड़ रूपए की लागत बाढ़ निरोध कार्य चल रहा है। जिसमें ठेकेदारों को गंगा की तलहटी में 30 मीटर अंदर से जीओ बैग में छह लेयर डालना था। जिसमें चार लेयर तक जीओ बैग डाल दिया गया था। अचानक गंगा के जलस्तर में वृद्धि के चलते ये सब बोरिया पानी में डूब गए है, और ठेकेदार जमकर अपनी मनमानी करने पर उतारू हो गए है। एक तरफ जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने बाढ़ विभाग के ठेकेदारों और अधिकारियों को मजदूरों की संख्या तथा संसाधन बढ़ाने की चेतावनी दे रहे थे। वो ये भी जान रहे थे कि यदि गंगा का जलस्तर बढ़ गया तो तलहटी का कार्य मानक के अनुरूप नहीं हो पाएगा। सबसे बड़ी बिड़बना की बात यह है कि इस 29 करोड़ रुपये के खेल में ठेकेदारों ने स्टीमेट का कहीं पर भी ख्याल नहीं रखा। जिसका जीता जागता उदाहरण यह है कि कहीं पर भी मडपंप लगाकर बालू निकालने का निर्देश नहीं है। बावजूद ठेकेदार 16 मडपंप नदी में लगाकर बालू निकालने का काम धड़ल्ले से जारी रखा। मरता क्या नहीं करता गांव वालों को तो यह था कि किसी तरह कटानरोधी कार्य हो जाए, जिससे गांव गंगा नदी में न समाहित हो सके। सूत्रों की माने तो ठेकेदारों ने अपनी अधिक बचत के लिए मडपंप का सहारा लिया। जबकि स्टीमेट में कहीं भी मडपंप से कार्य कराने का निर्देश नहीं है। इस बाबत बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता मुन्ना यादव से पूछने पर कि मडपंप द्वारा बालू का स्टीमेट पर कहीं पर जिक्र है। तो उन्होंने कहा कि यह बात हमसे नहीं उच्चाधिकारियों से पता कर लिजिए।
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