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21 लाख की लागत से खुदवाए जाएंगे 20 तालाब
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बलिया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल संरक्षण के लिए सेमी क्रिटिकल जोन घोषित रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र में 21 लाख रुपये की लागत से कुल 20 तालाब खुदवाए जाएंगे। भूमि संरक्षण विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। ये तालाब किसानों केे सहयोग खोदे जाएंगे और चयनित किसानों को 50 फीसदी अनुदान दिया जाएगा।
जिले में कुल 17 ब्लाक हैं। भूगर्भ विभाग की ओर से जिले में औसत जलस्तर प्री मानसून न्यूनतम 7.20 मी. और अधिकतम 8.10 मी. तथा पोस्ट मानसून न्यूनतम 7.05 व अधिकतम 8.75 मापा गया है। विभाग का मानना है कि इस आंकड़े के आधार पर जिले में गर्मी के दिनों में औसत एक से डेढ़ मीटर तक जलस्तर खिसकता है। भूगर्भ विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में जनपद के 16 ब्लाकों में एक से 10 सेमी जलस्तर प्रतिवर्ष कम हुआ तो रसड़ा ब्लाक में 20 से 30 सेमी प्रतिवर्ष जलस्तर कम हुआ और इसके आधार पर ही रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र को विभाग ने इसे क्रिटिकल जोन घोषित कर दिया। इसके बाद रसड़ा क्षेत्र में शासन स्तर से जल संरक्षण के लिए खेत तालाब योजना का संचालन किया गया। क्रिटिकल क्षेत्र रसड़ा में भूमि संरक्षण विभाग की ओर से खेत तालाब योजना के तहत वर्ष 17-18 में 22 और 18-19 में 12 तालाबों की खुदाई कराई गई। इसके अलावा वर्ष 2017-18 में शुरु हुई पं. दीन दयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत रसड़ा क्षेत्र में मेड़बंदी और पौधरोपण कार्य कराया गया ताकि भूमि संरक्षण के साथ जल संचयन भी हो सके। वर्ष 19-20 में भी रसड़ा क्षेत्र केे अब सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है। इस साल भी शासन की ओर से रसड़ा क्षेत्र में जल संरक्षण को कुल 20 तालाब खुदवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए शासन की ओर से कुल लागत 21 लाख रुपये निर्धारित करते हुए किसानों को 50 फीसदी अनुुदान देने का प्रावधान किया गया है।
रसड़ा क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए इस वर्ष 22 मीटर, लंबा, 20 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा कुल 20 तालाबों की खुदाई होगी। ये तालाब किसान अपनी खेतों में खुदवाएंगे और भूमि संरक्षण विभाग की ओर से किसानों को 50 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। क्षेत्र में कुल 20 तालाब खुदवाने का लक्ष्य है। जिला कृषि अधिकारी व भूमि संरक्षण अधिकारी ने बताया कि इसके लिए पहले आओ पहले पाओ पद्घति लागू की गई है। इसके आधार पर किसानों का चयन किया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी व भूमि संरक्षण अधिकारी विकेश कुमार ने कहा कि सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल रसड़ा क्षेत्र में 20 तालाब खुदवाने का लक्ष्य शासन से प्राप्त हुआ है। इसके लिए किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। तालाब खुदवाने पर किसानों को 50 फीसदी अनुदान की धनराशि सीधे उनके खाते में हस्तांतरित की जाएगी।
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तालाबों में किसान कर सकेंगे मत्स्य पालन : बलिया। खेत तालाब योजना किसानों के लिए वरदान भी है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि तालाबों की खुदाई के बाद किसान तालाबों के किनारे वृक्षारोपण व तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य भी कर सकते हैं और इससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
प्रति वर्ष जलस्तर खिसकने से जल संकट : पूर। प्रति वर्ष भू-जल स्तर खिसकने से क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांव में पेयजल की किल्लत हो गई है। इधर, भीषण गर्मी ने समस्या और बढ़ गई है। क्षेत्र के एकइल, टंडवा, नहिलापार, डंकिनगंज, गौरा, मदनपुरा,उससा, पहराजपुर, गौरी, बाछापार आदि क्षेत्रों के गांवों में पीने के पानी को लेकर काफी किल्लत हो गई है। यह समस्या तब और विकट हो गई है जब क्षेत्र के लगभग सभी ताल, तलैया पोखरी, तालाब आज सूख चुके हैं। बचे हुए तालाबों पर अतिक्रमण हो रहा है और इन्हें समाप्त किया जा रहा है। इसके चलते जल संरक्षण नहीं हो पा रहा और भूगर्भीय जलस्तर और नीचे चला गया है। इसे लेकर आम जनमानस भी चिंतित है। सरकार की तरफ से अगर जल संरक्षण को लेकर के गोष्ठियां होतीं, कार्यक्रम चलाए जाते तो शायद लोग जागरूक होते लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इस बाबत सिकंदरपुर के उपजिलाधिकारी राजेश यादव ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार सभी ग्राम प्रधानों को निर्देश दिया गया है कि गांव में जितने भी तालाब, पोखरे और कुओं को पानी से भर दिया जाए ताकि जल संरक्षण के माध्यम से भूगर्भीय जलस्तर को बचाया जा सके।
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जिले में कुल 17 ब्लाक हैं। भूगर्भ विभाग की ओर से जिले में औसत जलस्तर प्री मानसून न्यूनतम 7.20 मी. और अधिकतम 8.10 मी. तथा पोस्ट मानसून न्यूनतम 7.05 व अधिकतम 8.75 मापा गया है। विभाग का मानना है कि इस आंकड़े के आधार पर जिले में गर्मी के दिनों में औसत एक से डेढ़ मीटर तक जलस्तर खिसकता है। भूगर्भ विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में जनपद के 16 ब्लाकों में एक से 10 सेमी जलस्तर प्रतिवर्ष कम हुआ तो रसड़ा ब्लाक में 20 से 30 सेमी प्रतिवर्ष जलस्तर कम हुआ और इसके आधार पर ही रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र को विभाग ने इसे क्रिटिकल जोन घोषित कर दिया। इसके बाद रसड़ा क्षेत्र में शासन स्तर से जल संरक्षण के लिए खेत तालाब योजना का संचालन किया गया। क्रिटिकल क्षेत्र रसड़ा में भूमि संरक्षण विभाग की ओर से खेत तालाब योजना के तहत वर्ष 17-18 में 22 और 18-19 में 12 तालाबों की खुदाई कराई गई। इसके अलावा वर्ष 2017-18 में शुरु हुई पं. दीन दयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत रसड़ा क्षेत्र में मेड़बंदी और पौधरोपण कार्य कराया गया ताकि भूमि संरक्षण के साथ जल संचयन भी हो सके। वर्ष 19-20 में भी रसड़ा क्षेत्र केे अब सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है। इस साल भी शासन की ओर से रसड़ा क्षेत्र में जल संरक्षण को कुल 20 तालाब खुदवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए शासन की ओर से कुल लागत 21 लाख रुपये निर्धारित करते हुए किसानों को 50 फीसदी अनुुदान देने का प्रावधान किया गया है।
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रसड़ा क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए इस वर्ष 22 मीटर, लंबा, 20 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा कुल 20 तालाबों की खुदाई होगी। ये तालाब किसान अपनी खेतों में खुदवाएंगे और भूमि संरक्षण विभाग की ओर से किसानों को 50 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। क्षेत्र में कुल 20 तालाब खुदवाने का लक्ष्य है। जिला कृषि अधिकारी व भूमि संरक्षण अधिकारी ने बताया कि इसके लिए पहले आओ पहले पाओ पद्घति लागू की गई है। इसके आधार पर किसानों का चयन किया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी व भूमि संरक्षण अधिकारी विकेश कुमार ने कहा कि सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल रसड़ा क्षेत्र में 20 तालाब खुदवाने का लक्ष्य शासन से प्राप्त हुआ है। इसके लिए किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। तालाब खुदवाने पर किसानों को 50 फीसदी अनुदान की धनराशि सीधे उनके खाते में हस्तांतरित की जाएगी।
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तालाबों में किसान कर सकेंगे मत्स्य पालन : बलिया। खेत तालाब योजना किसानों के लिए वरदान भी है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि तालाबों की खुदाई के बाद किसान तालाबों के किनारे वृक्षारोपण व तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य भी कर सकते हैं और इससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
प्रति वर्ष जलस्तर खिसकने से जल संकट : पूर। प्रति वर्ष भू-जल स्तर खिसकने से क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांव में पेयजल की किल्लत हो गई है। इधर, भीषण गर्मी ने समस्या और बढ़ गई है। क्षेत्र के एकइल, टंडवा, नहिलापार, डंकिनगंज, गौरा, मदनपुरा,उससा, पहराजपुर, गौरी, बाछापार आदि क्षेत्रों के गांवों में पीने के पानी को लेकर काफी किल्लत हो गई है। यह समस्या तब और विकट हो गई है जब क्षेत्र के लगभग सभी ताल, तलैया पोखरी, तालाब आज सूख चुके हैं। बचे हुए तालाबों पर अतिक्रमण हो रहा है और इन्हें समाप्त किया जा रहा है। इसके चलते जल संरक्षण नहीं हो पा रहा और भूगर्भीय जलस्तर और नीचे चला गया है। इसे लेकर आम जनमानस भी चिंतित है। सरकार की तरफ से अगर जल संरक्षण को लेकर के गोष्ठियां होतीं, कार्यक्रम चलाए जाते तो शायद लोग जागरूक होते लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इस बाबत सिकंदरपुर के उपजिलाधिकारी राजेश यादव ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार सभी ग्राम प्रधानों को निर्देश दिया गया है कि गांव में जितने भी तालाब, पोखरे और कुओं को पानी से भर दिया जाए ताकि जल संरक्षण के माध्यम से भूगर्भीय जलस्तर को बचाया जा सके।