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चार होमगार्ड के भरोसे जिला चिकित्सालय
Updated Wed, 06 Dec 2017 11:05 PM IST
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बलिया। जिला चिकित्सालय एवं जिला महिला चिकित्सालय में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम कुछ भी नहीं है। सुरक्षा के नाम पर जिला चिकित्सालय में चार होमगार्डो की तैनाती की गई है। जिसका खर्च जिला चिकित्सालय वहन करता है। महिला चिकित्सालय में वह भी नदारद है। जबकि जिला चिकित्सालय एवं महिला चिकित्सालय में आए दिन तीमारदारों द्वारा चिकित्सकों व कर्मचारियाें के साथ मारपीट व हंगामा घटित होती रहती है। जिससे चिकित्सक व कर्मचारी भयजदा रहते है।
करीब छह साल पूर्व जिला चिकित्सालय में मरीज के मौत के बाद तीमारदारों ने चिकित्सक व कर्मचारियों की धुनाई कर दिया था। जिससे आक्रोशित चिकित्सकों व कर्मचारी इमरजेंसी सेवा ठप कर हड़ताल पर बैठ गए और अस्पताल में चौकी स्थापना करने की मांग की। चिकित्सकों के मांग पर जिला चिकित्सालय में अस्थाई चौकी की स्थापना की गई। यह चौकी एक-दो साल तक ठीक-ठाक चली। इसके बाद चौकी पर तैनात सिपाहियों को हटा दिया गया और उनके स्थान पर चार होमगार्ड को जिला चिकित्सालय को सौंप दिया गया। जिसका खर्च जिला चिकित्सालय स्वयं उठाता है। इन चार होमगार्डो के भरोसे चिकित्सक व कर्मचारी समेत जिला अस्पताल रहता है। वहीं जिला महिला चिकित्सालय सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। यहां कि सुरक्षा अस्पताल के चौकीदार के भरोसे रहती है। जबकि दोनों अस्पतालों में आए दिन तीमारदारों द्वारा किसी न किसी बात को लेकर हंगामा किया जाता है। बावजूद जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है।
जिला महिला चिकित्सालय की सीएमएस डा. सुमिता सिन्हा ने बताया कि अस्पताल की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन से पुलिसकर्मी की तैनाती की कई बार मांग की गई है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा अब तक कोई भी व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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जिला चिकित्सालय के सीएमएस डा. एस प्रसाद ने बताया कि सुरक्षा के नाम पर होमगार्डो की तैनाती की गई है। जिला अस्पताल में अस्थाई चौकी स्थापना की गई थी। लेकिन वहां वर्तमान में कोई भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं है।
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करीब छह साल पूर्व जिला चिकित्सालय में मरीज के मौत के बाद तीमारदारों ने चिकित्सक व कर्मचारियों की धुनाई कर दिया था। जिससे आक्रोशित चिकित्सकों व कर्मचारी इमरजेंसी सेवा ठप कर हड़ताल पर बैठ गए और अस्पताल में चौकी स्थापना करने की मांग की। चिकित्सकों के मांग पर जिला चिकित्सालय में अस्थाई चौकी की स्थापना की गई। यह चौकी एक-दो साल तक ठीक-ठाक चली। इसके बाद चौकी पर तैनात सिपाहियों को हटा दिया गया और उनके स्थान पर चार होमगार्ड को जिला चिकित्सालय को सौंप दिया गया। जिसका खर्च जिला चिकित्सालय स्वयं उठाता है। इन चार होमगार्डो के भरोसे चिकित्सक व कर्मचारी समेत जिला अस्पताल रहता है। वहीं जिला महिला चिकित्सालय सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। यहां कि सुरक्षा अस्पताल के चौकीदार के भरोसे रहती है। जबकि दोनों अस्पतालों में आए दिन तीमारदारों द्वारा किसी न किसी बात को लेकर हंगामा किया जाता है। बावजूद जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है।
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जिला महिला चिकित्सालय की सीएमएस डा. सुमिता सिन्हा ने बताया कि अस्पताल की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन से पुलिसकर्मी की तैनाती की कई बार मांग की गई है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा अब तक कोई भी व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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जिला चिकित्सालय के सीएमएस डा. एस प्रसाद ने बताया कि सुरक्षा के नाम पर होमगार्डो की तैनाती की गई है। जिला अस्पताल में अस्थाई चौकी स्थापना की गई थी। लेकिन वहां वर्तमान में कोई भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं है।