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50 लाख अधिक की 128 परियोजनाएं, पूरी हुईं मात्र सात
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नगर के गड़हा मोहल्ला में निर्माणाधीन लोहिया मार्केट।संवाद
- फोटो : BALLIA
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बलिया। जिले में 50 लाख से अधिक की कुल 128 परियोजनाएं संचालित हैं, लेकिन अब तक महज सात परियोजनाएं ही पूरी हो सकी है। इसमें सबसे अधिक जल निगम विभाग की 63 परियोजनाएं हैं। इसके अलावा, अलग-अलग विभागों के अधिकांश परियोजनाएं आधी-अधूरी पड़ी हैं। कई परियोजनाएं तो एक से डेढ़ दशक से चल रही हैं और यह कब पूरी होंगी कोई समय सीमा नहीं है, जबकि इन परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए समय-समय पर डीएम और कमिश्नर के स्तर पर समीक्षा भी की जाती है।
जिले में 50 लाख से अधिक लागत की अलग-अलग विभागों के 11 कार्यदायी संस्थाओं की ओर से 985.9205 करोड़ की लागत वाली 128 परियोजनाएं संचालित हैं। इसके सापेक्ष 501.8202 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई है। कार्य की गति किस कदर सुस्त है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष अक्तूबर के अंत तक कुल 78 फीसदी धनराशि यानी 389.0580 करोड़ ही खर्च हो सके हैं। यह स्थिति तब है, जब समय-समय पर 50 लाख से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को लेकर जिलाधिकारी और मंडलायुक्त की ओर से समीक्षा भी की जाती है। इसके बावजूद, कार्यदायी संस्थाओं पर कोई असर नहीं होता है। इसके चलते परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती। लिहाजा लागत बढ़ जाती है। हालांकि अधिकांश परियोजनाओं के स्वीकृत होने के बाद से पर्याप्त धन भी अवमुक्त नहीं हो सका है। इसके चलते परियोजनाएं अधर में लटकी हैं।
प्रमुख परियोजनाएं
बलिया। न्यायिक अधिकारियों के आवास बलिया, सलिड वेस्ट मैनेजमेंट, समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय, राजकीय इंटर कालेज सिंकदरपुर, नगर पंचायत नगरा का भवन, नगर पंचायत भवन रतसड़ कला, डायट पकवाइनार का सुदृढ़ीकरण, मल्टीपर्पज सीड स्टोर सोहांव, दुबे छपरा में तालाब, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय रसड़ा में हास्टल, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चिलकहर में हास्टल, जेएनसीयू में हास्टल, जीआईसी बेल्थरारोड, स्पोर्ट्स कालेज बलिया, ड्रग वेयर हाउस बलिया, राजकीय पालीटेक्निक हुसेनाबाद, राजकीय पालीटेक्निक जिगरसड़ में हास्टल आदि।
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केस- एक
शहर में छह अगस्त 2005 को 8.8120 करोड़ की लागत से बनने वाले लोहिया मार्केट का शिलान्यास हुआ। कार्य कराने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस उप्र जल निगम को दी गई। लेकिन 16 वर्ष बाद भी यह निर्माण अधर में लटका हुआ है। इस परियोजना के लिए अब तक कुल 4.8200 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई है और इसके सापेक्ष 4.7910 करोड़ खर्च किया गया है। आलम यह है कि इस परियोजना के पूरा होने की अब समय सीमा धनावंटन पर निर्भर है।
केस - 2
पांच साल पहले शासन ने नगरा ब्लॉक के तुर्की दौलतपुर और गड़वार ब्लॉक के संवरुपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल को उच्चीकृत कर नवीन राजकीय हाईस्कूल बनाने के लिए शासन ने आठ अक्तूबर 2016 को स्वीकृति दी। शासन की ओर से प्रत्येक स्कूल के निर्माण के लिए 69.15 लाख की धनराशि स्वीकृत करते हुए कार्य कराने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को दी। कार्य पूर्ण कराने की समय सीमा 31 मार्च 2021 की गई।
केस-3
आठ साल पहले 31 मार्च 2013 को राजकीय बालिका बैरिया इंटर कॉलेज निर्माण की स्वीकृति शासन ने दी। कुल लागत 2.2500 करोड़ के सापेक्ष पूरा धन जारी किया जा चुका है। निर्माण की जिम्मेदारी यूपी निर्माण निगम को दी गई थी। इसके पूर्ण होने की समय सीमा 31 मार्च 2021 निर्धारित की गई थी। लेकिन यह विद्यालय अभी विभाग को हैंडओवर नहीं हो सका है। इस बाबत जेई गोविंद ने बताया कि कार्य पूरा हो चुका है, एनओसी दे दी गई है और हैंडओवर की प्रक्रिया चल रही है।
परियोजनाओं को पूरा करने के लिए समय-समय पर कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिया जाता है। समय-समय पर कार्यों की मॉनीटरिंग भी की जाती है। जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं उन्हें संबंधित विभाग को हैंडओवर करने का निर्देश दिया गया है। - प्रवीण वर्मा, सीडीओ, बलिया
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जिले में 50 लाख से अधिक लागत की अलग-अलग विभागों के 11 कार्यदायी संस्थाओं की ओर से 985.9205 करोड़ की लागत वाली 128 परियोजनाएं संचालित हैं। इसके सापेक्ष 501.8202 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई है। कार्य की गति किस कदर सुस्त है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष अक्तूबर के अंत तक कुल 78 फीसदी धनराशि यानी 389.0580 करोड़ ही खर्च हो सके हैं। यह स्थिति तब है, जब समय-समय पर 50 लाख से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को लेकर जिलाधिकारी और मंडलायुक्त की ओर से समीक्षा भी की जाती है। इसके बावजूद, कार्यदायी संस्थाओं पर कोई असर नहीं होता है। इसके चलते परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती। लिहाजा लागत बढ़ जाती है। हालांकि अधिकांश परियोजनाओं के स्वीकृत होने के बाद से पर्याप्त धन भी अवमुक्त नहीं हो सका है। इसके चलते परियोजनाएं अधर में लटकी हैं।
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प्रमुख परियोजनाएं
बलिया। न्यायिक अधिकारियों के आवास बलिया, सलिड वेस्ट मैनेजमेंट, समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय, राजकीय इंटर कालेज सिंकदरपुर, नगर पंचायत नगरा का भवन, नगर पंचायत भवन रतसड़ कला, डायट पकवाइनार का सुदृढ़ीकरण, मल्टीपर्पज सीड स्टोर सोहांव, दुबे छपरा में तालाब, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय रसड़ा में हास्टल, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चिलकहर में हास्टल, जेएनसीयू में हास्टल, जीआईसी बेल्थरारोड, स्पोर्ट्स कालेज बलिया, ड्रग वेयर हाउस बलिया, राजकीय पालीटेक्निक हुसेनाबाद, राजकीय पालीटेक्निक जिगरसड़ में हास्टल आदि।
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केस- एक
शहर में छह अगस्त 2005 को 8.8120 करोड़ की लागत से बनने वाले लोहिया मार्केट का शिलान्यास हुआ। कार्य कराने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस उप्र जल निगम को दी गई। लेकिन 16 वर्ष बाद भी यह निर्माण अधर में लटका हुआ है। इस परियोजना के लिए अब तक कुल 4.8200 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई है और इसके सापेक्ष 4.7910 करोड़ खर्च किया गया है। आलम यह है कि इस परियोजना के पूरा होने की अब समय सीमा धनावंटन पर निर्भर है।
केस - 2
पांच साल पहले शासन ने नगरा ब्लॉक के तुर्की दौलतपुर और गड़वार ब्लॉक के संवरुपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल को उच्चीकृत कर नवीन राजकीय हाईस्कूल बनाने के लिए शासन ने आठ अक्तूबर 2016 को स्वीकृति दी। शासन की ओर से प्रत्येक स्कूल के निर्माण के लिए 69.15 लाख की धनराशि स्वीकृत करते हुए कार्य कराने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को दी। कार्य पूर्ण कराने की समय सीमा 31 मार्च 2021 की गई।
केस-3
आठ साल पहले 31 मार्च 2013 को राजकीय बालिका बैरिया इंटर कॉलेज निर्माण की स्वीकृति शासन ने दी। कुल लागत 2.2500 करोड़ के सापेक्ष पूरा धन जारी किया जा चुका है। निर्माण की जिम्मेदारी यूपी निर्माण निगम को दी गई थी। इसके पूर्ण होने की समय सीमा 31 मार्च 2021 निर्धारित की गई थी। लेकिन यह विद्यालय अभी विभाग को हैंडओवर नहीं हो सका है। इस बाबत जेई गोविंद ने बताया कि कार्य पूरा हो चुका है, एनओसी दे दी गई है और हैंडओवर की प्रक्रिया चल रही है।
परियोजनाओं को पूरा करने के लिए समय-समय पर कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिया जाता है। समय-समय पर कार्यों की मॉनीटरिंग भी की जाती है। जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं उन्हें संबंधित विभाग को हैंडओवर करने का निर्देश दिया गया है। - प्रवीण वर्मा, सीडीओ, बलिया