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बलिया की पहचान बलिदानी धरती से है
Updated Sat, 19 Aug 2017 11:24 PM IST
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बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की ओर से शनिवार को कुंवर सिंह महाविद्यालय के सभागार में 1942 का आंदोलन और बागी बलिया विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर चितरंजन मिश्र ने कहा कि बागी बलिया की पहचान बलिदानी धरती से है। हमें आजादी को सुरक्षित रेखन के लिए अब संघर्षशील होने की जरूरत है। कुंवर सिंह महाविद्यालय के प्रबंधक सुरेश बहादुर सिंह ने कहा कि 1942 के आंदोलन में बलिया के विद्रोह को एक राष्ट्रीय जन विद्रोह के रुप में रेखांकित किया गया है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजवंत राव ने कहा कि 1942 में बलिया ने देश के लिए उत्सर्ग का एक मूल्य स्थापित किया है। पूर्व प्राचार्य डा. वीरेन्द्र बहादुर राव ने बागी बलिया की अमूल्य बलिदानी विरासत को संजोए रखने के लिए युवा पीढ़ी का आह्वान किया। इस मौके पर प्राचार्य डा. विश्व प्रकाश मिश्र, डा. गजेन्द्र पाल सिंह, डा. हरेन्द्र प्रताप सिंह, डा. विजय बहादुर सिंह, अवध नारायण सिंह, डा. अशोक उपाध्याय, डा. गणेश पाठक, डा. शिवबहादुर सिंह, डा. श्रीरंग नाथ मिश्र, डा. उमेश सिंह, डा. सत्यप्रकाश सिंह, डा. अशोक सिंह, डा. अवनीश जगन्नाथ, डा. धीरेन्द्र सिंह, डा. विपुल, डा. शशिप्रकाश, डा. रघुवंश मणि पाठक, डा. रामकृष्ण उपाध्याय, डा. शत्रुधभन पांडेय, मनोज सिंह, विकास कुमार आदि थे। अध्यक्षता जननायक विश्वविद्यालय के कुलपति डा. योगेन्द्र सिंह तथा संचालन डा. अजय बिहारी पाठक ने किया।
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