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जीत-हार को लेकर जगह-जगह हो रही समीक्षा
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:21 PM IST
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बलिया। निकाय चुनाव की मतगणना के बाद परिणामों को लेकर चट्टी-चौराहे पर लोगों ने समीक्षा करनी शुरू कर दी है। इसके अलावा प्रत्याशियों की हार को लेकर विभिन्न दलों ने मंथन शुरु कर दिया है। पार्टी पदाधिकारी भीतरघात को भी हार का एक बड़ा कारण मान रहे हैं, इसको लेकर वे भीतरघातियों को चिह्नित करने के प्रयास में जुट गए हैं। उनकी खास निगाह ऐसे लोगों पर है, जो टिकट की दावेदारों में शामिल थे। ऐसे लोगों पर तलवार लटक गई है। इसका संकेत पार्टी के पदाधिकारियों ने भी दिए हैं।
दो नगर पालिका व आठ नगर पंचायतों में हुए चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए कुल 106 व सभासद पद के लिए कुल 964 प्रत्याशी मैदान में थे। खासकर विभिन्न दलों से टिकट लेने वाले प्रत्याशियों ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा रखी थी। लेकिन यह भी सत्य है कि सभी प्रत्याशी जीत नहीं सकते थे लिहाजा अध्यक्ष पद के 10 प्रत्याशियों के सिर ताज सजा। लेकिन हारने वाले अधिकांश प्रत्याशी इसे कमोवेश भीतरघात ही मान रहे हैं। वार्डों में हारे सभासद प्रत्याशी भी इसका कारण खोजने में जुट गए हैं। मतगणना के बाद शहरी इलाकों के विभिन्न चौराहों पर जुटने वाले लोगों ने जीत-हार को लेकर अपने-अपने तरीके से समीक्षा करनी शुरू कर दी है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रत्याशी बूथ वार समीक्षा कर यह पता लगाने मे जुट गए हैं कि किस वार्ड व बूथ पर कितना मत मिला है और कम मिला है तो इसका कारण क्या है। प्रत्याशी अपने समर्थकों व बूथ एजेंट से भी मामले की तहकीकात कर रहे हैं। उधर, विभिन्न दलों ने भी पार्टी प्रत्याशियों की हार की समीक्षा करनी शुरु कर दी है। दलों के जिलाध्यक्षों ने भी हार का एक कारण भीतरघात को माना है। भाजपा के जिलाध्यक्ष विनोद शंकर दुबे ने कहा कि निश्चित रुप से पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ भीतरघात हुआ है और यही कारण है कि इसके चलते कई प्रत्याशियों को सफलता नहीं मिली। खासकर बलिया नगर पालिका है, जहां पार्टी का वोट बैंक माना जाता है, यहां पार्टी प्रत्याशी की हार होना निश्चित ही चिंता की बात है। पार्टी प्रत्याशी भले ही हार गए लेकिन भीतरघातियों को चिह्नित कर उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इसी तरह सपा के जिलाध्यक्ष यशपाल सिंह ने भी कहा कि माहौल अनुकूल होने के बावजूद कुछ पार्टी प्रत्याशियों की हार के पीछे भीतरघात कारण है। कहा कि इसकी समीक्षा की जाएगी और पार्टी विरोधी कार्य करने वाले को दल से बाहर करने का काम किया जाएगा।
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दो नगर पालिका व आठ नगर पंचायतों में हुए चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए कुल 106 व सभासद पद के लिए कुल 964 प्रत्याशी मैदान में थे। खासकर विभिन्न दलों से टिकट लेने वाले प्रत्याशियों ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा रखी थी। लेकिन यह भी सत्य है कि सभी प्रत्याशी जीत नहीं सकते थे लिहाजा अध्यक्ष पद के 10 प्रत्याशियों के सिर ताज सजा। लेकिन हारने वाले अधिकांश प्रत्याशी इसे कमोवेश भीतरघात ही मान रहे हैं। वार्डों में हारे सभासद प्रत्याशी भी इसका कारण खोजने में जुट गए हैं। मतगणना के बाद शहरी इलाकों के विभिन्न चौराहों पर जुटने वाले लोगों ने जीत-हार को लेकर अपने-अपने तरीके से समीक्षा करनी शुरू कर दी है।
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कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रत्याशी बूथ वार समीक्षा कर यह पता लगाने मे जुट गए हैं कि किस वार्ड व बूथ पर कितना मत मिला है और कम मिला है तो इसका कारण क्या है। प्रत्याशी अपने समर्थकों व बूथ एजेंट से भी मामले की तहकीकात कर रहे हैं। उधर, विभिन्न दलों ने भी पार्टी प्रत्याशियों की हार की समीक्षा करनी शुरु कर दी है। दलों के जिलाध्यक्षों ने भी हार का एक कारण भीतरघात को माना है। भाजपा के जिलाध्यक्ष विनोद शंकर दुबे ने कहा कि निश्चित रुप से पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ भीतरघात हुआ है और यही कारण है कि इसके चलते कई प्रत्याशियों को सफलता नहीं मिली। खासकर बलिया नगर पालिका है, जहां पार्टी का वोट बैंक माना जाता है, यहां पार्टी प्रत्याशी की हार होना निश्चित ही चिंता की बात है। पार्टी प्रत्याशी भले ही हार गए लेकिन भीतरघातियों को चिह्नित कर उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इसी तरह सपा के जिलाध्यक्ष यशपाल सिंह ने भी कहा कि माहौल अनुकूल होने के बावजूद कुछ पार्टी प्रत्याशियों की हार के पीछे भीतरघात कारण है। कहा कि इसकी समीक्षा की जाएगी और पार्टी विरोधी कार्य करने वाले को दल से बाहर करने का काम किया जाएगा।
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