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प्रांतीय सीमा नहीं रुक रहा लाल बालू का खेल, उठ रहे सवाल
Updated Tue, 11 Jul 2017 11:51 PM IST
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बलिया। लाख प्रयास के बावजूद प्रांतीय सीमा भरौली पर लाल बालू का खेल नहीं रुक रहा है और इसको लेकर सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं। राज्यमंत्री के निर्देश और डीएफओ की कार्रवाई का भी कोई असर नहीं है। सीमा पर तैनात वनकर्मियों की मिलीभगत से काला कारोबार बदस्तूर जारी है।
लाल बालू की तस्करी के लिए कुख्यात नरहीं थाना क्षेत्र के प्रांतीय सीमा भरौली में वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने शुुरु हो गए हैं। बीते 39 दिनों में डीएफओ की ओर से तीन बार कार्रवाई की गई और निर्णय को बदला गया। विभाग के राज्यमंत्री की ओर से लाल बालू की तस्करी रोकने का निर्देश दिया गया लेकिन इसके बावजूद सीमा पर गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसको लेकर विभागीय कार्रवाई और प्रांतीय सीमा पर हो रही मनमानी पर सवाल उठने लगे हैं। चार दिन बाद ही लाल बालू की तस्करी के खुलासा और इलाके में पहुंचे राज्यमंत्री की फटकार पर डीएफओ ने तत्कालीन रेंजर सत्येन्द्र सिंह समेत तीन वनकर्मियों को हटाते हुए मोबाइल टीम की तैनाती कर शुल्क वसूली का निर्देश दिया। विभाग ने दावा किया कि बगैर शुल्क दिए कोई वाहन प्रदेश की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता है लेकिन रोजाना 15 से 20 वाहनों से ही वसूली हुई।
अमर उजाला ने एक बार फिर वाहनों की संख्या को लेकर खुलासा किया। इसी बीच करोड़ों के गोलमाल की जांच के लिए आजमगढ़ मंडल के वन संरक्षक आरसी झा जिले में धमक गए। आलम यह रहा कि वन संरक्षक के आने के दिन वाहनों की संख्या करीब 10 गुना अधिक हो गई। इसको लेकर अमर उजाला लगातार खुलासा करता रहा। चार दिन पहले रात में मौके पर पहुंचे डीएफओ ने माना कि पुल जब भारी वाहनों के लिए बंद है तो छोटे वाहनों से लाल बालू का आना पूरी तरह अवैध है। उन्होंने टीम को हटाते हुए प्रवर्तन दल की तैनाती कर वाहनों को सीज करने का फरमान जारी किया। लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों है और छोटे वाहनों से धड़ल्ले से लाल बालू का आवक जारी है।
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पुल बंद होने के बाद बिहार से छोटे वाहनों से लाल बालू का आवक पूरी तरह अवैध है और इसके चलते ही प्रवर्तन दल की तैनाती कर वाहनों को सीज करने का निर्देश दिया गया है। इसे हर हाल में रोका जाएगा।
= राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया
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लाल बालू की तस्करी के लिए कुख्यात नरहीं थाना क्षेत्र के प्रांतीय सीमा भरौली में वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने शुुरु हो गए हैं। बीते 39 दिनों में डीएफओ की ओर से तीन बार कार्रवाई की गई और निर्णय को बदला गया। विभाग के राज्यमंत्री की ओर से लाल बालू की तस्करी रोकने का निर्देश दिया गया लेकिन इसके बावजूद सीमा पर गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसको लेकर विभागीय कार्रवाई और प्रांतीय सीमा पर हो रही मनमानी पर सवाल उठने लगे हैं। चार दिन बाद ही लाल बालू की तस्करी के खुलासा और इलाके में पहुंचे राज्यमंत्री की फटकार पर डीएफओ ने तत्कालीन रेंजर सत्येन्द्र सिंह समेत तीन वनकर्मियों को हटाते हुए मोबाइल टीम की तैनाती कर शुल्क वसूली का निर्देश दिया। विभाग ने दावा किया कि बगैर शुल्क दिए कोई वाहन प्रदेश की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता है लेकिन रोजाना 15 से 20 वाहनों से ही वसूली हुई।
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अमर उजाला ने एक बार फिर वाहनों की संख्या को लेकर खुलासा किया। इसी बीच करोड़ों के गोलमाल की जांच के लिए आजमगढ़ मंडल के वन संरक्षक आरसी झा जिले में धमक गए। आलम यह रहा कि वन संरक्षक के आने के दिन वाहनों की संख्या करीब 10 गुना अधिक हो गई। इसको लेकर अमर उजाला लगातार खुलासा करता रहा। चार दिन पहले रात में मौके पर पहुंचे डीएफओ ने माना कि पुल जब भारी वाहनों के लिए बंद है तो छोटे वाहनों से लाल बालू का आना पूरी तरह अवैध है। उन्होंने टीम को हटाते हुए प्रवर्तन दल की तैनाती कर वाहनों को सीज करने का फरमान जारी किया। लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों है और छोटे वाहनों से धड़ल्ले से लाल बालू का आवक जारी है।
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पुल बंद होने के बाद बिहार से छोटे वाहनों से लाल बालू का आवक पूरी तरह अवैध है और इसके चलते ही प्रवर्तन दल की तैनाती कर वाहनों को सीज करने का निर्देश दिया गया है। इसे हर हाल में रोका जाएगा।
= राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया