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पखवाड़ाभर में 100 बीघा जमीन का कटान
Updated Fri, 04 Aug 2017 10:28 PM IST
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जयप्रकाशनगर। विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत चांददीयर से लगायत इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा ) तक विगत पंद्रह दिनों में घाघरा ने इन दोनों पंचायतों के किसानों की कृषि योग्य करीब 100 बीघा उपजाऊ भूमि अपने आगोश में ले ली। यह सिलसिला अभी भी बरकरार है।
अभी तक किसान सूचित यादव, भिखारी यादव, नाथनरायन यादव, पारस यादव, रामचन्द्र यादव, देवानन्द सिंह, शैलेन्द्र सिंह, जीता सिंह, उदयप्रताप सिंह, रामेश्वर सिंह, धर्मनाथ सिंह, गया सिंह, परमेश्वर सिंह आदि की कृषि योग्य भूमि के साथ करीब 15 ट्यूबवेल भी कटान की जद में जा चुके हैं। किसानों की मानें तो यह कटान वर्ष 2010 -11 से शुरू हुआ। कटान स्थल का आज तक सर्वे निरीक्षण सभी शासन प्रशासन के आलाधिकारी व राजनीतिक हस्तिया करती रहीं, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। वर्ष 2014 में जब घाघरा ने अठगांवा के तीन पुरवों के 350 परिवारों को बेघर कर दिया तब कटान पीड़ितों ने बाध्य होकर अपने बचाव के लिए मतदान का विरोध, आमरण अनशन और एनएच 31 पर चक्का जाम आदि करना शुरू किया। फलस्वरूप एक करोड़ सत्रह लाख रुपये तो कटानरोधी कार्य के लिए आए, लेकिन आज तक समय रहते कभी भी विभाग नहीं चेता। जिसका परिणाम कटान करते हुए घाघरा अब बकुल्हा संसार टोला बन्धे को अपने आगोश में लेने को आतुर है।
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अभी तक किसान सूचित यादव, भिखारी यादव, नाथनरायन यादव, पारस यादव, रामचन्द्र यादव, देवानन्द सिंह, शैलेन्द्र सिंह, जीता सिंह, उदयप्रताप सिंह, रामेश्वर सिंह, धर्मनाथ सिंह, गया सिंह, परमेश्वर सिंह आदि की कृषि योग्य भूमि के साथ करीब 15 ट्यूबवेल भी कटान की जद में जा चुके हैं। किसानों की मानें तो यह कटान वर्ष 2010 -11 से शुरू हुआ। कटान स्थल का आज तक सर्वे निरीक्षण सभी शासन प्रशासन के आलाधिकारी व राजनीतिक हस्तिया करती रहीं, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। वर्ष 2014 में जब घाघरा ने अठगांवा के तीन पुरवों के 350 परिवारों को बेघर कर दिया तब कटान पीड़ितों ने बाध्य होकर अपने बचाव के लिए मतदान का विरोध, आमरण अनशन और एनएच 31 पर चक्का जाम आदि करना शुरू किया। फलस्वरूप एक करोड़ सत्रह लाख रुपये तो कटानरोधी कार्य के लिए आए, लेकिन आज तक समय रहते कभी भी विभाग नहीं चेता। जिसका परिणाम कटान करते हुए घाघरा अब बकुल्हा संसार टोला बन्धे को अपने आगोश में लेने को आतुर है।
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