UP Board Paper leak: अंग्रेजी पेपर लीक मामले में बलिया से 10 और गिरफ्तार, संदिग्धों के ठिकानों पर लगातार दबिश
यूपी बोर्ड के इंटर अंग्रेजी विषय का पेपर लीक होने के मामले में अब तक कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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यूपी बोर्ड के इंटर अंग्रेजी विषय का पेपर लीक होने के मामले में बलिया जिले की नगरा और सिकंदरपुर पुलिस ने शुक्रवार को 10 और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अब तक कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पेपर कैसे और कहां से आउट हुआ।
अंग्रेजी का प्रश्नपत्र लीक होने पर बुधवार को बलिया समेत 24 जनपदों में परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इस मामले में बृहस्पतिवार तक डीआईओएस समेत 22 लोगों की गिरफ्तारी की गई थी। एसपी राजकरन नय्यर के अनुसार, शुक्रवार को नगरा पुलिस ने छह आरोपी पकड़े।
इन लोगों को किया गया गिरफ्तार
इनमें आनंद नारायण चौहान, मनीष चौहान, बृजेश चौहान निवासी ग्राम कलवारी, थाना भीमपुरा, विकास राय, प्रशांत राय निवासी ग्राम भरौली खास, थाना नरही और आजाद पांडेय निवासी ग्राम सिकरिया, थाना भीमपुरा शामिल हैं। एसपी के अनुसार, सिकंदरपुर से चार आरोपियों शाहिद अंसारी, अनिल कुमार गोंड़ निवासी मोहल्ला मिल्की, अरविद कुमार निवासी दुबौली व अनूप यादव निवासी ननहुल थाना पकड़ी को गिरफ्तार किया गया।
अब तक बलिया शहर कोतवाली पुलिस ने दो, सिकंदरपुर से नौ और नगरा थाना क्षेत्र से 21 अभियुक्त पकड़े जा चुके हैं। अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है।
पेपर लीक मामले में राजनीतिक रंग
यूपी बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम पर शुक्रवार को कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा सरकार को उत्तर प्रदेश में पेपर लीक पर चर्चा भी करनी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कुछ परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने का हवाला दिया।
शुक्रवार को कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी प्रियंका ने ट्वीट करते हुए लिखा कि पेपर लीक की खबर लिखने वाले पत्रकार को जेल भेजा जा रहा है, लेकिन, पेपर लीक करने वाला तंत्र सरकार में पैठ जमाए बैठा है। उस पर न कोई बुलडोजर चलता है, न कोई बदलाव आता है। पिछले साल 28 नवंबर को यूपी टीईटी पेपर लीक से लाखों युवाओं को ठेस पहुंची थी। कार्रवाई के नाम पर दिखावटी कदमों के अलावा कुछ नहीं हुआ।
पत्रकारों की गिरफ्तारी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
राज्यपाल के नाम ज्ञापन देते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की गई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट में कहा है कि हिरासत के डर से चौथा स्तंभ आजाद होना चाहिए। भाजपा सरकार के राज में ये बेहद नकारात्मक बात है कि जो देता है अपराध की खबर, उसी पर टूटता है कहर।