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ट्रेन संचालन के लिए सड़क से सदन तक करेंगे संघर्ष

Wed, 19 Feb 2020 11:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 11:06 PM IST
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Will struggle from road to house for train operation
बहराइच नगर में बुधवार को पत्रकारों से वार्ता करते सांसद अक्ष्यवरलाल गोंड। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। कई साल पहले शुरू हुआ ट्रेन का संचालन बंद हो जाए। ऐसा होने नहीं दिया जाएगा। ट्रेन के संचालन के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी। वन विभाग कोर्ट व सरकार को भ्रमित कर रहा है, जिससे ट्रेन का संचालन बंद हुआ है। ट्रेन का संचालन बंद होने से 20 लाख की आबादी प्रभावित होगी। ऐसा न हो, इसके लिए रेल मंत्री से भी वार्ता की गई है। यह बातें प्रेसवार्ता के दौरान सांसद अक्षयवरलाल गोंड ने कहीं।
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बहराइच से मैलानी रूट पर चलने वाली ट्रेनों को वन विभाग ने कोर्ट का हवाला देकर तीन दिन पहले बंद कर दिया। ट्रेनों का संचालन बंद होने से जनता सड़क पर उतर आई। मामले ने तूल पकड़ा तो सांसद अक्षयवरलाल गोंड भी इस लड़ाई को सफल बनाने के लिए आगे आए। बुधवार को सांसद अक्षयवरलाल गोंड ने अपने आवास पर प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि ट्रेन का संचालन कतई नहीं बंद होने दिया जाएगा।
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रेल मंत्री पीयूष गोयल से ट्रेन के संचालन के लिए वार्ता की है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की आवाज को सुना जाएगा। सांसद ने कहा कि ट्रेन का संचालन न होने से 20 लाख की आबादी प्रभावित होगी। इस दौरान रेल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक श्रवण मदेशिया, सांसद प्रतिनिधि डॉ. आनंद गोंड, रणविजय सिंह, धीरज गौड़ आदि मौजूद रहे।
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कोर्ट से भागे, जवाब नहीं दे पाया वन विभाग
प्रेसवार्ता में सांसद ने बताया कि जब वन विभाग की ओर से कोर्ट में गए अधिकारियों से पूछा गया कि ट्रेन का संचालन क्यों बंद किया गया? तो वन विभाग के पास संतुष्ट जवाब नहीं था। जवाब दे नहीं पाए तो कोर्ट से भाग गए। देर में आने से कोर्ट से वन विभाग पर जुर्माना भी लगाया।
अधिकार का दुरुपयोग कर रहा वन विभाग
सांसद ने कहा कि वन विभाग अपने अधिकार का दुरुपयोग कर रहा है। वन विभाग केवल कोर्ट व सरकार को भ्रमित कर रहा है। वन विभाग ने पहले कहा था कि वन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक तार भी नहीं जाएगा, लेकिन आज जो विकास हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है। वन विभाग केवल अपने अधिकार का दुरुपयोग कर रहा है।

ओवरब्रिज व बाड़ लगाना वन विभाग केे पास विकल्प
ट्रेनों के संचालन से अगर वन्य जीवों की मौतें हो रही हैं तो उसका भी विकल्प निकाला जा सकता है। ट्रेन का संचालन बंद करा दिया जाए। यह कोई विकल्प नहीं है। वन विभाग बाड़ लगवा सकता है। ओवरब्रिज की मांग करें, जिससे ट्रेन से ऊपर से गुजरे, नीचे से कोई मतलब ही न रहे।
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