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Bahraich News: उल्टी-दस्त व बुखार का प्रकोप, 20 बच्चे भर्ती
Sat, 07 Sep 2024 02:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 07 Sep 2024 02:31 AM IST
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बहराइच मेडिकल कालेज के पीआईसीयू में भर्ती बीमार बच्चे।
बहराइच। वायरल बुखार व उल्टी-दस्त का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। मेडिकल कॉलेज का चिल्ड्रेन व पीआईसीयू वार्ड फुल हो गया है। 24 घंटे में 20 बच्चों को भर्ती कराया गया है। इसमें 15 बच्चे सिर्फ उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं।
तराई में पड़ रही उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हो गए हैं। अस्पतालों में उल्टी-दस्त व बुखार सहित अन्य संक्रामक रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में 20 बच्चों को भर्ती कराया गया। इसमें सबसे ज्यादा उल्टी-दस्त से पीड़ित बच्चे हैं। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी का कहना है कि मौसम परिवर्तन के कारण बच्चे वायरल बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उल्टी-दस्त आने पर ओआरएस का घोल पिलाते रहें।
काउंटर बढ़े तो मरीजों को मिले राहत
मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो फीस काउंटर हैं, जहां मरीजाें का तांता लगा रहता है। पर्ची कटवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। मरीजों का कहना है कि भीड़ इतनी होती है कि खड़े होने की जगह नहीं रहती है। यदि काउंटर बढ़ा दिए जाएं, तो समय खत्म होने के बाद जो मरीज लौट जाते हैं उन्हें भी समय से इलाज मिल जाएगा।
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तराई में पड़ रही उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हो गए हैं। अस्पतालों में उल्टी-दस्त व बुखार सहित अन्य संक्रामक रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में 20 बच्चों को भर्ती कराया गया। इसमें सबसे ज्यादा उल्टी-दस्त से पीड़ित बच्चे हैं। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी का कहना है कि मौसम परिवर्तन के कारण बच्चे वायरल बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उल्टी-दस्त आने पर ओआरएस का घोल पिलाते रहें।
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काउंटर बढ़े तो मरीजों को मिले राहत
मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो फीस काउंटर हैं, जहां मरीजाें का तांता लगा रहता है। पर्ची कटवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। मरीजों का कहना है कि भीड़ इतनी होती है कि खड़े होने की जगह नहीं रहती है। यदि काउंटर बढ़ा दिए जाएं, तो समय खत्म होने के बाद जो मरीज लौट जाते हैं उन्हें भी समय से इलाज मिल जाएगा।
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