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Bahraich News: छह साल से शोपीस बना ट्रॉमा सेंटर, हादसों में दम तोड़ रहे लोग
Wed, 23 Apr 2025 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:46 PM IST
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बहराइच के चांदपुरा में ट्रॉमा सेंटर।
विभाकर शुक्ल
बहराइच। जिले में हो रहे सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोग समय पर उचित इलाज न मिल पाने से जान गंवा रहे हैं। ऐसे लोगों के उपचार के लिए शहर के चांदपुरा में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण तो किया गया है, लेकिन कार्यदायी की ओर से निर्माण पूरा करने के छह साल बाद भी यहां इलाज शुरू नहीं हो सका है। यहां अब तक डॉक्टर व जरूरी स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है।
आठ साल पहले शुरू हुआ था निर्माण
जिले के पुराने मलेरिया अस्पताल परिसर में वर्ष 2016 में ट्रॉमा सेंटर की नींव रखी गई थी। यह 2019 में बनकर तैयार हुआ और 2020 में स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया। 40 बेड के ट्रॉमा सेंटर में इलाज की सारी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इलाज करने वाले ही नहीं हैं। यहां कुल 61 पद सृजित किए गए थे। इनमें 2 जनरल सर्जन, 2 आर्थोपेडिक सर्जन, 15 नर्स, 6 इमरजेंसी डॉक्टर और 9 मल्टी टास्क वर्कर सहित अन्य शामिल थे। इनकी तैनाती न होने से ट्रॉमा सेंटर शोपीस बना हुआ है।
जनता की उम्मीदों पर भारी प्रशासन की चुप्पी
ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद जब स्वास्थ्य विभाग को इसे हस्तांतरित किया गया तो सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। इसमें ट्रॉमा सेंटर को चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन की नींद अब तक खुली नहीं। जनता की उम्मीदों पर प्रशासन की चुप्पी भारी पड़ रही है। ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के बाद जिले के लोगों में आस जगी थी कि अब लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन 168.76 लाख की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर अब चूहों और जंग लगे तालों का अड्डा बन चुका है। कार्यदायी संस्था सी एंड डीएस (जल निगम) ने अपना काम तो समय पर कर दिया, लेकिन अब तक स्वास्थ्य महकमा और प्रशासन केवल फाइलों की टेबल-टेनिस खेल रहा है।
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ट्राॅमा सेंटर संचालित होता तो बच सकती थीं कई जानें
जिले में प्रतिदिन सड़क हादसे हो रहे हैं। इधर पखवारे भर से सड़क दुर्घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। हाल ही में पयागपुर थाना क्षेत्र में गोंडा रोड पर हुए सड़क हादसे में एक साथ पांच लोगों की मौत हुई। यदि ट्राॅमा सेंटर संचालित होता तो कुछ लोगों की जान बच जाती। इसी तरह प्रतिदिन गंभीर मरीज बहराइच अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों को अक्सर जिला अस्पताल से लखनऊ रेफर कर दिया जाता है, लेकिन लखनऊ ले जाते समय अधिकांश मरीज दम तोड़ देते हैं।
अभी हैंडओवर नहीं हुआ भवन
अभी ट्राॅमा विंग मेडिकल कॉलेज का हैंडओवर नहीं हुई है। जैसे ही भवन हैंडओवर होगा वैसे ही वहां की व्यवस्था लोगों को त्वरित सुविधा देने लायक बनाई जाएगी। -डाॅ. संजय खत्री, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज
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बहराइच। जिले में हो रहे सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोग समय पर उचित इलाज न मिल पाने से जान गंवा रहे हैं। ऐसे लोगों के उपचार के लिए शहर के चांदपुरा में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण तो किया गया है, लेकिन कार्यदायी की ओर से निर्माण पूरा करने के छह साल बाद भी यहां इलाज शुरू नहीं हो सका है। यहां अब तक डॉक्टर व जरूरी स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है।
आठ साल पहले शुरू हुआ था निर्माण
जिले के पुराने मलेरिया अस्पताल परिसर में वर्ष 2016 में ट्रॉमा सेंटर की नींव रखी गई थी। यह 2019 में बनकर तैयार हुआ और 2020 में स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया। 40 बेड के ट्रॉमा सेंटर में इलाज की सारी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इलाज करने वाले ही नहीं हैं। यहां कुल 61 पद सृजित किए गए थे। इनमें 2 जनरल सर्जन, 2 आर्थोपेडिक सर्जन, 15 नर्स, 6 इमरजेंसी डॉक्टर और 9 मल्टी टास्क वर्कर सहित अन्य शामिल थे। इनकी तैनाती न होने से ट्रॉमा सेंटर शोपीस बना हुआ है।
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जनता की उम्मीदों पर भारी प्रशासन की चुप्पी
ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद जब स्वास्थ्य विभाग को इसे हस्तांतरित किया गया तो सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। इसमें ट्रॉमा सेंटर को चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन की नींद अब तक खुली नहीं। जनता की उम्मीदों पर प्रशासन की चुप्पी भारी पड़ रही है। ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के बाद जिले के लोगों में आस जगी थी कि अब लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन 168.76 लाख की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर अब चूहों और जंग लगे तालों का अड्डा बन चुका है। कार्यदायी संस्था सी एंड डीएस (जल निगम) ने अपना काम तो समय पर कर दिया, लेकिन अब तक स्वास्थ्य महकमा और प्रशासन केवल फाइलों की टेबल-टेनिस खेल रहा है।
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ट्राॅमा सेंटर संचालित होता तो बच सकती थीं कई जानें
जिले में प्रतिदिन सड़क हादसे हो रहे हैं। इधर पखवारे भर से सड़क दुर्घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। हाल ही में पयागपुर थाना क्षेत्र में गोंडा रोड पर हुए सड़क हादसे में एक साथ पांच लोगों की मौत हुई। यदि ट्राॅमा सेंटर संचालित होता तो कुछ लोगों की जान बच जाती। इसी तरह प्रतिदिन गंभीर मरीज बहराइच अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों को अक्सर जिला अस्पताल से लखनऊ रेफर कर दिया जाता है, लेकिन लखनऊ ले जाते समय अधिकांश मरीज दम तोड़ देते हैं।
अभी हैंडओवर नहीं हुआ भवन
अभी ट्राॅमा विंग मेडिकल कॉलेज का हैंडओवर नहीं हुई है। जैसे ही भवन हैंडओवर होगा वैसे ही वहां की व्यवस्था लोगों को त्वरित सुविधा देने लायक बनाई जाएगी। -डाॅ. संजय खत्री, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज