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ट्रेनों का संचालन हुआ बंद, आठ लाख आबादी मायूस
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गोंडा-मैलानी प्रखंड पर ट्रेनों के संचालन बंद होने पर मिहींपुरवा रेलवे स्टेशन पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : BAHRAICH
मोतीपुर (बहराइच)। रेलवे की ओर से रविवार से पूर्व निर्धारित समय के अनुसार नानपारा-मैलानी रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया है। इस रूट पर ट्रेनों का संचालन बंद होने से क्षेत्र की लगभग आठ लाख आबादी मायूस हो गई है। जानकारी न होने के चलते कुछ लोग रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों पर पहुंचे, मगर ट्रेन के नहीं आने पर इंतजार कर मायूस होकर लौट गए।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के जंगलों से गुजरी रेल लाइन पर ट्रेनों का संचालन बंद किए जाने का आदेश उच्च न्यायालय ने दिया था। रेलवे ने मैलानी के बीच लखीमपुर से 14 फरवरी से बड़ी लाइन ट्रेन का संचालन शुरू किया। इसके बाद रेलवे ने नानपारा-मैलानी के बीच चलने वाली ट्रेनों को बंद करने का निर्णय ले लिया। ट्रेनों को बंद किए जाने का विरोध लगातार जारी है। विरोध के बीच ही रविवार से रेलवे ने नानपारा से मैलानी के बीच चलने वाली ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया है।
सुबह कुछ यात्री जब ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे तो जानकारी मिली कि आज से इस रेल खंड पर कोई भी ट्रेन संचालित नहीं की जाएगी, जिससे लोग मायूस होकर लौट गए। लोगों को प्राइवेट बसों और डग्गामार वाहनों से गंतव्य तक जाने का सहारा लेना पड़ा। ट्रेनों के बंद होने से नानपारा से बिछिया के बीच की करीब आठ लाख आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। जबकि बहराइच और दूसरे स्थानों से सफर करने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
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ट्रेनों के बंद किए जाने की घोषणा के बाद भी रेलवे की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। वहीं परिवहन निगम की उदासीनता भी लोगों पर भारी पड़ रही है। ट्रेनों का संचालन न होने से रेल लाइन पूरी तरह से सूनी पड़ी रही। ट्रेनों के हार्न की आवाज सुनने को लोगों के कान तरस गए। सभी लोग आपस में बातें करते हुए रेलवे को कोस रहे थे।
यह स्टेशन हुए वीरान
नानपारा से मैलानी प्रखंड के बीच 46 किलोमीटर रेल लाइन जिले की सीमा में पड़ती है। इस बीच आठ रेलवे स्टेशन पड़ते हैं, जिनमें रायबोझा, गायघाट, मिहींपुरवा, ककरहा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, बिछिया और कैलाशपुरी हाल्ट स्टेशन स्थित हैं। रविवार से यह सभी स्टेशन वीरान हो गए हैं। यहां कर्मचारी तैनात रहे, लेकिन ट्रेन के न आने के कारण सभी मौज-मस्ती करते हुए दिखाई दिए।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के जंगलों से गुजरी रेल लाइन पर ट्रेनों का संचालन बंद किए जाने का आदेश उच्च न्यायालय ने दिया था। रेलवे ने मैलानी के बीच लखीमपुर से 14 फरवरी से बड़ी लाइन ट्रेन का संचालन शुरू किया। इसके बाद रेलवे ने नानपारा-मैलानी के बीच चलने वाली ट्रेनों को बंद करने का निर्णय ले लिया। ट्रेनों को बंद किए जाने का विरोध लगातार जारी है। विरोध के बीच ही रविवार से रेलवे ने नानपारा से मैलानी के बीच चलने वाली ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया है।
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सुबह कुछ यात्री जब ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे तो जानकारी मिली कि आज से इस रेल खंड पर कोई भी ट्रेन संचालित नहीं की जाएगी, जिससे लोग मायूस होकर लौट गए। लोगों को प्राइवेट बसों और डग्गामार वाहनों से गंतव्य तक जाने का सहारा लेना पड़ा। ट्रेनों के बंद होने से नानपारा से बिछिया के बीच की करीब आठ लाख आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। जबकि बहराइच और दूसरे स्थानों से सफर करने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
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ट्रेनों के बंद किए जाने की घोषणा के बाद भी रेलवे की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। वहीं परिवहन निगम की उदासीनता भी लोगों पर भारी पड़ रही है। ट्रेनों का संचालन न होने से रेल लाइन पूरी तरह से सूनी पड़ी रही। ट्रेनों के हार्न की आवाज सुनने को लोगों के कान तरस गए। सभी लोग आपस में बातें करते हुए रेलवे को कोस रहे थे।
यह स्टेशन हुए वीरान
नानपारा से मैलानी प्रखंड के बीच 46 किलोमीटर रेल लाइन जिले की सीमा में पड़ती है। इस बीच आठ रेलवे स्टेशन पड़ते हैं, जिनमें रायबोझा, गायघाट, मिहींपुरवा, ककरहा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, बिछिया और कैलाशपुरी हाल्ट स्टेशन स्थित हैं। रविवार से यह सभी स्टेशन वीरान हो गए हैं। यहां कर्मचारी तैनात रहे, लेकिन ट्रेन के न आने के कारण सभी मौज-मस्ती करते हुए दिखाई दिए।