{"_id":"63f7adcc933d09fbbe0ee707","slug":"train-bahraich-news-lko6705916120-2023-02-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: औपचारिकता बनकर रह गई बनारस रेल सेवा, दर्शन को तरस रहे भोले के भक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: औपचारिकता बनकर रह गई बनारस रेल सेवा, दर्शन को तरस रहे भोले के भक्त
विज्ञापन
बहराइच। बहराइच से बनारस तक की रेल सेवा मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है। दिसंबर में कोहरे की शुरूआत से पहले ही रेलवे ने कोहरे का हवाला देते हुए ट्रेन का संचालन बंद कर दिया था। तीन धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली ट्रेन बंद होने से श्रद्धालुओं को बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने में परेशानी हो रही है। यही नहीं नेपालगंज रोड की ट्रेनें बंद होने से सरकारी कर्मचारी और अन्य दैनिक यात्रियों के लिए बेहद परेशानी हुई है।
रेल सेवा यात्रियों के लिए बेहद सहूलियत भरी होती है। बहराइच से बनारस के लिए एक इंटरसिटी ट्रेन चलाई गई थी, जिससे लोगों को काफी हर्ष हुआ था कि बहराइच से भगवान श्रीराम नगरी अयोध्या होते हुए काशी में भोलेनाथ के दर्शन करने में कोई कठिनाई नहीं होगी। लेकिन यह ट्रेन कुछ दिन चलने के बाद दिसम्बर में कोहरे का हवाला देते हुए बंद कर दी गई थी।
फरवरी बीतने वाली है। कोहरे का नामोनिशान तक नहीं है, फिर भी यह ट्रेन अभी तक नहीं चलाई जा सकी हे। जिससे भोलेनाथ व भगवान श्रीराम के भक्त दर्शन करने के लिए तरस रहे हैं। कोरोना काल के दौरान बहराइच-नेपालगंज रोड रूट की भी दो ट्रेनें बंद कर दी गई थीं।
विज्ञापन
जिससे दैनिक रेल यात्रियों, सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मियों, छात्र-छात्राओं को को तगड़ा झटका लगा था। ट्रेन बंद हो जाने व बसों का किराया अधिक होने से इन सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों के आने-जाने के लिए वर्तमान में सिर्फ दो ट्रेनें चल रही हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं।
व्यापार मण्डल रुपईडीहा के कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल का कहना है कि कई बार रेलवे के अधिकारियों से ट्रेन चलाने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि बंद ट्रेनें चलने से जहां व्यापार को बढ़ावा मिलेगा वहीं रेलवे को राजस्व में फायदा होगा। डॉक्टर्स एसोसिएशन रुपईडीहा के अध्यक्ष डॉ. सनत कुमार शर्मा ने कहा कि सुबह साढ़े पांच बजे व आठ बजे रुपईडीहा से दो ट्रेनें निकलती थीं। वहीं शाम चार बजे व रात आठ बजे बहराइच से भी दो ट्रेनें रुपईडीहा के लिए आती थीं, जो वर्तमान नहीं चल रही हैं। यह ट्रेनें यदि चल जाएं तो हर वर्ग को फायदा मिलेगा।
विज्ञापन
रेल सेवा यात्रियों के लिए बेहद सहूलियत भरी होती है। बहराइच से बनारस के लिए एक इंटरसिटी ट्रेन चलाई गई थी, जिससे लोगों को काफी हर्ष हुआ था कि बहराइच से भगवान श्रीराम नगरी अयोध्या होते हुए काशी में भोलेनाथ के दर्शन करने में कोई कठिनाई नहीं होगी। लेकिन यह ट्रेन कुछ दिन चलने के बाद दिसम्बर में कोहरे का हवाला देते हुए बंद कर दी गई थी।
विज्ञापन
फरवरी बीतने वाली है। कोहरे का नामोनिशान तक नहीं है, फिर भी यह ट्रेन अभी तक नहीं चलाई जा सकी हे। जिससे भोलेनाथ व भगवान श्रीराम के भक्त दर्शन करने के लिए तरस रहे हैं। कोरोना काल के दौरान बहराइच-नेपालगंज रोड रूट की भी दो ट्रेनें बंद कर दी गई थीं।
विज्ञापन
जिससे दैनिक रेल यात्रियों, सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मियों, छात्र-छात्राओं को को तगड़ा झटका लगा था। ट्रेन बंद हो जाने व बसों का किराया अधिक होने से इन सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों के आने-जाने के लिए वर्तमान में सिर्फ दो ट्रेनें चल रही हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं।
व्यापार मण्डल रुपईडीहा के कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल का कहना है कि कई बार रेलवे के अधिकारियों से ट्रेन चलाने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि बंद ट्रेनें चलने से जहां व्यापार को बढ़ावा मिलेगा वहीं रेलवे को राजस्व में फायदा होगा। डॉक्टर्स एसोसिएशन रुपईडीहा के अध्यक्ष डॉ. सनत कुमार शर्मा ने कहा कि सुबह साढ़े पांच बजे व आठ बजे रुपईडीहा से दो ट्रेनें निकलती थीं। वहीं शाम चार बजे व रात आठ बजे बहराइच से भी दो ट्रेनें रुपईडीहा के लिए आती थीं, जो वर्तमान नहीं चल रही हैं। यह ट्रेनें यदि चल जाएं तो हर वर्ग को फायदा मिलेगा।