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दिमागी बुखार से तीन बच्चों की मौत, चार गंभीर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Oct 2016 10:15 PM IST
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तराई में दिमागी बुखार के प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। जिला अस्पताल मेें भर्ती बुखार पीड़ित दो मासूम समेत तीन लोगों ने शुक्रवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 18 और रोगियों को उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। उनमें चार पीड़ितों की हालत नाजुक बताई जा रही है। रोगियों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में संसाधन कम पड़ने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में दिमागी बुखार और डेंगू का प्रकोप भले ही नियंत्रित हो लेकिन पीड़ितों के दम तोड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इन हालात में स्वास्थ महकमा की स्थिति बेबस जैसी है। हरदी क्षेत्र में ग्राम पहलवारा निवासी विजय शंकर के डेढ़ वर्षीय पुत्र राम कुमार को तीन दिन पूर्व तेज बुखार और झटके आने की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था।
इलाज के दौरान शुक्रवार सुबह राम कुमार की हालत बिगड़ गई। कुछ देर बाद उसकी सांसें थम गईं। इस पर परिवारीजन बिलख उठे। उधर खैरीघाट में बैबाही निवासी रवि (8) पुत्र पवन कुमार को भी तेज बुखार और झटके की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार दोपहर बाद रवि ने भी दम तोड़ दिया।
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रिसिया क्षेत्र में बहबुलिया निवासी सहनाज (5) पुत्र जमालुद्दीन को तेज बुखार और झटके के साथ टिटनेस का भी संक्रमण हो गया था। उसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं बुखार व अन्य संक्रामक रोगों से ग्रसित 18 अन्य रोगी जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
इनमें राधा (डेढ़) निवासी महसी, गौरीशंकर (3) निवासी शिवपुर व पप्पू (2) निवासी कैसरगंज की हालत नाजुक बताई जा रही है। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि रोगी काफी गंभीर हालत में लाए गए थे जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
जिला अस्पताल में बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ने से संसाधन कम पड़ते दिख रहे हैं। ओपीडी में 300-350 रोगी प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। ऐसे में भर्ती होने वाले रोगियों में भी इजाफा हुआ है। सीएमएस डॉ. डीके सिंह के मुताबिक मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में बेड की कमी जरूर है लेकिन उसकी व्यवस्था की जा रही है। नन्हें रोगियों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में दिमागी बुखार और डेंगू का प्रकोप भले ही नियंत्रित हो लेकिन पीड़ितों के दम तोड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इन हालात में स्वास्थ महकमा की स्थिति बेबस जैसी है। हरदी क्षेत्र में ग्राम पहलवारा निवासी विजय शंकर के डेढ़ वर्षीय पुत्र राम कुमार को तीन दिन पूर्व तेज बुखार और झटके आने की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था।
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इलाज के दौरान शुक्रवार सुबह राम कुमार की हालत बिगड़ गई। कुछ देर बाद उसकी सांसें थम गईं। इस पर परिवारीजन बिलख उठे। उधर खैरीघाट में बैबाही निवासी रवि (8) पुत्र पवन कुमार को भी तेज बुखार और झटके की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार दोपहर बाद रवि ने भी दम तोड़ दिया।
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रिसिया क्षेत्र में बहबुलिया निवासी सहनाज (5) पुत्र जमालुद्दीन को तेज बुखार और झटके के साथ टिटनेस का भी संक्रमण हो गया था। उसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं बुखार व अन्य संक्रामक रोगों से ग्रसित 18 अन्य रोगी जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
इनमें राधा (डेढ़) निवासी महसी, गौरीशंकर (3) निवासी शिवपुर व पप्पू (2) निवासी कैसरगंज की हालत नाजुक बताई जा रही है। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि रोगी काफी गंभीर हालत में लाए गए थे जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
जिला अस्पताल में बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ने से संसाधन कम पड़ते दिख रहे हैं। ओपीडी में 300-350 रोगी प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। ऐसे में भर्ती होने वाले रोगियों में भी इजाफा हुआ है। सीएमएस डॉ. डीके सिंह के मुताबिक मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में बेड की कमी जरूर है लेकिन उसकी व्यवस्था की जा रही है। नन्हें रोगियों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।