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बुखार और निमोनिया से तीन बच्चों की मौत
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बहराइच मेडिकल कालेज के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बुखार से पीड़ित बच्चे।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। तराई में लगातार बदल रहे मौसम के चलते मासूम बुखार और निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के चिल्ड्रेन वार्ड में देर शाम इलाज के दौरान तीन मासूमों की मौत हो गई। यह सभी मासूम बुखार व निमोनिया से ग्रसित थे। मृतकों में दो मासूम श्रावस्ती जिले के निवासी हैं। उधर, विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 14 और रोगी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए हैं। इनमें तीन रोगियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें पीआईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है।
तराई में मौसम में बदलाव तेजी से हो रहा है। मौसम के बदलने के कारण बच्चों के बीमार होने की संभावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। प्रतिदिन तमाम मासूम इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। रानीपुर थाना अंतर्गत हरिराजपुर गांव निवासी शालिनी (5) पुत्री सतीश चंद्र को बुखार होने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बुधवार देर शाम शालिनी की सांस थम गई।
वहीं, श्रावस्ती जिले के इकौना निवासी नाजरीन (6 माह) पुत्री अकरम और स्वाती (दो माह) पुत्री रामकरन की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। चिकित्सकों के मुताबिक नाजरीन और स्वाती निमोनिया से भी ग्रसित थीं। तीनों रोगी चिल्ड्रेन वार्ड के पीआईसीयू में भर्ती थे। लेकिन पीआईसीयू वार्ड में इलाज के दौरान रोगियों को लाभ नहीं हुआ।
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मासूमों के परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर चले गए। उधर, चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार और निमोनिया से पीड़ित 14 और रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें तीन रोगियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें चिल्ड्रेन वार्ड के पीआईसीयू में भर्ती किया गया है।
बदल रहे मौसम में मासूमों का रखें ख्याल
जिला तराई क्षेत्र में आता है। तराई में मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में शून्य से पांच वर्ष के मासूमों का माता-पिता पूरा ख्याल रखें। ठंड से बचाव के लिए अलाव की भी व्यवस्था करें। पसली तेज चलने पर गर्म तेल का मालिश करें। उल्टी, दस्त व तेज सांस चलने पर तुरंत चिकित्सकों से इलाज कराएं।
- डॉ. केके वर्मा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ
गंभीर हालत में आए थे मासूम
मेडिकल कॉलेज में इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सभी मरीजों को दवा अस्पताल से दी जा रही है। जिन तीन रोगियों की मौत इलाज के दौरान हुई है। उनके परिवारीजन उन्हें गंभीर हालत में लेकर आए थे। इनमें एक रोगी को लखनऊ भी रेफर किया गया था। लेकिन किसी कारणवश वह लखनऊ नहीं जा सके। सभी मासूम रोगियों का इलाज चिकित्सकों की देखरेख में हुआ, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
- डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक
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तराई में मौसम में बदलाव तेजी से हो रहा है। मौसम के बदलने के कारण बच्चों के बीमार होने की संभावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। प्रतिदिन तमाम मासूम इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। रानीपुर थाना अंतर्गत हरिराजपुर गांव निवासी शालिनी (5) पुत्री सतीश चंद्र को बुखार होने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बुधवार देर शाम शालिनी की सांस थम गई।
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वहीं, श्रावस्ती जिले के इकौना निवासी नाजरीन (6 माह) पुत्री अकरम और स्वाती (दो माह) पुत्री रामकरन की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। चिकित्सकों के मुताबिक नाजरीन और स्वाती निमोनिया से भी ग्रसित थीं। तीनों रोगी चिल्ड्रेन वार्ड के पीआईसीयू में भर्ती थे। लेकिन पीआईसीयू वार्ड में इलाज के दौरान रोगियों को लाभ नहीं हुआ।
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मासूमों के परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर चले गए। उधर, चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार और निमोनिया से पीड़ित 14 और रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें तीन रोगियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें चिल्ड्रेन वार्ड के पीआईसीयू में भर्ती किया गया है।
बदल रहे मौसम में मासूमों का रखें ख्याल
जिला तराई क्षेत्र में आता है। तराई में मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में शून्य से पांच वर्ष के मासूमों का माता-पिता पूरा ख्याल रखें। ठंड से बचाव के लिए अलाव की भी व्यवस्था करें। पसली तेज चलने पर गर्म तेल का मालिश करें। उल्टी, दस्त व तेज सांस चलने पर तुरंत चिकित्सकों से इलाज कराएं।
- डॉ. केके वर्मा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ
गंभीर हालत में आए थे मासूम
मेडिकल कॉलेज में इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सभी मरीजों को दवा अस्पताल से दी जा रही है। जिन तीन रोगियों की मौत इलाज के दौरान हुई है। उनके परिवारीजन उन्हें गंभीर हालत में लेकर आए थे। इनमें एक रोगी को लखनऊ भी रेफर किया गया था। लेकिन किसी कारणवश वह लखनऊ नहीं जा सके। सभी मासूम रोगियों का इलाज चिकित्सकों की देखरेख में हुआ, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
- डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक