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इस बार बाघों के साथ जंगल के हाथियों की होगी गणना
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कतर्नियाघाट संरक्षित वनक्षेत्र में स्थित इको एवेयरनेस सेंटर।
- फोटो : BAHRAICH
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बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में पहली बार बाघ के साथ हाथियों की भी गणना की जाएगी। इसके लिए वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। अक्तूबर व नवंबर माह में वन्यजीव प्रभाग में बाघों की गणना इस बार एम-स्ट्राइप एप के इकोलॉजिकल वर्जन के द्वारा की जाएगी। जंगल में मौजूद बाघ की लोकेशन स्वयं एप द्वारा स्टोर की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक रेंज से दो स्टाफ को लिया गया है।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। जंगल कतर्नियाघाट, मोतीपुर, ककरहा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, सुजौली और धर्मापुर रेंज में विभक्त है। वन प्रभाग में बाघ, तेंदुआ, बारहसिंघा, वनरोज, चीतल और हाथी पाए जाते हैं। प्रत्येक चार वर्ष पर बाघ की गणना होती है। इस बार आयोजित होने वाली बाघ की गणना में जंगल में विचरण करने वाले हाथियों की भी गिनती की जाएगी। प्रभागीय वनाधिकारी आकाशदीप बधावन ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के एम स्ट्राइप ऐप के इकोलॉजिकल वर्जन के प्रयोग की हरी झंडी दे दी गई है। ऐसे में इस बार बाघों की गणना पेपर कार्य पर आधारित नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों की गणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। डीएफओ ने बताया कि इस बार बाघों की गणना में फील्ड स्टाफ सारा डाटा मौके पर एम स्ट्राइप ऐप पर ही भरेगा। साथ ही बाघ की फोटो खींचेगी और बाघ की लोकेशन भी एप द्वारा स्वयं स्टोर कर लिया जाएगा। जिससे इस वनकर्मियों को भी अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही गणना में कोई मानवीय त्रुटि भी नहीं हो सकती है। (संवाद)
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प्रत्येक रेंज से लिए गए दो कर्मी
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि बाघों की गणना के लिए प्रत्येक रेंज से दो कर्मचारियों को लिया गया है। इनमें वन क्षेत्र से एक रेंजर और पूर्व में गणना में शामिल कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर चुना गया है।
कागजी खानापूर्ति से मिलेगी छुट्टी
सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघों की गणना इस बार डिजिटल होगी। जबकि पूर्व में गणना के दौरान तमाम कागजी खानापूर्ति करनी पड़ती थी। अलग-अलग प्रारूप भरकर उच्चाधिकारियों को भेजना पड़ता था। लेकिन इस बार सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघों की गणना के लिए कागजी खानापूर्ति से निजात मिलेगी। सभी कार्य डिजिटल होंगे। -आकाशदीप बधावन, डीएफओ कतर्नियाघाट
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कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। जंगल कतर्नियाघाट, मोतीपुर, ककरहा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, सुजौली और धर्मापुर रेंज में विभक्त है। वन प्रभाग में बाघ, तेंदुआ, बारहसिंघा, वनरोज, चीतल और हाथी पाए जाते हैं। प्रत्येक चार वर्ष पर बाघ की गणना होती है। इस बार आयोजित होने वाली बाघ की गणना में जंगल में विचरण करने वाले हाथियों की भी गिनती की जाएगी। प्रभागीय वनाधिकारी आकाशदीप बधावन ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के एम स्ट्राइप ऐप के इकोलॉजिकल वर्जन के प्रयोग की हरी झंडी दे दी गई है। ऐसे में इस बार बाघों की गणना पेपर कार्य पर आधारित नहीं होगा।
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उन्होंने बताया कि बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों की गणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। डीएफओ ने बताया कि इस बार बाघों की गणना में फील्ड स्टाफ सारा डाटा मौके पर एम स्ट्राइप ऐप पर ही भरेगा। साथ ही बाघ की फोटो खींचेगी और बाघ की लोकेशन भी एप द्वारा स्वयं स्टोर कर लिया जाएगा। जिससे इस वनकर्मियों को भी अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही गणना में कोई मानवीय त्रुटि भी नहीं हो सकती है। (संवाद)
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प्रत्येक रेंज से लिए गए दो कर्मी
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि बाघों की गणना के लिए प्रत्येक रेंज से दो कर्मचारियों को लिया गया है। इनमें वन क्षेत्र से एक रेंजर और पूर्व में गणना में शामिल कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर चुना गया है।
कागजी खानापूर्ति से मिलेगी छुट्टी
सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघों की गणना इस बार डिजिटल होगी। जबकि पूर्व में गणना के दौरान तमाम कागजी खानापूर्ति करनी पड़ती थी। अलग-अलग प्रारूप भरकर उच्चाधिकारियों को भेजना पड़ता था। लेकिन इस बार सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघों की गणना के लिए कागजी खानापूर्ति से निजात मिलेगी। सभी कार्य डिजिटल होंगे। -आकाशदीप बधावन, डीएफओ कतर्नियाघाट