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Bahraich News: चंदे के पैसों से करीब 20 साल में बदल गई लक्कड़ शाह की मजार की तस्वीर

Sun, 01 Jun 2025 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Sun, 01 Jun 2025 12:55 AM IST
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The picture of Lakkad Shah's tomb changed in about 20 years with the donation money
कतर्नियाघाट जंगल के बीच ​स्थित लक्कड़ शाह की दरगाह।
बहराइच। लक्कड़ शाह की मजार वैसे तो पुरानी बताई जा रही है, लेकिन इसका यह स्वरूप विगत 20 वर्ष का है। जहां चंदे की पैसे से मजार का नया स्वरूप तैयार हो गया। यह तब हुआ जब कतर्नियाघाट जंगल को 2008 में बाघ के लिए संरक्षित घोषित कर दिया गया था। अब वन विभाग इस मजार को गिराने की कार्रवाई कर रहा है। इसको लेकर दरगाह प्रबंधन व विभाग आमने-सामने आ गए हैं।
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लक्कड़ शाह के बारे में दावा किया जाता है कि यहां एक सूफी संत 1610 ई. में रहते थे। वह जंगल में भटके लोगों को रास्ता दिखाने का काम करते थे। यह किवदंती अभी तक चली आ रही है। कहा जाता है कि उनके मरने के बाद यहीं पर उन्हें दफना दिया गया था। कई वर्ष तक यहां कुछ भी नहीं हुआ। धीरे-धीरे यहां लोग आने लगे और दो दशक के अंदर एक जमीन के बराबर छोटी से मजार ने विकराल रूप ले लिया। ऐसा नहीं है कि वन विभाग ने मजार के नाम पर जंगल के बीचों बीच हो रहे इस अतिक्रमण को रोकने का प्रयास नहीं किया।
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वन विभाग से सेवानिवृत्त वनकर्मी सुरेंद्र दास बताते हैं कि वह करीब 15 वर्ष पूर्व अपनी सेवा पूरी करके घर आ गए थे। उस समय वहां मिट्टी की एक मजारनुमा चौकी दिखाई पड़ती थी। धार्मिक लोग व वन कर्मी वहां कभी-कभी फूल चढ़ा दिया करते थे, लेकिन बाद में कुछ गांव वाले आने लगे। तब इसे ऊंची कर मजार पर चादर डाल दी गई थी। यह सिलसिला सन् 1975 में उस समय भी जारी रहा जब कतर्नियाघाट को वन्य जीव अभयारण्य बना दिया गया। उस समय सख्ती हुई, लेकिन स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप के कारण वन विभाग कुछ नहीं कर पाया। हद तो तब हो गई जब 2008 में इस जंगल को बाघों के लिए संरक्षित करते हुए कोर जोन बना दिया गया। उस समय भी वन विभाग ने इस मजार को हटाने का प्रयास किया था। उस समय भी राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण मामला ठंडा पड़ गया। इसी के बाद कई बार वन विभाग ने बाघों के लिए संरक्षित इस क्षेत्र से मजार हटाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार राजनीतिक संरक्षण में मजार फलता-फूलता रहा।
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स्थानीय लोगों के अनुसार इस दरगाह का सफर बहुत लंबा नहीं है। यहां 20 वर्ष पूर्व मात्र 10 गुणा 10 का छोटा सा मजार हुआ करता था। चढ़ावे से मिले पैसे से यह बड़े दरगाह में बदल गया।



नोटिस दिया है, जल्द ही मजार को हटाया जाएगा
मजार पूरी तरह से अवैध है। यह कुछ वर्षों के अंदर इस रूप में आया है। दरगाह प्रबंधन द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन को निस्तारित कर दिया है। जल्द ही अंतिम निर्णय आ जाएगा। इसके बाद कोर जोन के अतिक्रमण को हटाया जाएगा। -बी शिवशंकर, डीएफओ कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग
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