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दुष्कर्म के अभियुक्त को सात साल का सश्रम कारावास
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बहराइच। रूपईडीहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 14 वर्षीय मूकबधिर बालिका से गांव के ही एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया था। मामले में बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में बहस के दौरान विशेष न्यायाधीश ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
रूपईडीहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 14 वर्षीय मूकबधिर बालिका के पिता ने गत आठ अक्टूबर 2014 को थाने में तहरीर देकर अपनी पुत्री के साथ गांव के एक ही एक व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। मामले में थाने पर मुकदमा दर्ज न होने पर पीड़ित पिता ने एसपी को पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई थी। एसपी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिये थे।
इस पर एसओ ने मामले में मुकदमा दर्ज कर नामजद अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई की थी। बुधवार को दीवानी न्यायालय के फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अभियुक्त का प्रथम अपराध मानते हुए कम से कम सजा देने की मांग की। इस पर विशेष लोक अभियोजक पाक्सो मुन्नूलाल मिश्र ने अभियुक्त द्वारा घटित की गई घटना को जघन्य अपराध बताते हुए कठोर कारावास की सजा देने की मांग की।
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विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट अमित कुमार पांडेय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अभियुक्त को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 10 हजार रुपये से भी दंडित किया। विशेष लोक अभियोजक पाक्सो मुन्नूलाल मिश्र ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।
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रूपईडीहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 14 वर्षीय मूकबधिर बालिका के पिता ने गत आठ अक्टूबर 2014 को थाने में तहरीर देकर अपनी पुत्री के साथ गांव के एक ही एक व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। मामले में थाने पर मुकदमा दर्ज न होने पर पीड़ित पिता ने एसपी को पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई थी। एसपी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिये थे।
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इस पर एसओ ने मामले में मुकदमा दर्ज कर नामजद अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई की थी। बुधवार को दीवानी न्यायालय के फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अभियुक्त का प्रथम अपराध मानते हुए कम से कम सजा देने की मांग की। इस पर विशेष लोक अभियोजक पाक्सो मुन्नूलाल मिश्र ने अभियुक्त द्वारा घटित की गई घटना को जघन्य अपराध बताते हुए कठोर कारावास की सजा देने की मांग की।
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विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट अमित कुमार पांडेय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अभियुक्त को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 10 हजार रुपये से भी दंडित किया। विशेष लोक अभियोजक पाक्सो मुन्नूलाल मिश्र ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।