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Bahraich News: खतरे के निशान से 88 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची सरयू
Mon, 16 Sep 2024 02:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Mon, 16 Sep 2024 02:40 AM IST
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मिहींपुरवा क्षेत्र में बाढ़ का पानी भरने के बाद डनलप पर बैठी महिला। -संवाद
बहराइच/मिहींपुरवा/शिवपुर। जिले की तीन तहसीलों के 100 से अधिक मजरे व गांव सरयू की भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। घरों व रास्तों में चार से पांच फीट पानी भरा है। बाढ़ से लगभग एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित है। लोग घरों में कैद रहने को विवश हैं। एल्गिन ब्रिज पर सरयू लाल निशान से 88 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
मिहींपुरवा तहसील की सुजौली, जंगल गुलरिहा, बडखडिया, चहलवा, मंझरा व गिरगिट्टी ग्राम पंचायतों में 40 से अधिक मजरों में लगातार तीसरे दिन भी बाढ़ का पानी भरा है। लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भरने से दैनिक उपभोग की वस्तुएं खराब हो रही हैं और रास्तों पर पानी भरने से आवागमन ठप है।
आलम यह है कि सिर्फ नाव ही आवागमन का एक मात्र साधन बची है। बेबस बाढ़ पीड़ित तहसील प्रशासन द्वारा मिलने वाले लंच पैकेट पर आश्रित हैं और तिरपाल लगाकर छतों पर डेरा जमाए हुए हैं। जानवरों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। चारा न मिलने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति बन गई है।
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हालांकि यहां बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घट रहा है। पानी घटने के साथ ही करमोहना व पुरैना रघुनाथपुर के मजरा अस्सीपुरवा में बूढ़ी सरयू ने कटान तेज कर दी है। कटान की दहशत में ग्रामीण खुद अपना आशियाना तोड़ रहे हैं।
एसडीएम मिहीपुरवा संजय कुमार ने मौके पर पहुंचकर कटान पीड़ितों से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बाढ़ में छह ग्राम पंचायतों के लोग फंसे हैं। बाढ़ चौकियों से लगातार लंच पैकेट नाव द्वारा पहुंचाया जा रहा है। नदी घटने लगी है, शीघ्र ही राशन किट बांटी जाएगी। बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
तीन कच्चे घरों को निगल गईं लहरें
नानपारा तहसील में शिवपुर विकासखंड के दो दर्जन गांव सरयू की बाढ़ के चपेट में हैं। शनिवार रात से पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है लेकिन कटान तेज हो गया है। ग्राम पंचायत बौंडी के मजरा दुइजीपुरवा निवासी जगदीश, राम सहारे व बनवारी के कच्चे घर रविवार को कटकर नदी में समाहित हो गए। वहीं ग्रामीणों की कई बीघा भूमि भी नदी में समाहित हो गई। नायब तहसीलदार सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि 16 व्यक्तियों को कृषि भूमि कटान के एवज में 1,17,290 रुपये दिए गए हैं। इनमें बृजेश, रमेश, नानकुन, मीरा देवी, ओमकार व जगदेई आदि शामिल हैं। इसके साथ ही बौंडी में 200 से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए। इस दौरान लेखपाल प्रदीप कुमार व पंकज, शुभम आदि मौजूद रहे।
महसी में और गहराया संकट, 40 मजरे चपेट में
तहसील क्षेत्र महसी में शनिवार रात बाढ़ का संकट और गहरा गया। बैराजों से पानी छोड़े जाने के चलते 40 से अधिक मजरे बाढ़ की चपेट में आ गए। क्षेत्र में भेड़िया प्रभावित सिसैया चूड़ामणि, पचदेवरी, चुरईपुरवा, रामदीनपुरवा, टिकुरी, पिपरा, पिपरी, कायमपुर, टेपरा, जोगापुरवा, मथुरा पुरवा, प्रहलाद पुरवा, रानी बाग, कुट्टी बाग, तारापुरवा व छतरपुरवा समेत 40 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुसा है। ग्रामीण छतों व पड़ोसियों के घर पर गुजर-बसर कर रहे हैं।
कैसरगंज में भी बाढ़ की आशंका प्रबल
तहसील क्षेत्र कैसरगंज में जरवलरोड स्थित एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे कैसरगंज में भी बाढ़ की आशंका प्रबल हो गई है। इसके साथ ही अयोध्या में सरयू के तांडव मचाने की बात कही जा रही है। रविवार को एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 मीटर के सापेक्ष 106.95 मीटर दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान से 88 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से निचले इलाके के ग्रामीणों की धुकधुकी बढ़ी रही। जल मापक विवेक सिंह ने बताया कि दोपहर से जलस्तर स्थिर हुआ है।
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मिहींपुरवा तहसील की सुजौली, जंगल गुलरिहा, बडखडिया, चहलवा, मंझरा व गिरगिट्टी ग्राम पंचायतों में 40 से अधिक मजरों में लगातार तीसरे दिन भी बाढ़ का पानी भरा है। लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भरने से दैनिक उपभोग की वस्तुएं खराब हो रही हैं और रास्तों पर पानी भरने से आवागमन ठप है।
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आलम यह है कि सिर्फ नाव ही आवागमन का एक मात्र साधन बची है। बेबस बाढ़ पीड़ित तहसील प्रशासन द्वारा मिलने वाले लंच पैकेट पर आश्रित हैं और तिरपाल लगाकर छतों पर डेरा जमाए हुए हैं। जानवरों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। चारा न मिलने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति बन गई है।
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हालांकि यहां बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घट रहा है। पानी घटने के साथ ही करमोहना व पुरैना रघुनाथपुर के मजरा अस्सीपुरवा में बूढ़ी सरयू ने कटान तेज कर दी है। कटान की दहशत में ग्रामीण खुद अपना आशियाना तोड़ रहे हैं।
एसडीएम मिहीपुरवा संजय कुमार ने मौके पर पहुंचकर कटान पीड़ितों से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बाढ़ में छह ग्राम पंचायतों के लोग फंसे हैं। बाढ़ चौकियों से लगातार लंच पैकेट नाव द्वारा पहुंचाया जा रहा है। नदी घटने लगी है, शीघ्र ही राशन किट बांटी जाएगी। बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
तीन कच्चे घरों को निगल गईं लहरें
नानपारा तहसील में शिवपुर विकासखंड के दो दर्जन गांव सरयू की बाढ़ के चपेट में हैं। शनिवार रात से पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है लेकिन कटान तेज हो गया है। ग्राम पंचायत बौंडी के मजरा दुइजीपुरवा निवासी जगदीश, राम सहारे व बनवारी के कच्चे घर रविवार को कटकर नदी में समाहित हो गए। वहीं ग्रामीणों की कई बीघा भूमि भी नदी में समाहित हो गई। नायब तहसीलदार सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि 16 व्यक्तियों को कृषि भूमि कटान के एवज में 1,17,290 रुपये दिए गए हैं। इनमें बृजेश, रमेश, नानकुन, मीरा देवी, ओमकार व जगदेई आदि शामिल हैं। इसके साथ ही बौंडी में 200 से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए। इस दौरान लेखपाल प्रदीप कुमार व पंकज, शुभम आदि मौजूद रहे।
महसी में और गहराया संकट, 40 मजरे चपेट में
तहसील क्षेत्र महसी में शनिवार रात बाढ़ का संकट और गहरा गया। बैराजों से पानी छोड़े जाने के चलते 40 से अधिक मजरे बाढ़ की चपेट में आ गए। क्षेत्र में भेड़िया प्रभावित सिसैया चूड़ामणि, पचदेवरी, चुरईपुरवा, रामदीनपुरवा, टिकुरी, पिपरा, पिपरी, कायमपुर, टेपरा, जोगापुरवा, मथुरा पुरवा, प्रहलाद पुरवा, रानी बाग, कुट्टी बाग, तारापुरवा व छतरपुरवा समेत 40 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुसा है। ग्रामीण छतों व पड़ोसियों के घर पर गुजर-बसर कर रहे हैं।
कैसरगंज में भी बाढ़ की आशंका प्रबल
तहसील क्षेत्र कैसरगंज में जरवलरोड स्थित एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे कैसरगंज में भी बाढ़ की आशंका प्रबल हो गई है। इसके साथ ही अयोध्या में सरयू के तांडव मचाने की बात कही जा रही है। रविवार को एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 मीटर के सापेक्ष 106.95 मीटर दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान से 88 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से निचले इलाके के ग्रामीणों की धुकधुकी बढ़ी रही। जल मापक विवेक सिंह ने बताया कि दोपहर से जलस्तर स्थिर हुआ है।