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सकट पर्व आज, महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत
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बहराइच नगर में रविवार को सकट पूजा के लिए शकरकंद की खरीददारी करते लोग।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। सकट चतुर्थी का पर्व आज मनाया जाएगा। इसके लिए घरों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। वहीं, सकट के पर्व को लेकर रविवार को बाजार में तिल, गंजी और पूजन सामग्री की लोगों ने खूब खरीददारी की। अब इंतजार रात के समय चंद्रमा के निकलने का होगा। मां अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना के साथ निर्जला व्रत रखकर पूजन-अर्चन करेंगी।
सकट चतुर्थी का पर्व सोमवार को जिले में परंपरागत तरीके से मनाया जाएगा। सकट के पर्व को देखते हुए घरों में पूजन-अर्चन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिसको लेकर बाजार में भी रौनक दिखाई दी। पूजन के लिए गंजी के साथ ही तिल, गुड़ और लाई समेत अन्य सामानों की खरीददारी की गई। महिलाएं अपने लिए कपड़े खरीदते हुए भी देखी गईं। पूजन-अर्चन के लिए शहर के छोटी बाजार तिराहा, पानी टंकी तिराहा, घंटाघर चौक, पीपल तिराहा, छावनी बाजार आदि इलाकों में लड्डुओं के साथ ही अन्य सामान की बिक्री तेज रही।
पूजन के लिए घरों में वेदी बनाने का काम भी महिलाओं की ओर से किया गया। इसके साथ ही चावल के आटे से बनने वाले पकवान को लेकर भी तैयारियां की जाती रहीं। वहीं बहनों के घर मायके से भाई चावल, तिल आदि सामान लेकर भी पहुंचे। पंडित नारायण शरण दीक्षित ने बताया कि सकट पूजा के लिए रात 8.05 बजे चंद्रोदय का मुहूर्त है। चांद दिखते ही पूजा-अर्चना शुरू कर दी जाएगी।
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सकट चतुर्थी का पर्व सोमवार को जिले में परंपरागत तरीके से मनाया जाएगा। सकट के पर्व को देखते हुए घरों में पूजन-अर्चन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिसको लेकर बाजार में भी रौनक दिखाई दी। पूजन के लिए गंजी के साथ ही तिल, गुड़ और लाई समेत अन्य सामानों की खरीददारी की गई। महिलाएं अपने लिए कपड़े खरीदते हुए भी देखी गईं। पूजन-अर्चन के लिए शहर के छोटी बाजार तिराहा, पानी टंकी तिराहा, घंटाघर चौक, पीपल तिराहा, छावनी बाजार आदि इलाकों में लड्डुओं के साथ ही अन्य सामान की बिक्री तेज रही।
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पूजन के लिए घरों में वेदी बनाने का काम भी महिलाओं की ओर से किया गया। इसके साथ ही चावल के आटे से बनने वाले पकवान को लेकर भी तैयारियां की जाती रहीं। वहीं बहनों के घर मायके से भाई चावल, तिल आदि सामान लेकर भी पहुंचे। पंडित नारायण शरण दीक्षित ने बताया कि सकट पूजा के लिए रात 8.05 बजे चंद्रोदय का मुहूर्त है। चांद दिखते ही पूजा-अर्चना शुरू कर दी जाएगी।
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