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Bahraich News: चूहों ने बाढ़ सुरक्षा के दावों में की सेंधमारी
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महसी में बेलहा बेहरौली तटबंध पर सिकंदरपुर के निकट बीचों-बीच बना रैटहोल।
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महसी। मानसून की दस्तक के साथ ही जिले के सबसे महत्वपूर्ण बेलहा-बेहरौली तटबंध की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। महसी क्षेत्र में किए गए रियलिटी चेक में महज दो किलोमीटर के हिस्से में सात स्थानों पर रैट होल और रेन कट मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ के दौरान यही स्थान तटबंध में रिसाव और कटान की वजह बन सकते हैं।
बाढ़ सुरक्षा को लेकर बाढ़ खंड विभाग व प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। महसी तहसील के सिकंदरपुर से बेलहौरा गांव के बीच दो किलोमीटर हिस्से में बेलहा-बेहरौली तटबंध में कई स्थानों पर रैट होल, रेन कट और मिट्टी धंसने जैसी गंभीर खामियां नजर आ रही हैं। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब मानसून सक्रिय हो चुका है और सरयू नदी का जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है।
रियलिटी चेक के दौरान तटबंध के दो किमी के हिस्से में सात स्थानों पर रैट होल और रेन कट मिले। बाढ़ विशेषज्ञ सेवानिवृत्त अभियंता एएन वर्मा का कहना है कि यदि पूरे 95.3 किलोमीटर लंबे तटबंध का तकनीकी सर्वे कराया जाए तो ऐसे स्थानों की संख्या डेढ़ सौ से अधिक हो सकती है। बाढ़ के दौरान रैट होल से तटबंध के भीतर पानी का रिसाव शुरू होने और रेन कट वाले स्थानों पर तेज कटान की आशंका रहती है, जिससे तटबंध की मजबूती प्रभावित हो सकती है।
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नानपारा के बेलहा गांव से कैसरगंज के बेहरौली गांव तक फैले इस तटबंध का वर्ष 2022 में लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से 25 से 64 किलोमीटर हिस्से का सुदृढ़ीकरण कराया गया था। महसी, नानपारा और कैसरगंज क्षेत्र के 400 से अधिक गांवों तथा लाखों लोगों को बाढ़ से बचाने का हवाला भी दिया गया था। हालांकि चार वर्ष के भीतर तटबंध पर रैट होल और रेन कट मिलना निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
नदी का दबाव बढ़ने पर तटबंध के लिए हो सकता है खतरा
सिकंदरपुर निवासी अनादि कुमार शुक्ला ने कहा, हर वर्ष मरम्मत के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में तटबंध की हकीकत सामने आ जाती है। बेलहौरा निवासी मुन्ना निषाद का कहना है कि छोटे-छोटे रैट होल और रेन कट ही तटबंध के अचानक कटने का कारण बनता है। किसानगंज निवासी राजेश कहते हैं कि बाढ़ आने पर सबसे पहले इसी तटबंध पर पानी का दबाव पड़ता है। इसलिए मानसून के बीच नहीं, बल्कि उससे पहले ही इसकी पूरी मरम्मत हो जानी चाहिए। अब भगवान का ही भरोसा है।
क्या हैं रैट होल और रेन कट
रैट होल वे सुरंगनुमा छेद होते हैं, जो चूहों या अन्य बिल बनाने वाले जीवों के कारण तटबंध के भीतर बन जाते हैं। बाढ़ के दौरान इन छेदों से पानी का रिसाव होने और तटबंध कमजोर पड़ने का खतरा रहता है। वहीं रेन कट लगातार बारिश के पानी के बहाव से तटबंध की सतह पर होने वाला कटाव है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई जाए तो यह धीरे-धीरे बड़ा होकर तटबंध की संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है।
7 जुलाई तक पूरी करें मरम्मत, फिर होगी जांच : एसडीएम
उप जिलाधिकारी प्रकाश सिंह ने बताया कि बेलहा-बेहरौली तटबंध पर सामने आई खामियों को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में बाढ़ खंड के अभियंताओं को तलब कर उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि 7 जुलाई तक तटबंध पर मरम्मत, रैट होल बंद करने और रेन कट दुरुस्त करने का कार्य हर हाल में पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद तटबंध का दोबारा निरीक्षण कराया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की खामी या लापरवाही मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बाढ़ सुरक्षा को लेकर बाढ़ खंड विभाग व प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। महसी तहसील के सिकंदरपुर से बेलहौरा गांव के बीच दो किलोमीटर हिस्से में बेलहा-बेहरौली तटबंध में कई स्थानों पर रैट होल, रेन कट और मिट्टी धंसने जैसी गंभीर खामियां नजर आ रही हैं। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब मानसून सक्रिय हो चुका है और सरयू नदी का जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है।
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रियलिटी चेक के दौरान तटबंध के दो किमी के हिस्से में सात स्थानों पर रैट होल और रेन कट मिले। बाढ़ विशेषज्ञ सेवानिवृत्त अभियंता एएन वर्मा का कहना है कि यदि पूरे 95.3 किलोमीटर लंबे तटबंध का तकनीकी सर्वे कराया जाए तो ऐसे स्थानों की संख्या डेढ़ सौ से अधिक हो सकती है। बाढ़ के दौरान रैट होल से तटबंध के भीतर पानी का रिसाव शुरू होने और रेन कट वाले स्थानों पर तेज कटान की आशंका रहती है, जिससे तटबंध की मजबूती प्रभावित हो सकती है।
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नानपारा के बेलहा गांव से कैसरगंज के बेहरौली गांव तक फैले इस तटबंध का वर्ष 2022 में लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से 25 से 64 किलोमीटर हिस्से का सुदृढ़ीकरण कराया गया था। महसी, नानपारा और कैसरगंज क्षेत्र के 400 से अधिक गांवों तथा लाखों लोगों को बाढ़ से बचाने का हवाला भी दिया गया था। हालांकि चार वर्ष के भीतर तटबंध पर रैट होल और रेन कट मिलना निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
नदी का दबाव बढ़ने पर तटबंध के लिए हो सकता है खतरा
सिकंदरपुर निवासी अनादि कुमार शुक्ला ने कहा, हर वर्ष मरम्मत के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में तटबंध की हकीकत सामने आ जाती है। बेलहौरा निवासी मुन्ना निषाद का कहना है कि छोटे-छोटे रैट होल और रेन कट ही तटबंध के अचानक कटने का कारण बनता है। किसानगंज निवासी राजेश कहते हैं कि बाढ़ आने पर सबसे पहले इसी तटबंध पर पानी का दबाव पड़ता है। इसलिए मानसून के बीच नहीं, बल्कि उससे पहले ही इसकी पूरी मरम्मत हो जानी चाहिए। अब भगवान का ही भरोसा है।
क्या हैं रैट होल और रेन कट
रैट होल वे सुरंगनुमा छेद होते हैं, जो चूहों या अन्य बिल बनाने वाले जीवों के कारण तटबंध के भीतर बन जाते हैं। बाढ़ के दौरान इन छेदों से पानी का रिसाव होने और तटबंध कमजोर पड़ने का खतरा रहता है। वहीं रेन कट लगातार बारिश के पानी के बहाव से तटबंध की सतह पर होने वाला कटाव है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई जाए तो यह धीरे-धीरे बड़ा होकर तटबंध की संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है।
7 जुलाई तक पूरी करें मरम्मत, फिर होगी जांच : एसडीएम
उप जिलाधिकारी प्रकाश सिंह ने बताया कि बेलहा-बेहरौली तटबंध पर सामने आई खामियों को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में बाढ़ खंड के अभियंताओं को तलब कर उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि 7 जुलाई तक तटबंध पर मरम्मत, रैट होल बंद करने और रेन कट दुरुस्त करने का कार्य हर हाल में पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद तटबंध का दोबारा निरीक्षण कराया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की खामी या लापरवाही मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।