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पहाड़ों पर बारिश से बढ़ी राप्ती
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 26 Jun 2015 10:27 PM IST
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मानसून की बरसात शुक्रवार को भी रुक रुक कर जारी रही। इससे जहां किसानों की मनचाही मुराद पूरी हो रही है। वहीं, कीचड़ व जलभराव के कारण लोगों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। नेपाल सहित पहाड़ों पर हो रही बरसात के कारण राप्ती का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। इससे कछार में बसे गांव के लोगों की धड़कनें तेज हो रही हैं।
तराई में मानसून की पहली बरसात शुक्रवार दूसरे दिन भी रुक रुक कर जारी रही। इससे सिर्फ खेत खलिहान ही नहीं नगर व गांव के मार्गों पर भी जलभराव हो गया है। जगह जगह कीचड़ व जलभराव से लोगों का चलना मुहाल है। वहीं बरसात ने मौसम के मिजाज में नरमी लाकर लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली है।
अपेक्षित बरसात होने के कारण किसानों ने भी अपने खेतों में धान की नर्सरी डालना शुरू कर दिया है। इससे धान की बीज की दुकानों में किसानों की भारी भीड़ दिखाई देने लगी है। किसान जल्द से जल्द खेतों में एकत्र पानी का सदुपयोग कर धान की नर्सरी डालने को बेताब देखा जा रहा है।
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वहीं दो दिनों से नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात से राप्ती का जलस्तर भी बढ़ रहा है। शुक्रवार को जमुनहा स्थित राप्ती बैराज पर सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 128.590 मीटर नापा गया। जो दोपहर बाद काफी तेजी से घटा।
कहीं कहर न बरपा दे राप्ती
जमुनहा तहसील प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक सुबह से बढ़ रही राप्ती नदी का जलस्तर दोपहर बाद से घट रहा है। यदि इसी तरह बरसात हुई तो नदी के जलस्तर में वृद्धि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे स्थिति में यदि राप्ती ने अपना रौद्र रूप धारण किया तो गत वर्ष की विभीषिका में क्षतिग्रस्त हुए बांध व मार्गों की मरम्मत न होने से इस वर्ष भी न सिर्फ मुख्यालय भिनगा एक बार पुन: टापू बनेगा बल्कि भिनगा का संपर्क अन्य जिलों से टूटने के साथ ही मुख्यालय पर भी बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
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तराई में मानसून की पहली बरसात शुक्रवार दूसरे दिन भी रुक रुक कर जारी रही। इससे सिर्फ खेत खलिहान ही नहीं नगर व गांव के मार्गों पर भी जलभराव हो गया है। जगह जगह कीचड़ व जलभराव से लोगों का चलना मुहाल है। वहीं बरसात ने मौसम के मिजाज में नरमी लाकर लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली है।
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अपेक्षित बरसात होने के कारण किसानों ने भी अपने खेतों में धान की नर्सरी डालना शुरू कर दिया है। इससे धान की बीज की दुकानों में किसानों की भारी भीड़ दिखाई देने लगी है। किसान जल्द से जल्द खेतों में एकत्र पानी का सदुपयोग कर धान की नर्सरी डालने को बेताब देखा जा रहा है।
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वहीं दो दिनों से नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात से राप्ती का जलस्तर भी बढ़ रहा है। शुक्रवार को जमुनहा स्थित राप्ती बैराज पर सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 128.590 मीटर नापा गया। जो दोपहर बाद काफी तेजी से घटा।
कहीं कहर न बरपा दे राप्ती
जमुनहा तहसील प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक सुबह से बढ़ रही राप्ती नदी का जलस्तर दोपहर बाद से घट रहा है। यदि इसी तरह बरसात हुई तो नदी के जलस्तर में वृद्धि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे स्थिति में यदि राप्ती ने अपना रौद्र रूप धारण किया तो गत वर्ष की विभीषिका में क्षतिग्रस्त हुए बांध व मार्गों की मरम्मत न होने से इस वर्ष भी न सिर्फ मुख्यालय भिनगा एक बार पुन: टापू बनेगा बल्कि भिनगा का संपर्क अन्य जिलों से टूटने के साथ ही मुख्यालय पर भी बाढ़ की स्थिति बन सकती है।