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अध्यक्ष छह लाख व नगर पंचायत अध्यक्ष डेढ़ लाख तक कर सकेंगे खर्च
बहराइच
Updated Tue, 31 Oct 2017 10:25 PM IST
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निकाय चुनाव में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए नामांकन में जमानत धनराशि से लेकर चुनाव खर्च की जानकारी प्रशासन ने दी है। नगरपालिका के अध्यक्ष प्रत्याशी छह लाख और सदस्य डेढ़ लाख तक खर्च कर सकेंगे। तो वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी और नगर पंचायत के अध्यक्ष के प्रत्याशी डेढ़ लाख व सदस्य तीस हजार रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत अध्यक्ष व सदस्य पद के लिए उम्मीदवार सम्बन्धित नगर निकाय का निर्वाचक हो तथा अध्यक्ष पद के लिए 30 वर्ष की आयु तथा सदस्य पद के लिए 21 वर्ष की आयु पूरी करता हो। साथ ही एक उम्मीदवार दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से सदस्य या पार्षद पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता है।
उन्होंने निर्वाचन लड़ने के लिए उम्मीदवारी के लिए अनर्हताओं की जानकारी देते हुए बताया कि वह अनुन्मोचित दिवालिया हो, वह नगर निकाय या उसके नियंत्रण में कोई लाभ का पद धारण करता हो, वह राज्य सरकार, केंद्रीय सरकार, स्थानीय प्राधिकारी की सेवा में हो अथवा जिला सरकारी काउंसिल, अपर या सहायक जिला सरकारी काउंसिल, अवैतनिक मजिस्ट्रेट, अवैतनिक मुंसिफ व अवैतनिक सहायक कलेक्टर हो, वह किसी प्राधिकारी के आदेश द्वारा विधि व्यवसायी के रूप में कार्य करने से विवर्जित किया गया हो, वह किसी स्थानीय प्राधिकारी का पदच्युत सेवक हो और जिसे पुन: सेवायोजन के लिए विवर्जित किया गया हो, भारत सरकार व राज्य सरकार के अधीन ग्रहण किये गये किसी पद से भ्रष्टाचार अथवा राजद्रोह के कारण पदच्युत हुआ हो और पदच्युत होने के तिथि से 06 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो, उसे किसी न्यायालय द्वारा इन अधिनियमों में उल्लिखित किसी अपराध के लिए दोषी पाया गया हो या सदाचार बनाये रखने के लिए पाबंद किया गया हो और 05 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो, उ.प्र. नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 16 के अन्तर्गत महापौर पद से हटाया गया हो अथवा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 40 (3) के अन्तर्गत सदस्य पद से हटाया गया हो और हटाये जाने के तिथि से 05 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो अथवा धारा 48(2) के खण्ड (क) या (ख)(अप),(अपप) या (अपपप) के अन्तर्गत अध्यक्ष पद से हटाये गये जाने की दशा में अपने हटाये जाने के तिथि से 05 वर्ष की अवधि तक अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पुननिर्वाचन का पात्र नहीं होगा। वह नगर निकाय को देय किसी कर का 01 वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार हो तथा वह उ.प्र. नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 80 तथा 83 के अधीन उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 27 व 41 के अधीन अनर्ह हो।
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उप जिला निर्वाचन अधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत अध्यक्ष व सदस्य पद के लिए उम्मीदवार सम्बन्धित नगर निकाय का निर्वाचक हो तथा अध्यक्ष पद के लिए 30 वर्ष की आयु तथा सदस्य पद के लिए 21 वर्ष की आयु पूरी करता हो। साथ ही एक उम्मीदवार दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से सदस्य या पार्षद पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता है।
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उन्होंने निर्वाचन लड़ने के लिए उम्मीदवारी के लिए अनर्हताओं की जानकारी देते हुए बताया कि वह अनुन्मोचित दिवालिया हो, वह नगर निकाय या उसके नियंत्रण में कोई लाभ का पद धारण करता हो, वह राज्य सरकार, केंद्रीय सरकार, स्थानीय प्राधिकारी की सेवा में हो अथवा जिला सरकारी काउंसिल, अपर या सहायक जिला सरकारी काउंसिल, अवैतनिक मजिस्ट्रेट, अवैतनिक मुंसिफ व अवैतनिक सहायक कलेक्टर हो, वह किसी प्राधिकारी के आदेश द्वारा विधि व्यवसायी के रूप में कार्य करने से विवर्जित किया गया हो, वह किसी स्थानीय प्राधिकारी का पदच्युत सेवक हो और जिसे पुन: सेवायोजन के लिए विवर्जित किया गया हो, भारत सरकार व राज्य सरकार के अधीन ग्रहण किये गये किसी पद से भ्रष्टाचार अथवा राजद्रोह के कारण पदच्युत हुआ हो और पदच्युत होने के तिथि से 06 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो, उसे किसी न्यायालय द्वारा इन अधिनियमों में उल्लिखित किसी अपराध के लिए दोषी पाया गया हो या सदाचार बनाये रखने के लिए पाबंद किया गया हो और 05 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो, उ.प्र. नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 16 के अन्तर्गत महापौर पद से हटाया गया हो अथवा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 40 (3) के अन्तर्गत सदस्य पद से हटाया गया हो और हटाये जाने के तिथि से 05 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो अथवा धारा 48(2) के खण्ड (क) या (ख)(अप),(अपप) या (अपपप) के अन्तर्गत अध्यक्ष पद से हटाये गये जाने की दशा में अपने हटाये जाने के तिथि से 05 वर्ष की अवधि तक अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पुननिर्वाचन का पात्र नहीं होगा। वह नगर निकाय को देय किसी कर का 01 वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार हो तथा वह उ.प्र. नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 80 तथा 83 के अधीन उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 27 व 41 के अधीन अनर्ह हो।
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