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आलू और सरसों की खेती पर संकट
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:23 PM IST
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तराई में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। शनिवार से हो रही बूंदाबांदी के बीच रात में बौछारें पड़ीं। रविवार को भी दिनभर बादल छाए रहे। ऐसे में खेत में तैयार आलू की फसल के सड़ने की आशंका बढ़ गई है। वहीं, सरसों की उत्पादकता पर माहू रोग भारी पड़ सकता है।
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बदली का क्रम अगर तीन, चार दिन जारी रहा तो सब्जियों की फसलें भी रोग की चपेट में आ जाएंगी। ये सोचकर किसान परेशान हैं। मौसम बिगड़ने से तापमान में गिरावट दर्ज हुई है। लोग सिहरने को मजबूर हैं। तराई में मौसम रह-रह कर करवट ले रहा है। दो दिन पूर्व गर्मी का एहसास हो रहा था।
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लेकिन शनिवार को अचानक मौसम का रुख बदल गया। पूरे दिन रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। रात 10 बजे के आसपास तेज वर्षा हुई। र्षा का यह क्रम महज आधे घंटे ही चला। फिर बूंदाबांदी भोर तक जारी रही। सुबह लग रहा था कि मौसम साफ होगा। लेकिन तेज पुरवा हवाओं के बीच फिर बादल घिर आए। इससे तापमान में गिरावट दर्ज हुई।
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लोग सिहरने को मजबूर रहे। पूरे दिन सूरज नहीं निकला। मौसम के मिजाज को देखकर किसान चिंतित हो उठे। खेत में खड़ी तिलहनी, दलहनी और सब्जी की फसल पर बदले मौसम से संकट दिख रहा है। सबसे अधिक नुकसान खेत में तैयार आलू की फसल को हो सकता है।
सब्जियों में मटर, बैगन, गोभी की फसल भी रोगग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई हैं। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि फिलहाल अब तक जो वर्षा हुई है, उससे कोई विशेष नुकसान नहीं होगा। लेकिन अगर फिर वर्षा हुई और तीन-चार दिन बादल छाये रहे तो फसलों के रोगग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाएगी। इसका असर उत्पादकता पर पड़ेगा।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से हो रही दिक्कत
तराई में बदला मौसम का मिजाज कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का परिणाम है। प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण आगामी चार दिन तक मौसम में उतार चढ़ाव देखने को मिलेगा। जो संकेत मिल रहे हैं, उसके अनुसार कुछ हिस्सों में धूप निकलेगी। जबकि कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी हो सकती है।
फसलों के बोआई (हेक्टेयर में)
आलू- 2250
गेहूं- 19050
अरहर- 9706
सरसो- 1500
मटर- 406
उड़द/मूंग- 1756
फसल तैयार होने पर ही मौसम देता है दगा
अचानक बिगड़े मौसम के मिजाज से परेशान किसान किस्मत को कोस रहे हैं। फखरपुर निवासी राजू का कहना है कि बीते तीन साल देख रहे हैं कि फसल के तैयार होने पर ही मौसम गड़बड़ होता है। किसान गुड्डू और सहजाद का कहना है कि अगर मौसम इसी तरह तीन-चार दिन और रहा तो सरसों के पौध में माहू रोग लग जाएंगे, जिससे पूरी फसल चौपट हो जाएगी। आलू भी फफूंद की चपेट में आ जाएगा। ऐसे में उसे सुरक्षित नहीं रख मिलेगा।
खेतों में है 60 फीसदी आलू
उद्यान विभाग के निरीक्षक आरके वर्मा ने बताया कि लगभग 40 फीसदी आलू के फसल की खोदाई हो चुकी है। लेकिन अभी 60 फीसदी आलू खेतों में है। मौसम गड़बड़ होने से खेत की मिट्टी में दबे आलू में फफूंद लगने की संभावना बढ़ेगी। इसके बाद सड़न पैदा हो जाएगी। ऐसे में मौसम दुरुस्त होते ही किसान तत्काल आलू की खोदाई कर लें। उन्होंने कहा कि मटर व अन्य सब्जी की फसलों की भी निरंतर देखभाल करते रहें। जरूरत हो तो नमी रोधक दवा का प्रयोग करें।