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दीवानी न्यायालय में काव्य गोष्ठी
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बहराइच। दीवानी न्यायालय के सभागार मेें अखिल भारतीय हिंदी विधि प्रतिष्ठान की ओर से चल रहे हिंदी सप्ताह कार्यक्रम के तहत रविवार को विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मौके पर कवियों व साहित्यकारों ने रचनाएं सुनाई। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि दिवाकर मिश्रा दिवाकर ने की, जबकि मुख्य अतिथि रहे अपर जनपद न्यायाधीश प्रथम राकेश कुमार ने मां वीणा पाणी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। कवि रामसूरत वर्मा जलज ने हथवा से मथवा तू सवांर दे माई रचना सुनाई, एसएम जैदी ने पढ़ा क्यों न हर दिल मेें बने आज मकाने हिंदी, है मोहब्बत का फसाना ये जुबाने हिंदी।
कवि राधाकृष्ण शुक्ल पथिक ने कुछ इतने चिकने घने अंधेरे की चांदनी भी फिसल रही है। कवि आशुतोष श्रीवास्तव ने राजनीति की दुरभि संधियां मिट्टी में मिल जाएंगी, आक्सफोर्ड कैंब्रिज डिक्शनरी हिंदी मेें हो जाएगी रचना सुनाई। आजमगढ़ के कवि भालचंद्र त्रिपाठी ने काम रावन का है तो कीजै खुशी से, राम का चेहरा लगाना ठीक है क्या सुनाया, युवा कवि महेश्वर बख्श ने चीनी, अरबी, फ्रेंच, कोरियन या खुद को जापानी लिखना, मेरी भाषा हिंदी लिखना मुझको हिंदुस्तानी लिखना से तालियां पाई। अधिवक्ता किशोरी लाल चौधरी ने नारी को मां बहना करकर देवी जैसा मान दिया, डॉ.मुबारक अली बहराइची ने हर जुबां की जुबान हिंदी है, सारा हिेंदुस्तान हिंदी है, हास्य कवि पीके प्रचंड ने आया माह सितंबर का तब याद तुम्हारी आई हिंदी.. रचना सुनाई।
कवि पंडित दिवाकर मिश्रा, अधिवक्ता व कवि अनूप श्रीवास्तव, कवियत्री रंजीता देवी, कवि पंडित रामतेज शास्त्री, लक्ष्मीकांत त्रिपाठी मृदुल, राघवेंद्र त्रिपाठी, तिलकराम अजनबी, शासकीय अधिवक्ता सुनील जायसवाल ने भी रचनाएं सुनाई। संस्थान के अध्यक्ष पंडित रामछबीले शुक्ला ने सभी कवियों, व्यवस्थापकों व न्यायिक अधिकारियों के प्रति आभार जताया। मौके पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राम नारायण मिश्र, महामंत्री प्रमोद श्रीवास्तव आजाद, प्रतिष्ठान की सचिव शिखा यादव, गया प्रसाद मिश्रा, देवेंद्र पांडेय, विष्णु सहाय श्रीवास्तव, पूर्व विधायक रामसागर राव, ओमकार सिंह, विजय कुमार पाठक, परमानंद पांडेय, रामनिवास तिवारी, रामजी बाजपेई आदि मौजूद रहे।
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कवि राधाकृष्ण शुक्ल पथिक ने कुछ इतने चिकने घने अंधेरे की चांदनी भी फिसल रही है। कवि आशुतोष श्रीवास्तव ने राजनीति की दुरभि संधियां मिट्टी में मिल जाएंगी, आक्सफोर्ड कैंब्रिज डिक्शनरी हिंदी मेें हो जाएगी रचना सुनाई। आजमगढ़ के कवि भालचंद्र त्रिपाठी ने काम रावन का है तो कीजै खुशी से, राम का चेहरा लगाना ठीक है क्या सुनाया, युवा कवि महेश्वर बख्श ने चीनी, अरबी, फ्रेंच, कोरियन या खुद को जापानी लिखना, मेरी भाषा हिंदी लिखना मुझको हिंदुस्तानी लिखना से तालियां पाई। अधिवक्ता किशोरी लाल चौधरी ने नारी को मां बहना करकर देवी जैसा मान दिया, डॉ.मुबारक अली बहराइची ने हर जुबां की जुबान हिंदी है, सारा हिेंदुस्तान हिंदी है, हास्य कवि पीके प्रचंड ने आया माह सितंबर का तब याद तुम्हारी आई हिंदी.. रचना सुनाई।
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कवि पंडित दिवाकर मिश्रा, अधिवक्ता व कवि अनूप श्रीवास्तव, कवियत्री रंजीता देवी, कवि पंडित रामतेज शास्त्री, लक्ष्मीकांत त्रिपाठी मृदुल, राघवेंद्र त्रिपाठी, तिलकराम अजनबी, शासकीय अधिवक्ता सुनील जायसवाल ने भी रचनाएं सुनाई। संस्थान के अध्यक्ष पंडित रामछबीले शुक्ला ने सभी कवियों, व्यवस्थापकों व न्यायिक अधिकारियों के प्रति आभार जताया। मौके पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राम नारायण मिश्र, महामंत्री प्रमोद श्रीवास्तव आजाद, प्रतिष्ठान की सचिव शिखा यादव, गया प्रसाद मिश्रा, देवेंद्र पांडेय, विष्णु सहाय श्रीवास्तव, पूर्व विधायक रामसागर राव, ओमकार सिंह, विजय कुमार पाठक, परमानंद पांडेय, रामनिवास तिवारी, रामजी बाजपेई आदि मौजूद रहे।
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