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Bahraich News: कुपोषित बच्चों के लिए उम्मीद है पोषण पुनर्वास केंद्र
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मेडिकल कॉलेज के पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती बच्चे।
बहराइच। जिले के बच्चों में कुपोषण की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। शेाध में पता चला कि कुपोषण सिर्फ कमजोरी नहीं बल्कि बच्चों के शरीर, दिमाग और भविष्य को प्रभावित करने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। कई परिवार इसे बीमारी या खतरे की स्थिति नहीं समझते और सोचते हैं कि बच्चा समय के साथ अपने-आप ठीक हो जाएगा। यही सोच कई बार बच्चों को अति कुपोषण की ओर धकेल देती है।
जिला स्वास्थ्य सूचना अधिकारी (डीएचआईओ) बृजेश सिंह के अनुसार इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार पोषण कार्यक्रमों के साथ-साथ अति कुपोषित बच्चों के इलाज हेतु जिला अस्पताल में 10 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित कर रही है। हालांकि, सामाजिक झिझक और परिवारों की असहमति के कारण कई जरूरतमंद बच्चे समय पर एनआरसी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर तक 2,298 बच्चों की स्क्रीनिंग में 844 बच्चे कुपोषित पाए गए। इनमें 821 स्थानीय स्तर पर इलाज योग्य थे, लेकिन केवल 570 ने उपचार लिया। वहीं, 23 अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी रेफर किया गया, जिनमें से सिर्फ 9 ही वहां पहुंच सके। ये आंकड़े बताते हैं कि चुनौती इलाज की सुविधा नहीं बल्कि बच्चों को इलाज तक पहुंचाना है।
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सीएमओ डॉ. संजय कुमार कहते हैं कि कुपोषण का समाधान सिर्फ अस्पतालों में नहीं, बल्कि घरों की रसोई में बना पोषण युक्त आहार, गांव की सोच और समुदाय की भागीदारी से निकलता है। जब तक परिवार इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं समझेंगे तब तक एनआरसी जैसी सुविधाएं पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएंगी। (संवाद)
ऐसे बच्चों का होता है इलाज
एनआरसी में पांच वर्ष तक के उन बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनकी बांह की गोलाई 11.5 सेमी से कम हो, वजन-लंबाई के अनुपात में बहुत कमी हो या सूजन व बार-बार संक्रमण की समस्या हो। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी बताते हैं कि ऐसे बच्चों को लगभग 14 दिन तक भर्ती कर पौष्टिक भोजन, जांच और दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। इस वित्तीय वर्ष अब तक करीब 150 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भर्ती के दौरान मां को प्रतिदिन 100 रुपये की प्रोत्साहन सहायता भी मिलती है।
आसपास कोई बच्चा कमजोर, सुस्त दिखे, बार-बार बीमार पड़े या वजन न बढ़े तो उसे आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से एनआरसी तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। समय पर इलाज ही बच्चे की मुस्कान लौटा सकता है। -अक्षय त्रिपाठी, डीएम, बहराइच
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जिला स्वास्थ्य सूचना अधिकारी (डीएचआईओ) बृजेश सिंह के अनुसार इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार पोषण कार्यक्रमों के साथ-साथ अति कुपोषित बच्चों के इलाज हेतु जिला अस्पताल में 10 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित कर रही है। हालांकि, सामाजिक झिझक और परिवारों की असहमति के कारण कई जरूरतमंद बच्चे समय पर एनआरसी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर तक 2,298 बच्चों की स्क्रीनिंग में 844 बच्चे कुपोषित पाए गए। इनमें 821 स्थानीय स्तर पर इलाज योग्य थे, लेकिन केवल 570 ने उपचार लिया। वहीं, 23 अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी रेफर किया गया, जिनमें से सिर्फ 9 ही वहां पहुंच सके। ये आंकड़े बताते हैं कि चुनौती इलाज की सुविधा नहीं बल्कि बच्चों को इलाज तक पहुंचाना है।
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सीएमओ डॉ. संजय कुमार कहते हैं कि कुपोषण का समाधान सिर्फ अस्पतालों में नहीं, बल्कि घरों की रसोई में बना पोषण युक्त आहार, गांव की सोच और समुदाय की भागीदारी से निकलता है। जब तक परिवार इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं समझेंगे तब तक एनआरसी जैसी सुविधाएं पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएंगी। (संवाद)
ऐसे बच्चों का होता है इलाज
एनआरसी में पांच वर्ष तक के उन बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनकी बांह की गोलाई 11.5 सेमी से कम हो, वजन-लंबाई के अनुपात में बहुत कमी हो या सूजन व बार-बार संक्रमण की समस्या हो। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी बताते हैं कि ऐसे बच्चों को लगभग 14 दिन तक भर्ती कर पौष्टिक भोजन, जांच और दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। इस वित्तीय वर्ष अब तक करीब 150 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भर्ती के दौरान मां को प्रतिदिन 100 रुपये की प्रोत्साहन सहायता भी मिलती है।
आसपास कोई बच्चा कमजोर, सुस्त दिखे, बार-बार बीमार पड़े या वजन न बढ़े तो उसे आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से एनआरसी तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। समय पर इलाज ही बच्चे की मुस्कान लौटा सकता है। -अक्षय त्रिपाठी, डीएम, बहराइच