फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   Nutrition Rehabilitation Center is hope for malnourished children

Bahraich News: कुपोषित बच्चों के लिए उम्मीद है पोषण पुनर्वास केंद्र

Tue, 03 Feb 2026 11:58 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 11:58 PM IST
विज्ञापन
Nutrition Rehabilitation Center is hope for malnourished children
मेडिकल कॉलेज के पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती बच्चे।
बहराइच। जिले के बच्चों में कुपोषण की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। शेाध में पता चला कि कुपोषण सिर्फ कमजोरी नहीं बल्कि बच्चों के शरीर, दिमाग और भविष्य को प्रभावित करने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। कई परिवार इसे बीमारी या खतरे की स्थिति नहीं समझते और सोचते हैं कि बच्चा समय के साथ अपने-आप ठीक हो जाएगा। यही सोच कई बार बच्चों को अति कुपोषण की ओर धकेल देती है।
विज्ञापन

जिला स्वास्थ्य सूचना अधिकारी (डीएचआईओ) बृजेश सिंह के अनुसार इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार पोषण कार्यक्रमों के साथ-साथ अति कुपोषित बच्चों के इलाज हेतु जिला अस्पताल में 10 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित कर रही है। हालांकि, सामाजिक झिझक और परिवारों की असहमति के कारण कई जरूरतमंद बच्चे समय पर एनआरसी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
विज्ञापन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर तक 2,298 बच्चों की स्क्रीनिंग में 844 बच्चे कुपोषित पाए गए। इनमें 821 स्थानीय स्तर पर इलाज योग्य थे, लेकिन केवल 570 ने उपचार लिया। वहीं, 23 अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी रेफर किया गया, जिनमें से सिर्फ 9 ही वहां पहुंच सके। ये आंकड़े बताते हैं कि चुनौती इलाज की सुविधा नहीं बल्कि बच्चों को इलाज तक पहुंचाना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सीएमओ डॉ. संजय कुमार कहते हैं कि कुपोषण का समाधान सिर्फ अस्पतालों में नहीं, बल्कि घरों की रसोई में बना पोषण युक्त आहार, गांव की सोच और समुदाय की भागीदारी से निकलता है। जब तक परिवार इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं समझेंगे तब तक एनआरसी जैसी सुविधाएं पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएंगी। (संवाद)

ऐसे बच्चों का होता है इलाज

एनआरसी में पांच वर्ष तक के उन बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनकी बांह की गोलाई 11.5 सेमी से कम हो, वजन-लंबाई के अनुपात में बहुत कमी हो या सूजन व बार-बार संक्रमण की समस्या हो। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी बताते हैं कि ऐसे बच्चों को लगभग 14 दिन तक भर्ती कर पौष्टिक भोजन, जांच और दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। इस वित्तीय वर्ष अब तक करीब 150 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भर्ती के दौरान मां को प्रतिदिन 100 रुपये की प्रोत्साहन सहायता भी मिलती है।

आसपास कोई बच्चा कमजोर, सुस्त दिखे, बार-बार बीमार पड़े या वजन न बढ़े तो उसे आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से एनआरसी तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। समय पर इलाज ही बच्चे की मुस्कान लौटा सकता है। -अक्षय त्रिपाठी, डीएम, बहराइच
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed