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थानेे में नहीं आवास, दरोगा जी कहां करें निवास
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फखरपुर थाने में पुलिस कर्मियों का जर्जर भवन।
- फोटो : BAHRAICH
फखरपुर (बहराइच)। कानून व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है। अपराध एवं अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए थानों में पुलिस कर्मियों की तैनाती भी की गई है, लेकिन आवासीय समस्या से पुलिस कर्मी आज भी जूझ रहे हैं। फखरपुर थाने में 45 से 50 महिला व पुरुष सिपाहियों की तैनाती है, लेकिन आवास न होने से सभी किराये के भवन में रहकर ड्यूटी निभा रहे हैं। इस बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पुलिस के कंधों पर ग्रामीणों की सुरक्षा का जिम्मा रहता है। लेकिन पुलिस अपनी सुरक्षा व निवास के लिए किससे गुहार लगाए, यह सोचनीय है। फखरपुर थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को सुरक्षित आवास की अभी भी आस है। फखरपुर थाने में 12 दरोगा की तैनाती है, लेकिन इनके रहने के लिए आवास एक भी नहीं है। ऐसे में आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि उप निरीक्षक कहां निवास कर रहे हैं और थाने में आवासों की स्थिति क्या है।
लखनऊ-बहराइच मार्ग पर फखरपुर थाना स्थापित है। हाईवे पर थाना होने के कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसके अलावा क्राइम की घटनाओं को लेकर पुलिस को सतर्क रहना पड़ता है। लेकिन फखरपुर थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को आवास की दरकार है। थाने में आवासीय व्यवस्था न होने से एक अपराध निरीक्षक, 12 उपनिरीक्षक व आरक्षी किराये के मकान में रहते हैं। जबकि दरोगा थाने के बरामदे व पेड़ के नीचे बैठकर मुकदमों के केस की डायरी लिखते हैं।
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आलम यह है कि थाने में 45 से 50 महिला व पुरुष कर्मचारियों की तैनाती है। लेकिन थाना प्रभारी समेत मुश्किल से 10 कर्मचारी ही थाने पर रुकते हैं। जबकि थाने में तैनात अपराध निरीक्षक निखिल श्रीवास्तव थाने से 200 मीटर की दूरी भिलोरामोड़ और उपनिरीक्षक थाने से एक किलोमीटर दूरी पर किराये के मकान में रहते हैं। इसी तरह थाने में तैनात महिला सिपाही भी ब्लॉक मुख्यालय व अन्य सिपाही अलग-अलग जगहों पर रहने को विवश हैं।
पुलिस आवास व अन्य समस्या के लिए यहां तैनात थानाध्यक्ष ने कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आलम यह है कि वर्षों से आवास के लिए भटक रहे पुलिसकर्मियों को अपना घर नहीं मिला। सभी किराये के भवन में रहने को मजबूर हैं। जबकि इस दौरान प्रभारी निरीक्षकों के तबादले होते रहे। वहीं कभी घटना होने पर पुलिसकर्मियों को एकत्र होने में घंटों समय लग जाता है।
खुले में स्नान करते हैं सिपाही
फखरपुर थाने में जो सिपाही रहते हैं, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिस नल पर स्नान करते हैं, वहां पर किसी प्रकार की बाउंड्री नहीं है। उसकी चौकी दरक गई है। पानी बहने के लिए नाली भी नहीं है, जो पानी खुले में चारों तरफ बह रहा है। वहां चारों तरफ गंदगी फैली है। फैली गंदगी बीमारियों को दावत दे रही है।
इन कर्मचारियों की थाने में है तैनाती
फखरपुर थाने में प्रभारी निरीक्षक व अपराध निरीक्षक एक-एक, 12 उपनिरीक्षक, 12 महिला सिपाही, 16 पुरुष सिपाही, दो मुंशी समेत लगभग 46 कर्मचारी की तैनाती है।
उच्चाधिकारियों को दी है सूचना
फखरपुर थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के लिए आवास नहीं है, जिससे कुछ पुलिसकर्मी किराये के भवन में रह रहे हैं। इसके कारण तैनात कर्मचारियों को रहने के लिए समस्या बनी हुई है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। निर्माण की मंजूरी मिलते ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
- बृजेश कुमार पांडेय, प्रभारी निरीक्षक
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पुलिस के कंधों पर ग्रामीणों की सुरक्षा का जिम्मा रहता है। लेकिन पुलिस अपनी सुरक्षा व निवास के लिए किससे गुहार लगाए, यह सोचनीय है। फखरपुर थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को सुरक्षित आवास की अभी भी आस है। फखरपुर थाने में 12 दरोगा की तैनाती है, लेकिन इनके रहने के लिए आवास एक भी नहीं है। ऐसे में आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि उप निरीक्षक कहां निवास कर रहे हैं और थाने में आवासों की स्थिति क्या है।
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लखनऊ-बहराइच मार्ग पर फखरपुर थाना स्थापित है। हाईवे पर थाना होने के कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसके अलावा क्राइम की घटनाओं को लेकर पुलिस को सतर्क रहना पड़ता है। लेकिन फखरपुर थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को आवास की दरकार है। थाने में आवासीय व्यवस्था न होने से एक अपराध निरीक्षक, 12 उपनिरीक्षक व आरक्षी किराये के मकान में रहते हैं। जबकि दरोगा थाने के बरामदे व पेड़ के नीचे बैठकर मुकदमों के केस की डायरी लिखते हैं।
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आलम यह है कि थाने में 45 से 50 महिला व पुरुष कर्मचारियों की तैनाती है। लेकिन थाना प्रभारी समेत मुश्किल से 10 कर्मचारी ही थाने पर रुकते हैं। जबकि थाने में तैनात अपराध निरीक्षक निखिल श्रीवास्तव थाने से 200 मीटर की दूरी भिलोरामोड़ और उपनिरीक्षक थाने से एक किलोमीटर दूरी पर किराये के मकान में रहते हैं। इसी तरह थाने में तैनात महिला सिपाही भी ब्लॉक मुख्यालय व अन्य सिपाही अलग-अलग जगहों पर रहने को विवश हैं।
पुलिस आवास व अन्य समस्या के लिए यहां तैनात थानाध्यक्ष ने कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आलम यह है कि वर्षों से आवास के लिए भटक रहे पुलिसकर्मियों को अपना घर नहीं मिला। सभी किराये के भवन में रहने को मजबूर हैं। जबकि इस दौरान प्रभारी निरीक्षकों के तबादले होते रहे। वहीं कभी घटना होने पर पुलिसकर्मियों को एकत्र होने में घंटों समय लग जाता है।
खुले में स्नान करते हैं सिपाही
फखरपुर थाने में जो सिपाही रहते हैं, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिस नल पर स्नान करते हैं, वहां पर किसी प्रकार की बाउंड्री नहीं है। उसकी चौकी दरक गई है। पानी बहने के लिए नाली भी नहीं है, जो पानी खुले में चारों तरफ बह रहा है। वहां चारों तरफ गंदगी फैली है। फैली गंदगी बीमारियों को दावत दे रही है।
इन कर्मचारियों की थाने में है तैनाती
फखरपुर थाने में प्रभारी निरीक्षक व अपराध निरीक्षक एक-एक, 12 उपनिरीक्षक, 12 महिला सिपाही, 16 पुरुष सिपाही, दो मुंशी समेत लगभग 46 कर्मचारी की तैनाती है।
उच्चाधिकारियों को दी है सूचना
फखरपुर थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के लिए आवास नहीं है, जिससे कुछ पुलिसकर्मी किराये के भवन में रह रहे हैं। इसके कारण तैनात कर्मचारियों को रहने के लिए समस्या बनी हुई है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। निर्माण की मंजूरी मिलते ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
- बृजेश कुमार पांडेय, प्रभारी निरीक्षक