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Bahraich News: 10 ग्राम पंचायतों में ही सिमट गया मनरेगा का पांच करोड़ का बजट
Wed, 13 Aug 2025 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Wed, 13 Aug 2025 12:39 AM IST
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बहराइच। जिले के सैकड़ों गांवों के लिए शासन ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत पांच करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि भेजी थी। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्य कराने के उद्देश्य से भेजी गई थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी रकम केवल महसी, मिहींपुरवा, बलहा और शिवपुर विकासखंड की महज 10 ग्राम पंचायतों में ही खर्च हो गई।
गांव में विकास की गूंज जिले के कई इलाकों में खामोशी में बदल गई, क्योंकि वहां मनरेगा का एक भी काम नहीं हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शासन से आई कुल धनराशि में से 3.68 करोड़ 66 हजार रुपये श्रमिकों की मजदूरी पर खर्च किए गए। बाकी 1.67 करोड़ 52 हजार रुपये उन्हीं 10 ग्राम पंचायतों में कच्चे काम कराने पर खर्च कर दिए गए।
इसमें महसी ब्लॉक की परसोहना ग्राम पंचायत सबसे ऊपर है, जहां अकेले 1.05 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद मिहींपुरवा ब्लॉक के पुरैना अमृतपुर में 51 लाख, मटेही में 44 लाख, बलहा ब्लॉक के परसा अगेया में 41 लाख और सर्रा मुंदरी में 55 लाख रुपये खर्च किए गए।
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शिवपुर ब्लॉक के खड़ला कला में 66 लाख, ईंटहा में 59.75 लाख, महसी के सिसईया चूड़ामणि में 40.37 लाख, वंशपुरवा में 59 लाख, पिपरी मोहन में 69.55 लाख और औराही में 78.65 लाख रुपये खर्च करने का रिकॉर्ड दर्ज है।
मनरेगा का मकसद है ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार मजदूरों को साल में 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना और साथ ही गांव में आधारभूत ढांचे का विकास करना, लेकिन जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा का एक भी कार्य नहीं हुआ। इन गांवों के मजदूरों को न तो मजदूरी का लाभ मिला और न ही गांव के विकास का, इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बजट के वितरण में पक्षपात किया गया है और ज्यादातर पैसा कुछ ही गांवों में खर्च करके बाकी इलाकों की अनदेखी की गई है।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता और पंचायत मामलों के जानकारों का कहना है कि कुछ गांवों में करोड़ों रुपये खर्च होना और सैकड़ों पंचायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देना योजना की भावना के खिलाफ है। सामाजिक कार्यकर्ता रामनरेश का कहना है कि यह साफ संकेत है कि योजना का संचालन पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा है। जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार देने के बजाय कुछ जगहों पर मनमर्जी से काम कराए जा रहे हैं।
शिकायत पर की जाएगी जांच
मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र का कहना है कि सभी खर्च और कार्यों का ब्योरा रिकॉर्ड में दर्ज है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत आती है तो जांच की जाएगी। वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों, परियोजनाओं की प्राथमिकता और ग्राम पंचायतों की कार्ययोजनाओं के आधार पर बजट आवंटन में अंतर हो सकता है।
पंचायतवार खर्च का ब्योरा एक नजर में
विकासखंड ग्राम पंचायत खर्च (रुपये में)
महसी परसोहना 1,05,00,000
मिहींपुरवा पुरैना अमृतपुर 51,00,000
मिहींपुरवा मटेही 44,00,000
बलहा परसा अगेया 41,00,000
बलहा सर्रा मुंदरी 55,00,000
शिवपुर खड़ेला कला 66,00,000
शिवपुर ईंटहा 59,75,000
महसी सिसईया चूड़ामणि 40,37,000
महसी वंशपुरवा 59,00,000
महसी पिपरी मोहन 69,55,000
महसी औराही 78,65,000
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गांव में विकास की गूंज जिले के कई इलाकों में खामोशी में बदल गई, क्योंकि वहां मनरेगा का एक भी काम नहीं हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शासन से आई कुल धनराशि में से 3.68 करोड़ 66 हजार रुपये श्रमिकों की मजदूरी पर खर्च किए गए। बाकी 1.67 करोड़ 52 हजार रुपये उन्हीं 10 ग्राम पंचायतों में कच्चे काम कराने पर खर्च कर दिए गए।
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इसमें महसी ब्लॉक की परसोहना ग्राम पंचायत सबसे ऊपर है, जहां अकेले 1.05 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद मिहींपुरवा ब्लॉक के पुरैना अमृतपुर में 51 लाख, मटेही में 44 लाख, बलहा ब्लॉक के परसा अगेया में 41 लाख और सर्रा मुंदरी में 55 लाख रुपये खर्च किए गए।
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शिवपुर ब्लॉक के खड़ला कला में 66 लाख, ईंटहा में 59.75 लाख, महसी के सिसईया चूड़ामणि में 40.37 लाख, वंशपुरवा में 59 लाख, पिपरी मोहन में 69.55 लाख और औराही में 78.65 लाख रुपये खर्च करने का रिकॉर्ड दर्ज है।
मनरेगा का मकसद है ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार मजदूरों को साल में 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना और साथ ही गांव में आधारभूत ढांचे का विकास करना, लेकिन जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा का एक भी कार्य नहीं हुआ। इन गांवों के मजदूरों को न तो मजदूरी का लाभ मिला और न ही गांव के विकास का, इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बजट के वितरण में पक्षपात किया गया है और ज्यादातर पैसा कुछ ही गांवों में खर्च करके बाकी इलाकों की अनदेखी की गई है।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता और पंचायत मामलों के जानकारों का कहना है कि कुछ गांवों में करोड़ों रुपये खर्च होना और सैकड़ों पंचायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देना योजना की भावना के खिलाफ है। सामाजिक कार्यकर्ता रामनरेश का कहना है कि यह साफ संकेत है कि योजना का संचालन पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा है। जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार देने के बजाय कुछ जगहों पर मनमर्जी से काम कराए जा रहे हैं।
शिकायत पर की जाएगी जांच
मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र का कहना है कि सभी खर्च और कार्यों का ब्योरा रिकॉर्ड में दर्ज है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत आती है तो जांच की जाएगी। वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों, परियोजनाओं की प्राथमिकता और ग्राम पंचायतों की कार्ययोजनाओं के आधार पर बजट आवंटन में अंतर हो सकता है।
पंचायतवार खर्च का ब्योरा एक नजर में
विकासखंड ग्राम पंचायत खर्च (रुपये में)
महसी परसोहना 1,05,00,000
मिहींपुरवा पुरैना अमृतपुर 51,00,000
मिहींपुरवा मटेही 44,00,000
बलहा परसा अगेया 41,00,000
बलहा सर्रा मुंदरी 55,00,000
शिवपुर खड़ेला कला 66,00,000
शिवपुर ईंटहा 59,75,000
महसी सिसईया चूड़ामणि 40,37,000
महसी वंशपुरवा 59,00,000
महसी पिपरी मोहन 69,55,000
महसी औराही 78,65,000