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Bahraich News: 77 स्कूलों का विलय पूरा, खाली स्कूलों में पढ़ाएंगे विशेष संविदा शिक्षक

Thu, 03 Jul 2025 02:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Thu, 03 Jul 2025 02:50 AM IST
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Merger of 77 schools completed, special contract teachers will teach in vacant schools
बहराइच। स्कूल पेयरिंग योजना के तहत बहराइच जिले के 123 सरकारी स्कूलों को एक-दूसरे में समायोजित किया जाना है। अब तक 77 स्कूलों का विलय किया जा चुका है, जबकि शेष 46 स्कूलों की प्रक्रिया जारी है। विलय के कारण खाली हुए स्कूल भवनों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की तैयारी है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि यूपी सरकार की मंशा है कि कम नामांकन वाले स्कूलों को नजदीकी विद्यालयों में मिलाकर संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर उपयोग किया जाए। उसी के तहत इस नई योजना पर जिले में अमल शुरू हो गया है। जिले में चिह्नित 123 सरकारी स्कूलों का विलय जुलाई माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।
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पेयरिंग से खाली होंगे स्कूल, वहां चलेंगी आंगनबाड़ी और प्री-प्राइमरी कक्षाएं, तैनात होंगे विशेष शिक्षक

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने साफ किया है कि जिन स्कूलों को मर्ज कर दिया जाएगा, उनकी इमारतें बंद नहीं रहेंगी। वहां प्री-प्राइमरी कक्षाएं और आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाएंगे। इसके लिए विशेष शिक्षकों की तैनाती निजी सेवा प्रदाताओं के माध्यम से की जाएगी, जिन्हें 12,000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। बीएसए ने बताया कि इस योजना से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शिक्षक उपलब्धता में सुधार आएगा।
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एक किमी दूरी का मानक, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में दूरी 2 से 3 किमी तक

शासन ने पेयरिंग के लिए अधिकतम एक किलोमीटर की दूरी तय की है, लेकिन बहराइच के कई गांवों में यह मानक टूट रहा है। रिसिया, जरवल, मिहींपुरवा और कैसरगंज, महसी ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनका मर्जर दूरदराज के स्कूलों में किया गया है। यहां तक पहुंचने के लिए बच्चों को 2 से 3 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ेगा।


बेटियों की पढ़ाई पर सबसे बड़ा असर

गांव की रहने वाली सावित्री देवी बताती हैं, मेरी बेटी कक्षा 3 में है। पहले स्कूल खेत के पास था, अब नए स्कूल तक जाना मुश्किल है। बारिश में सड़क ही नहीं बचती। सामाजिक कार्यकर्ता रेखा मिश्रा कहती हैं कि दूरी बढ़ने से लड़कियों की स्कूल ड्रॉपआउट दर में इजाफा होगा। दो दशक पहले जो स्थिति थी, हम फिर वहीं लौट सकते हैं। कैसरगंज ब्लॉक के निवासी रमेश वर्मा बताते हैं कि हमारे गांव का स्कूल बंद कर दिया गया है। अब बच्चों को जो स्कूल मिला है, वो पूरे 2.5 किलोमीटर दूर है। बरसात में कैसे भेजें? वहीं, महसी क्षेत्र की शबनम खातून कहती हैं, बेटियों को अकेले इतनी दूर भेजना आसान नहीं है। पहले स्कूल घर के पास था, अब डर लगता है।


अधिकारियों का दावा बच्चों की सुविधा को प्राथमिकता
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि पेयरिंग में बच्चों की सुविधा और दूरी का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जहां दूरी अधिक है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शेष 46 स्कूलों की पेयरिंग प्रक्रिया जुलाई के अंत तक पूरी कर ली जाएगी।



अभिभावक भी नाखुश, विरोध की तैयारी में संगठन
जिले के कई गांवों में अभिभावकों ने स्कूल मर्जर के खिलाफ आवाज उठाई है। वहीं उत्त्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ तथा जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ सरकार की इस नई योजना का विरोध करते हुए आंदोलित हैं। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विद्याविलास पाठक का कहना है कि जिला व ब्लाॅक स्तर पर ज्ञापन सौंपा गया है। आवश्यकता हुई तो प्रदर्शन को और भी उग्र किया जाएगा।

क्या कहता है आंकड़ा

- कुल पेयरिंग प्रस्तावित स्कूल: 123
- पेयरिंग प्रक्रिया पूर्ण : 77
- शेष स्कूल : 46
- खाली स्कूल भवनों में संचालित होंगे आंगनबाड़ी व प्री-प्राइमरी क्लास
- विशेष शिक्षक का मानदेय : 12,000 रुपये प्रतिमाह
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