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किसी पार्टी का गढ़ नहीं बन सकी कैसरगंज सीट

Thu, 20 Jan 2022 10:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jan 2022 10:24 PM IST
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Kaiserganj seat could not become a stronghold of any party
बहराइच। जिले की कैसरगंज विधानसभा राष्ट्रीय राजमार्ग व घाघरा नदी के किनारे स्थित है। विधानसभा का एक बड़ा हिस्सा प्रतिवर्ष घाघरा की बाढ़ से प्रभावित रहता है। यहां के मतदाताओं ने कभी एक दल पर भरोसा नहीं जताया। मतदाताओं ने लगभग सभी दल के नेताओं को सदन में क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का मौका दिया है। लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। क्षेत्र में कई समस्याएं आज भी बनी हुई हैं।
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वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद जब इस विधानसभा एक बड़ा हिस्सा कटकर नवसृजित पयागपुर विधानसभा में शामिल हुआ और फखरपुर विधानसभा का अस्तित्व समाप्त कर उसका एक छोटा हिस्सा कैसरगंज विधानसभा में शामिल किया गया, तो इसका फायदा भाजपा को जरूर मिला था। भाजपा ने परिसीमन के बाद हुए दोनों चुनाव में जीत हासिल की थी। अब 2022 के चुनाव का बिगुल एक बार फिर बज गया है। प्रमुख दल पूरे दम खम के साथ क्षेत्र में अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए जुट गए हैं। वर्ष 2008 के परिसीमन का असर विधानसभा 2012 व 2017 के चुनाव में साफ दिखाई दिखा। हालांकि क्षेत्र के मतदाताओं ने किसी भी राजनैतिक दल को निराश नही किया था।
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वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट पर सुंदर सिंह व 1985 में कांग्रेस पार्टी से ही किसान पीजी कालेज प्रोफेसर डॉ. एहतशामवली खान चुनाव जीते। वर्ष 1989 में रामेतज एलकेडीबी पार्टी से चुनाव जीतकर सदन पंहुचने में कामयाब रहे। वहीे 1977 में जेएनपी से बाबू लाल वर्मा भी कैसरगंज विधानसभा का प्रतिनिधत्व सदन में कर चुके हैं। 1993 व 1996 में सपा के टिकट से रामतेज यादव पुन: चुनाव जीतकर सदन पंहुचे, तो वर्ष 2007 में विधानसभा की जनता ने बसपा के सोशल इंजीनियर फार्मूले को अपनाते हुए बसपा से गुलाम खां को चुनाव जिताकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया था।
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जनता ने भाजपा को इस विधानसभा से सबसे ज्यादा चार बार 1991 में रूदेंद्र विक्रम सिंह, 2002, 2012 व 2017 में मुकुट बिहारी वर्मा को सदन तक पंहुचाया है। अब वर्ष 2022 में 18वीं विधानसभा का बिगुल प्रदेश में बज चुका है। एक तरफ भाजपा अपनी राजनैतिक पकड़ को और मजबूत करने की तैयारी में है। दूसरी तरफ 37 वर्षों से अपनी खोई हुई जमीन को वापस लाने के लिए कांग्रेस और 26 वर्षों से सपा भी दिन रात एक हुए है। 15 वर्षों से विधानसभा से दूर हो चुकी बसपा भी एक बार फिर सोशल इंजीनियर के सहारे में विधानसभा का सफर तय करने की जुगत में जुटी हुई है। (संवाद)

मतदाताओं का समीकरण
वर्ष 2022 में जारी की गई मतदाता सूची में कैसरगंज सीट पर 3,90,231 मतदाता हैं। इसमें से 2,06,252 पुरुष व 1,83,965 महिला मतदाताओं की संख्या है। विधानसभा में जातीय समीकरण पर गौर किया जाए, तो यहां पिछड़ी जाति के यादव व कुर्मी के साथ दलित मतदाताओं की संख्या अधिक है। जबकि सवर्ण जाति में ब्राह्मण व ठाकुर मतदाताओं की संख्या मिलाकर 50 हजार के करीब है। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी करीब 65 हजार के आसपास बताई जा रही है।
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