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डेंगू के साथ जेई ने भी दी दस्तक
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बहराइच में जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज।
- फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। तराई में बीते एक माह से डेंगू ने दहशत मचा रखी है। डेंगू के बाद अब जापानी इंसेफ्लाइटिस ने भी दस्तक दे दी है। रैपिड जांच के बाद एलाइजा टेस्ट के लिए लखनऊ भेजे गए सैंपल में इसकी पुष्टि हुई है। डेंगू के साथ ही जेई की चपेट में आने से लोगों को बचाने के लिए स्वास्थ्य महकमे की ओर से सभी लोगों से साफ-सफाई के प्रति जागरूक होने की अपील की जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी स्थिति अभी सामान्य बता रहे हैं।
बीते लगभग एक माह से जिले के लोग डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। सिर्फ मेडिकल कॉलेज में बीते एक माह में डेंगू से पीड़ित लगभग डेढ़ सौ मरीजों का इलाज किया जा चुका है। रिसिया कस्बे में स्थित एक निजी नर्सिंग होम में डेंगू से पीड़ित एक युवक की मौत भी हो चुकी है। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन तेज बुखार से पीड़ित मरीजों के आने की संख्या भी बढ़ती जा रही है। काफी संख्या में लोग निजी नर्सिंग होम पर भी अपना इलाज करा रहे हैं।
रविवार को भी मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड में 14 मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा था। डेंगू के बाद अब जिले में जापानी इंसेफ्लाइटिस ने भी लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज में तेज बुखार से पीड़ित चार मरीजों में जापानी इंसेफ्लाइटिस के लक्षण देखते हुए उनका रैपिड टेस्ट कराया गया था। इसमें भी जेई के लक्षण दिखने पर एलाइजा टेस्ट के लिए उनका सैंपल लखनऊ भेजा गया था। जहां से उनमें जेई की पुष्टि हुई है। सभी को अलग वार्ड में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है।
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जांच की सुविधा न होने से परेशानी
मेडिकल कॉलेज में जापानी इंसेफ्लाइटिस की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मरीजों में लक्षण दिखने पर रैपिड टेस्ट कर चिकित्सकों द्वारा उनका इलाज किया जा रहा है। एलाइजा जांच के लिए मरीजों के सैंपल लखनऊ भेजे जा रहे हैं। जहां उनके टेस्ट के बाद भी जेई की पुष्टि हो रही है।
शीघ्र मिलेगी जांच की सुविधा
जापानी इंसेफ्लाइटिस का रैपिड टेस्ट कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। एलाइजा जांच के लिए टेस्ट किट लखनऊ से मंगवाई गई है। एक-दो दिन में किट आ जाने पर यहीं जांच की सुविधा मिल जाएगी। इसके साथ ही डेंगू व अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए मोबाइल यूनिट द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी दवा का वितरण कराने के साथ ही लोगों को रोगों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। -डॉ. एसके सिंह, सीएमओ
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बीते लगभग एक माह से जिले के लोग डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। सिर्फ मेडिकल कॉलेज में बीते एक माह में डेंगू से पीड़ित लगभग डेढ़ सौ मरीजों का इलाज किया जा चुका है। रिसिया कस्बे में स्थित एक निजी नर्सिंग होम में डेंगू से पीड़ित एक युवक की मौत भी हो चुकी है। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन तेज बुखार से पीड़ित मरीजों के आने की संख्या भी बढ़ती जा रही है। काफी संख्या में लोग निजी नर्सिंग होम पर भी अपना इलाज करा रहे हैं।
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रविवार को भी मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड में 14 मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा था। डेंगू के बाद अब जिले में जापानी इंसेफ्लाइटिस ने भी लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। मेडिकल कॉलेज में तेज बुखार से पीड़ित चार मरीजों में जापानी इंसेफ्लाइटिस के लक्षण देखते हुए उनका रैपिड टेस्ट कराया गया था। इसमें भी जेई के लक्षण दिखने पर एलाइजा टेस्ट के लिए उनका सैंपल लखनऊ भेजा गया था। जहां से उनमें जेई की पुष्टि हुई है। सभी को अलग वार्ड में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है।
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जांच की सुविधा न होने से परेशानी
मेडिकल कॉलेज में जापानी इंसेफ्लाइटिस की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मरीजों में लक्षण दिखने पर रैपिड टेस्ट कर चिकित्सकों द्वारा उनका इलाज किया जा रहा है। एलाइजा जांच के लिए मरीजों के सैंपल लखनऊ भेजे जा रहे हैं। जहां उनके टेस्ट के बाद भी जेई की पुष्टि हो रही है।
शीघ्र मिलेगी जांच की सुविधा
जापानी इंसेफ्लाइटिस का रैपिड टेस्ट कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। एलाइजा जांच के लिए टेस्ट किट लखनऊ से मंगवाई गई है। एक-दो दिन में किट आ जाने पर यहीं जांच की सुविधा मिल जाएगी। इसके साथ ही डेंगू व अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए मोबाइल यूनिट द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी दवा का वितरण कराने के साथ ही लोगों को रोगों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। -डॉ. एसके सिंह, सीएमओ