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बाघों की संख्या जानने में अभ्ाी लग सकता एक माह
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sun, 10 Jan 2016 10:58 PM IST
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में गर्मी में वन विभाग ने बाघों की गणना कैमरा ट्रैपिंग विधि से की थी। करीब डेढ़ महीने तक चली गणना के बाद सभी सभी रिकॉर्ड दुधवा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर को भेजे गए थे। लेकिन अब भी थर्मो सेंसर कैमरे की कमी के कारण दुधवा नेशनल पार्क में गणना चल रही है।
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इसलिए अब तक परिणाम घोषित नहीं हुआ है। परिणाम घोषित होने में एक माह का समय लगेगा। कतर्नियाघाट के साथ ही दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी के भी परिणाम वन मंत्रालय सार्वजनिक करेगा। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में वर्ष 2015 में वन विभाग ने मार्च के अंत से मई तक बाघों की गणना के लिए कैमरे लगाए थे।
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110 स्टेशनों पर थर्मों सेंसर कैमरे स्थापित किए गए थे। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने भी गणना में मदद की थी। करीब डेढ़ माह तक कैमरों में जंगल में बाघों के विचरण की गतिविधियां कैद हुई थीं। इसके बाद डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने सीडी तैयार कर बाघ गणना के लिए फील्ड डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क को भेजा था।
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लेकिन भारत सरकार ने कतर्नियाघाट के साथ ही किशनपुर सेंक्चुरी पीलीभीत और दुधवा नेशनल पार्क में भी बाघों की गणना का काम पूरा होने के बाद तीनों संरक्षित वन क्षेत्रों का परिणाम एकसाथ घोषित करने के निर्देश दिए थे। उसी के तहत दुधवा और किशनपुर में भी बाघों की गणना की तैयारी की गई।
कतर्नियाघाट के डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि थर्मों सेंसर कैमरे 150 हैं। इसके कारण इन कैमरों में एक बार में एक संरक्षित वन क्षेत्र की ही गणना हो पाती है। उसी के तहत पहले चक्र में कतर्नियाघाट में कैमरा ट्रैपिंग का काम पूरा किया गया था। उसके बाद यही थर्मो सेंसर कैमरे किशनपुर सेंक्चुरी में भी लगाए गए।
सप्ताह भर पूर्व वहां भी बाघों की गणना का काम पूरा हुआ है। अब दुधवा नेशनल पार्क में कैमरे स्थापित कर बाघ की गणना शुरू की गई है। नेशनल पार्क में भी अभी एक महीने तक कैमरे लगे रहेंगे। इसके बाद उनकी हार्ड कॉपी तैयार कर विशेषज्ञ बाघों की स्थिति का अध्ययन करेंगे।