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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   industrial zone of ekauna suffering for basic needs

इकौना के 52 में से चार आवंटी ही चला रहे उद्योग

Wed, 19 Aug 2015 10:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Wed, 19 Aug 2015 10:09 PM IST
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श्रावस्ती। औद्योगिक क्षेत्र सरकार की उदासीनता का शिकार है। मूलभूत सुविधाएं न होने के चलते 52 में से मात्र चार आवंटी ही उद्योग चला रहे हैं।
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बाकी जिन्होंने उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन आवंटित कराई थी, वे घर बनाकर रह रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में सुझाव व तकनीकी जानकारी देने के लिए बना कार्यालय जर्जर हो चुका है।

वर्ष 1990 में जिले में छोटे व मझोले उद्योग को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया गया था। 2.869 एकड़ में फैले इस औद्योगिक क्षेत्र में कुल 52 आवंटियों के लिए प्लॉट तैयार किए गए थे।
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लापरवाही के चलते वर्ष 2008 में औद्योगिक क्षेत्र की  भूमि पर आवंटन प्रक्रिया प्रारंभ की गई। इस दौरान 120 वर्ग मीटर की दर से 26 आवंटियों ने भूमि का आवंटन कराया था।
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लेकिन इस क्षेत्र में उद्योग चलाने के लिए न तो बिजली की व्यवस्था हो पाई और न ही पेयजल, सड़क व दूसरी बुनियादी सुविधाओं की।

बदहाल औद्योगिक क्षेत्र में असुविधाओं के चलते मात्र चार आवंटी छोटे उद्योग लगा सके। इनके अतिरिक्त और 26 आवंटियों ने औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग लगाने के बजाए वहीं घर बनाकर रहना शुरू कर दिया। तब से लेकर आज तक इस क्षेत्र में अव्यवस्था व बदहाली है।

इन असुविधाओं के चलते नहीं लग रहे उद्योग
आवंटन के समय वादा किया गया था कि एक माह के अंदर सारी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। लेकिन अभी तक न तो औद्योगिक क्षेत्र में माकूल ढंग से विद्युतीकरण हुआ और न ही पेयजल व आंतरिक क्षेत्र में सड़क व पार्किंग स्थल का ही निर्माण कराया गया। इतना ही नहीं उद्यमियों को एकल खिड़की की सुविधा दिलाने के लिए कोई व्यवस्था भी नहीं है।

सात वर्ष से इन परियोजनाओं का इंतजार
वर्ष 2008 में आवंटन के बाद औद्योगिक क्षेत्र में ट्रांसफार्मर व विद्युत लाइन के लिए 20.40 लाख, सीसी रोड व बाउंड्री के लिए 85.11 लाख व पेयजल के लिए 28.07 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। लेकिन अभी तक केवल पेयजल योजना को ही बजट का आवंटन किया जा सका है।


बिना बिजली के कैसे चले उद्योग
औद्योगिक क्षेत्र में तेल कोल्हू चलाने वाले राम शंकर का कहना है कि यहां बिजली नहीं है। डीजल इंजन से ही उद्योग चला रहे हें। ऐसे में उनकी लागत महंगी हो जाती है। चावल मिल चलाने वाले विष्णु व आटा उद्योग चलाने वाले शिवकुमार के साथ रस्सी उद्योग लगाने वाले राम बुझारत का कहना है कि जब कोई सुविधा है ही नहीं तो कैसा औद्योगिक क्षेत्र। इससे अच्छा था कि गांव में ही उद्योग लगाकर काम करते। 
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