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Bahraich News: भारत-नेपाल मिलकर रोकेंगे वन से जुड़े अपराध
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धर्मापुर रेंज की बॉर्डर चौकी पर बैठक करते भारत व नेपाल के अधिकारी।
मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट के जंगल में वन अपराध करने के बाद नेपाल की सीमा में पनाह लेने वाले अपराधियों के लिए अब सीमा पार भागना आसान नहीं होगा। वन एवं वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए भारत और नेपाल की संबंधित वन एवं सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय को और मजबूत करेंगी। सीमा से सटे संवेदनशील वन क्षेत्रों में दिन के साथ रात की गश्त बढ़ाई जाएगी। दोनों देशों में सक्रिय शिकारियों और अवैध कटान गिरोहों की सूची साझा कर उनके नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
जंगल एवं आसपास के इलाकों में आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम के लिए धर्मापुर रेंज की बॉर्डर चौकी पर शुक्रवार को भारत-नेपाल के वन और सुरक्षा अधिकारियों की समन्वय बैठक हुई। बैठक में धर्मापुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी दीपक मिश्र, वन विभाग की टीम, नेपाल के जयनगर वन प्रभाग के बबई उप वन प्रभाग की रेंज अधिकारी प्रभा कुमारी थापा, एसएसबी के सब इंस्पेक्टर धीरज कुमार भारद्वाज और नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के उप निरीक्षक कोट बहादुर ओली समेत दोनों देशों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
वन क्षेत्राधिकारी दीपक मिश्र ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर वन अपराधी वारदात के बाद सीमा पार निकलने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए दोनों देशों की एजेंसियां संदिग्ध गतिविधियों और अपराधियों से जुड़ी सूचनाएं तत्काल साझा करेंगी। संदिग्धों की आवाजाही के साथ उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी।
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डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सीमा क्षेत्र में वन एवं वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण साबित होगी। भारत और नेपाल की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय और मजबूत हो सकेगा। इससे जंगल और सीमावर्ती अपराधों पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि वन अपराधों में शामिल आरोपियों व गिरोहों की सूची दोनों देशों के बीच साझा की जाएगी। त्वरित सूचना आदान-प्रदान के लिए संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप और हॉटलाइन संपर्क को सक्रिय रखने पर भी बैठक में जोर दिया गया।
रात में भी होगी जंगल की संयुक्त निगरानी
सीमा से सटे संवेदनशील वन क्षेत्रों में संयुक्त गश्त बढ़ाई जाएगी। वन विभाग, एसएसबी और नेपाल एपीएफ की टीमें दिन के साथ रात में भी पेट्रोलिंग करेंगी। इस दौरान अवैध कटान, वन्यजीवों के शिकार, वन्यजीव तस्करी और सीमा पार संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
वन्यजीवों की आवाजाही पर भी नजर
कतर्नियाघाट का जंगल नेपाल सीमा से सटा होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बेहतर समन्वय से वन अपराधों के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर दोनों तरफ की टीमें तत्काल सक्रिय हो सकेंगी। इससे सीमा का फायदा उठाकर अपराधियों के बच निकलने की संभावना कम होगी।
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जंगल एवं आसपास के इलाकों में आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम के लिए धर्मापुर रेंज की बॉर्डर चौकी पर शुक्रवार को भारत-नेपाल के वन और सुरक्षा अधिकारियों की समन्वय बैठक हुई। बैठक में धर्मापुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी दीपक मिश्र, वन विभाग की टीम, नेपाल के जयनगर वन प्रभाग के बबई उप वन प्रभाग की रेंज अधिकारी प्रभा कुमारी थापा, एसएसबी के सब इंस्पेक्टर धीरज कुमार भारद्वाज और नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के उप निरीक्षक कोट बहादुर ओली समेत दोनों देशों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
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वन क्षेत्राधिकारी दीपक मिश्र ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर वन अपराधी वारदात के बाद सीमा पार निकलने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए दोनों देशों की एजेंसियां संदिग्ध गतिविधियों और अपराधियों से जुड़ी सूचनाएं तत्काल साझा करेंगी। संदिग्धों की आवाजाही के साथ उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी।
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डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सीमा क्षेत्र में वन एवं वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण साबित होगी। भारत और नेपाल की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय और मजबूत हो सकेगा। इससे जंगल और सीमावर्ती अपराधों पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि वन अपराधों में शामिल आरोपियों व गिरोहों की सूची दोनों देशों के बीच साझा की जाएगी। त्वरित सूचना आदान-प्रदान के लिए संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप और हॉटलाइन संपर्क को सक्रिय रखने पर भी बैठक में जोर दिया गया।
रात में भी होगी जंगल की संयुक्त निगरानी
सीमा से सटे संवेदनशील वन क्षेत्रों में संयुक्त गश्त बढ़ाई जाएगी। वन विभाग, एसएसबी और नेपाल एपीएफ की टीमें दिन के साथ रात में भी पेट्रोलिंग करेंगी। इस दौरान अवैध कटान, वन्यजीवों के शिकार, वन्यजीव तस्करी और सीमा पार संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
वन्यजीवों की आवाजाही पर भी नजर
कतर्नियाघाट का जंगल नेपाल सीमा से सटा होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बेहतर समन्वय से वन अपराधों के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर दोनों तरफ की टीमें तत्काल सक्रिय हो सकेंगी। इससे सीमा का फायदा उठाकर अपराधियों के बच निकलने की संभावना कम होगी।