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तेज हवा व बारिश ने बरपाया कहर
अमर उजाला/श्रावस्ती
Updated Fri, 10 Mar 2017 10:43 PM IST
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बरसात से गिरी फसल
- फोटो : अमर उजाला
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तराई में मौसम का मिजाज गुरुवार रात अचानक बदल गया। तेज हवाओं के साथ रात से शुरू हुई बरसात रुक रुककर दूसरे दिन भी जारी रही। तेज हवा और बारिश ने फसलों पर कहर बरपाया। किसान ओलावृष्टि की संभावना को लेकर परेशान दिखे।
पहाड़ों पर हुई बर्फबारी ने जहां मौसम का मिजाज ठंडा कर दिया। वहीं गुरुवार मध्य रात से शुरू हुई झमाझम बरसात रुक रुक कर शुक्रवार को भी जारी रही। मौसम के मिजाज में अचानक आए इस बदलाव के कारण लोगों को ठंड का अहसास हुआ। वहीं ओलावृष्टि की संभावनाओं को लेकर किसान परेशान दिखे। अचानक हुई इस बरसात के कारण दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
वहीं गेहूं पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 34211 हेक्टअर भूमि में दलहनी व 11191 हेक्टेअर भूमि में तिलहनी फसलें बोई गई हैं। अचानक हुई बरसात से दस प्रतिशत तक अरहर की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं खेतों से कटकर खलिहान पहुंच चुकी मसूर व सरसों के फसल के बर्बाद होने का खतरा भी है। तेज हवाओं के गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है।
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पहाड़ों पर हुई बर्फबारी ने जहां मौसम का मिजाज ठंडा कर दिया। वहीं गुरुवार मध्य रात से शुरू हुई झमाझम बरसात रुक रुक कर शुक्रवार को भी जारी रही। मौसम के मिजाज में अचानक आए इस बदलाव के कारण लोगों को ठंड का अहसास हुआ। वहीं ओलावृष्टि की संभावनाओं को लेकर किसान परेशान दिखे। अचानक हुई इस बरसात के कारण दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
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वहीं गेहूं पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 34211 हेक्टअर भूमि में दलहनी व 11191 हेक्टेअर भूमि में तिलहनी फसलें बोई गई हैं। अचानक हुई बरसात से दस प्रतिशत तक अरहर की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं खेतों से कटकर खलिहान पहुंच चुकी मसूर व सरसों के फसल के बर्बाद होने का खतरा भी है। तेज हवाओं के गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है।
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