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Bahraich News: पपहले डीएपी कम और अब पानी, कैसे हो किसानी
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बाबागंज क्षेत्र में सूखी पड़ी परमपुर-रामनगर माइनर।
- फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। रबी सीजन की मुख्य फसलों की बुआई के लिए किसानों को पानी की सख्त जरूरत है लेकिन जिले की अधिकांश नहरें व माइनर सूखी पड़ी हैं। किसानों को दर-दर भटकना पड़ रहा है और जिम्मेदार खामोश हैं।
गेहूं की बुआई के लिए जहां किसानों को खेत तैयार करने के लिए पानी चाहिए तो वहीं गन्ना व सरसों आदि फसलों को भी सिंचाई की जरूरत है। जिले में लगभग 5.3 लाख किसान हैं, जो खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। डीजल महंगा होने के चलते इनमें से अधिकांश किसान सिंचाई के लिए नहरों व माइनरों के पानी पर निर्भर हैं। बावजूद इसके रबी सीजन की मुख्य फसलों की बुआई के समय जिले की अधिकांश नहरें व माइनर खाली हैं।
सबसे ज्याद परेशानी गरीब किसानों को हो रही है जिनकी धान की फसल अतिवृष्टि के चलतेे खराब हो गयी थी और पूंजी के अभाव में वह कर्ज आदि लेकर गेहूं की बुआई में जुटे हैं। किसान रामदीन, भगोले, सहजराम, धर्मेन्द्र, रामनरेश आदि ने बताया कि पहले ही डीएपी किल्लत के चलते किसान परेशानी का सामना कर रहे हैं। वहीं अब नहरों व माइनरों मे पानी न होने से महंगे डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ रही है।
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पंपिंग सेट स्वामियों की करनी पड़ रही मान मनौव्वल
बाबागंज/रुपईडीहा। चौधरी चरण सिंह सरयू पम्प नहर में पानी न छोड़े जाने से किसानों के सामने सिंचाई की विकट समस्या खड़ी हो गई है। धान की फसल कटने के बाद अब गेहूं की बुआई की तैयारियों में लगे किसानों को सूखी नहरें परेशान कर रही हैं। वहीं जिन किसानों के खेतों में बोरिंग नहीं है, उन किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों को बोरिंग व इंजन स्वामियों का मान मनौव्वल करते देखा जा रहा है। किसान रामधीरज, जगमोहन, त्रिलोकी, नरेश जायसवाल आदि ने बताया कि परेशानी कब दूर होगी, पता नहीं।
पंपिंग सेट सहारा, बढ़ेगी लागत
नवाबगंज/पयागपुर/हुजूरपुर। गेहूं बुआई का समय निकलता जा रहा है लेकिन क्षेत्र की नहरों व माइनरों में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। ब्लॉक क्षेत्र के बाबा गांव, ढोड़े गांव, दशरथ पुरवा, हरिहरपुर, नंदा गांव, उमरिया, हसनपुर, सद्दू गांव, रामनगर, सेमरा आदि गांवों से गुजरी माइनरों से धूल उड़ रही है। किसान अखिलेश, पप्पू वर्मा, फौजदार, मुबारक अली आदि ने बताया कि माइनरों में पानी न होने से पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ रही है। जिससे कृषि लागत बढ़ रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ किसानों ने किया प्रदर्शन
बहराइच। पयागपुर विकासखंड के ससरहवा माइनर के निर्माण के बाद से आज तक पानी नहीं छोड़ा गया है। वहीं किसानों को आरोप है, कि विभाग की ओर इस माइनर की तीन बार सफाई कर पैसा निकाल लिया गया है। जिससे किसानों में आक्रोश है। किसान तहसीलदार पांडेय, राजकिशोर, बबलू, मनीष, इदरीस, मंसूर आदि ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया और पानी छोड़ने की मांग की।
बोरिंग नहीं हो रही, कैसे हो सिंचाई, आक्रोश
रुपईडीहा/नवाबगंज। क्षेत्र में सूखी पड़ी नहरों व माइनरों के चलते पिछड़ रही खेती किसानी को लेकर किसानों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। रुपईडीहा के गंगापुर निवासी किसान प्रमोद वर्मा, शेखर वर्मा निर्मल वर्मा, प्रताप आर्य, राम सुहागन वर्मा आदि ने बताया नहर में पानी ना होने से लगभग 300 बीघे की फसल प्रभावित हो रही है। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में बोरिंग नहीं हो रही है। ऐसे में अगर समय से नहरों व माइनरों में पानी नहीं दिया गया तो लगभग 400 से 500 बीघा फसल खराब हो जाएगी। वहीं नवाबगंज के किसान लतीफ अहमद, बिन्नू खान ने बताया कि पानी का स्तर नीचा होने से बोरिंग से पानी बहुत कम निकलता है। जिसके चलते कई घंटों में एक बीघे की सिंचाई हो पाती है।
माइनरों में 11 को छोड़ा जाएगा पानी
नहरों व माइनरों में आगामी छह दिसंबर से पानी छोड़ना प्रस्तावित था, लेकिन मांग की कमी के चलते इसे 11 दिसंबर कर दिया गया है। नवाबगंज क्षेत्र में पानी की ज्यादा मांग है। वहां एक-दो दिनों में पानी उपलब्ध हो जाएगी। पयागपुर के ससरहवा माइनर के संबंध में जानकारी नहीं है। -दिनेश कुमार, अधिशाषी अभियंता नोडल सिंचाई
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गेहूं की बुआई के लिए जहां किसानों को खेत तैयार करने के लिए पानी चाहिए तो वहीं गन्ना व सरसों आदि फसलों को भी सिंचाई की जरूरत है। जिले में लगभग 5.3 लाख किसान हैं, जो खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। डीजल महंगा होने के चलते इनमें से अधिकांश किसान सिंचाई के लिए नहरों व माइनरों के पानी पर निर्भर हैं। बावजूद इसके रबी सीजन की मुख्य फसलों की बुआई के समय जिले की अधिकांश नहरें व माइनर खाली हैं।
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सबसे ज्याद परेशानी गरीब किसानों को हो रही है जिनकी धान की फसल अतिवृष्टि के चलतेे खराब हो गयी थी और पूंजी के अभाव में वह कर्ज आदि लेकर गेहूं की बुआई में जुटे हैं। किसान रामदीन, भगोले, सहजराम, धर्मेन्द्र, रामनरेश आदि ने बताया कि पहले ही डीएपी किल्लत के चलते किसान परेशानी का सामना कर रहे हैं। वहीं अब नहरों व माइनरों मे पानी न होने से महंगे डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ रही है।
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पंपिंग सेट स्वामियों की करनी पड़ रही मान मनौव्वल
बाबागंज/रुपईडीहा। चौधरी चरण सिंह सरयू पम्प नहर में पानी न छोड़े जाने से किसानों के सामने सिंचाई की विकट समस्या खड़ी हो गई है। धान की फसल कटने के बाद अब गेहूं की बुआई की तैयारियों में लगे किसानों को सूखी नहरें परेशान कर रही हैं। वहीं जिन किसानों के खेतों में बोरिंग नहीं है, उन किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों को बोरिंग व इंजन स्वामियों का मान मनौव्वल करते देखा जा रहा है। किसान रामधीरज, जगमोहन, त्रिलोकी, नरेश जायसवाल आदि ने बताया कि परेशानी कब दूर होगी, पता नहीं।
पंपिंग सेट सहारा, बढ़ेगी लागत
नवाबगंज/पयागपुर/हुजूरपुर। गेहूं बुआई का समय निकलता जा रहा है लेकिन क्षेत्र की नहरों व माइनरों में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। ब्लॉक क्षेत्र के बाबा गांव, ढोड़े गांव, दशरथ पुरवा, हरिहरपुर, नंदा गांव, उमरिया, हसनपुर, सद्दू गांव, रामनगर, सेमरा आदि गांवों से गुजरी माइनरों से धूल उड़ रही है। किसान अखिलेश, पप्पू वर्मा, फौजदार, मुबारक अली आदि ने बताया कि माइनरों में पानी न होने से पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ रही है। जिससे कृषि लागत बढ़ रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ किसानों ने किया प्रदर्शन
बहराइच। पयागपुर विकासखंड के ससरहवा माइनर के निर्माण के बाद से आज तक पानी नहीं छोड़ा गया है। वहीं किसानों को आरोप है, कि विभाग की ओर इस माइनर की तीन बार सफाई कर पैसा निकाल लिया गया है। जिससे किसानों में आक्रोश है। किसान तहसीलदार पांडेय, राजकिशोर, बबलू, मनीष, इदरीस, मंसूर आदि ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया और पानी छोड़ने की मांग की।
बोरिंग नहीं हो रही, कैसे हो सिंचाई, आक्रोश
रुपईडीहा/नवाबगंज। क्षेत्र में सूखी पड़ी नहरों व माइनरों के चलते पिछड़ रही खेती किसानी को लेकर किसानों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। रुपईडीहा के गंगापुर निवासी किसान प्रमोद वर्मा, शेखर वर्मा निर्मल वर्मा, प्रताप आर्य, राम सुहागन वर्मा आदि ने बताया नहर में पानी ना होने से लगभग 300 बीघे की फसल प्रभावित हो रही है। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में बोरिंग नहीं हो रही है। ऐसे में अगर समय से नहरों व माइनरों में पानी नहीं दिया गया तो लगभग 400 से 500 बीघा फसल खराब हो जाएगी। वहीं नवाबगंज के किसान लतीफ अहमद, बिन्नू खान ने बताया कि पानी का स्तर नीचा होने से बोरिंग से पानी बहुत कम निकलता है। जिसके चलते कई घंटों में एक बीघे की सिंचाई हो पाती है।
माइनरों में 11 को छोड़ा जाएगा पानी
नहरों व माइनरों में आगामी छह दिसंबर से पानी छोड़ना प्रस्तावित था, लेकिन मांग की कमी के चलते इसे 11 दिसंबर कर दिया गया है। नवाबगंज क्षेत्र में पानी की ज्यादा मांग है। वहां एक-दो दिनों में पानी उपलब्ध हो जाएगी। पयागपुर के ससरहवा माइनर के संबंध में जानकारी नहीं है। -दिनेश कुमार, अधिशाषी अभियंता नोडल सिंचाई