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40 साल से जमीन के मुआवजे के लिए भटक रहा किसान

Sat, 07 Dec 2019 09:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2019 09:51 PM IST
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Farmers wandering for compensation of land for 40 years
पयागपुर (बहराइच)। विकास खंड पयागपुर के पैड़ी गांव में 40 साल पूर्व नहर निकाली गई थी। नहर के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर उनको मुआवजा दिया गया था। क्षेत्र से निकाली गई नहर में एक किसान की जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया, लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से दिए गए गजट में उसके गाटे को दर्ज ही नहीं किया गया। 40 साल से किसान जमीन के मुआवजे के लिए चक्कर लगा रहा है। कई प्रार्थना पत्र देने के बाद भी आज तक उसे मुआवजा नहीं मिल सका है। पीड़ित किसान ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने की मांग की है।
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विकास खंड पयागपुर में सिंचाई निर्माण खंड गोंडा की ओर से वर्ष 1981-82 में सरयू नहर का निर्माण कराया गया था। नहर की खोदाई के लिए पैड़ी गांव में किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। सिंचाई निर्माण खंड की ओर से किसानों को मुआवजा देने के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का गजट प्रकाशित कराया गया था। लेकिन इस बजट में गांव निवासी रामनरायन के गाटा संख्या को डाला ही नहीं गया था, जिससे किसान को मुआवजा नहीं मिला।
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रामनरायन की मौत के बाद उनके भतीजे शिवकुमार पुत्र सत्यनरायन के नाम पर वरासत में जमीन दर्ज हुई। अभिलेखों का परीक्षण किए जाने के बाद शिवकुमार को जमीन के नहर में होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ ही डीएम, एडीएम और भूमि आध्याप्ति अधिकारी को पत्र दिया।
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किसान शिवकुमार तिवारी का कहना है कि वह लगभग 20 बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे चुके हैं, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से जमीन का मुआवजा देने की कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित किसान शिवकुमार ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।

काफी पुराना है मामला
सिंचाई निर्माण खंड गोंडा की ओर से नहर निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण किए जाने का प्रस्ताव दिया गया था। सरयू नहर खंड पांच की ओर से नहर की देखरेख की जा रही है। काफी पुराना मामला होने के कारण पूरी जानकारी नहीं है। अभिलेख देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- संजय सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई
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